नरवाई जलाने पर प्रशासन सख्त, भांगिया गांव के किसान पर FIR दर्ज
सिवनी मालवा क्षेत्र में प्रतिबंधात्मक आदेशों के उल्लंघन पर कार्रवाई, ड्रोन और सैटेलाइट से हो रही निगरानी


सिवनी मालवा। जिले में खेतों में नरवाई जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। सिवनी मालवा थाना क्षेत्र के ग्राम भांगिया में खेत में नरवाई जलाने के साक्ष्य मिलने पर किसान ओमप्रकाश के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 223(क) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। कलेक्टर आशीष वशिष्ठ के निर्देश पर जिले में नरवाई प्रबंधन की लगातार निगरानी की जा रही है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षण में मिले नरवाई जलाने के साक्ष्य
प्रशासन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम भांगिया में संयुक्त ग्राम स्तरीय नरवाई समिति ने निरीक्षण किया। इस दौरान हल्का पटवारी, ग्राम कोटवार और कृषि विस्तार अधिकारी को किसान ओमप्रकाश के खेत में नरवाई जलाने के साक्ष्य मिले। इसके बाद संबंधित किसान के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराई गई।
प्रशासन की इस कार्रवाई को फसल अवशेष जलाने पर रोक लगाने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, किसानों को लगातार जागरूक किया जा रहा है, लेकिन प्रतिबंधात्मक आदेशों के उल्लंघन के मामलों में कार्रवाई भी की जाएगी।
ड्रोन और सैटेलाइट से निगरानी
खेतों में फसल कटाई के बाद बचे अवशेषों को जलाने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए निगरानी व्यवस्था मजबूत की गई है। राज्य स्तर पर सैटेलाइट के माध्यम से नरवाई जलाने की घटनाओं पर नजर रखी जा रही है, जबकि स्थानीय स्तर पर ड्रोन की मदद से निगरानी की जा रही है। इसके अलावा गठित क्विक रिस्पांस टीमें भी सक्रिय हैं।
कलेक्टर आशीष वशिष्ठ के निर्देश पर संबंधित विभागों के अधिकारियों और किसान प्रतिनिधियों के साथ बैठकें आयोजित कर नरवाई जलाने से होने वाले नुकसान की जानकारी दी जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य जागरूकता और निगरानी के माध्यम से खेतों में आग लगाने की घटनाओं को रोकना है।
मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण को होता है नुकसान
फसल अवशेष जलाने से मिट्टी में मौजूद उपयोगी सूक्ष्मजीव प्रभावित हो सकते हैं। इसके साथ ही मिट्टी के जैविक पदार्थों और पोषक तत्वों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। नरवाई जलाने से उठने वाला धुआं वायु प्रदूषण बढ़ाता है और खेतों के आसपास आग फैलने का खतरा भी पैदा करता है।
इन्हीं कारणों से प्रशासन किसानों को नरवाई जलाने के बजाय उपलब्ध कृषि यंत्रों की मदद से फसल अवशेषों के उचित प्रबंधन के लिए प्रेरित कर रहा है।
कृषि यंत्रों के लिए कस्टम हायरिंग केंद्रों से लें मदद
जिला प्रशासन ने किसानों से अपील की है कि वे फसल कटाई के बाद खेतों में बचे अवशेषों को न जलाएं। जिन किसानों के पास नरवाई प्रबंधन के लिए आवश्यक कृषि यंत्र उपलब्ध नहीं हैं, वे स्थानीय स्तर पर मशीनें उपलब्ध कराने वाले किसानों से संपर्क कर सकते हैं।
इसके अतिरिक्त कृषि विभाग द्वारा संचालित जे-फार्मा ऐप के माध्यम से कस्टम हायरिंग केंद्रों और कृषि यंत्रों की सेवाएं देने वाले सेवा प्रदाताओं से संपर्क कर मशीनें प्राप्त की जा सकती हैं।
प्रशासन ने किसानों से पर्यावरण संरक्षण, भूमि की उर्वरता बनाए रखने और आगजनी की घटनाओं को रोकने में सहयोग करने की अपील की है। साथ ही संकेत दिया है कि जिले में नरवाई प्रबंधन की निगरानी आगे भी जारी रहेगी।

