माखननगर CDPO सुषमा चौरसिया के निलंबन पर हाईकोर्ट की रोक, 30 दिन में अपील करने की छूट
माखननगर CDPO सुषमा चौरसिया के निलंबन आदेश पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई। याचिकाकर्ता को 30 दिन में राज्यपाल के समक्ष अपील करने और छह महीने में निर्णय का निर्देश।


माखननगर। महिला एवं बाल विकास विभाग की माखननगर परियोजना अधिकारी सुषमा चौरसिया को निलंबित करने के मामले में हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। नर्मदापुरम के कमिश्नर श्रीकांत बनोठ द्वारा 28 सितंबर 2026 को जारी निलंबन आदेश पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को 30 दिनों के भीतर राज्यपाल के समक्ष अपील दायर करने की छूट दी है। साथ ही निर्देश दिया है कि निर्धारित अवधि में अपील प्रस्तुत होने पर उस पर विचार कर अगले छह महीने के भीतर निर्णय लिया जाए।
संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर की थी याचिका
सुषमा चौरसिया ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कमिश्नर के निलंबन आदेश को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता उत्कर्ष पचौरी ने अदालत में दलील दी कि आंगनवाड़ी सहायिका से कार्यकर्ता पद पर पदोन्नति की प्रक्रिया में एक अभ्यर्थी को उसकी स्नातक डिग्री के आधार पर अंक दिए गए थे। कमिश्नर का मानना था कि संबंधित नीति के तहत इस आधार पर अंक नहीं दिए जा सकते थे। इसी मामले को लेकर परियोजना अधिकारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई।
पदोन्नत कर्मचारी पर कार्रवाई नहीं होने का भी उठाया मुद्दा
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में यह भी तर्क दिया गया कि जिस अभ्यर्थी को स्नातक डिग्री के आधार पर अंक देकर पदोन्नति दी गई थी, उसकी पदोन्नति निरस्त नहीं की गई है और वह अब भी पदोन्नत पद पर कार्यरत है। ऐसे में निलंबन के लिए बताए गए आधार को चुनौती दी गई।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से पेश सरकारी अधिवक्ता हितेंद्र सिंह ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के पास निलंबन आदेश के खिलाफ अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष अपील करने का वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध है।
हाईकोर्ट ने निलंबन आदेश पर लगाई रोक
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और कमिश्नर के आदेश पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने 28 सितंबर 2026 के निलंबन आदेश पर रोक लगा दी। अदालत ने याचिकाकर्ता को 30 दिनों के भीतर राज्यपाल के समक्ष अपील प्रस्तुत करने की अनुमति दी है। आदेश के अनुसार, यदि निर्धारित समय में अपील दायर की जाती है, तो उस पर विचार कर छह महीने के भीतर निर्णय लिया जाएगा।
अदालत ने इसी निर्देश के साथ रिट याचिका का निपटारा कर दिया। यह आदेश निलंबन विवाद में याचिकाकर्ता को राहत देता है, हालांकि अपील पर अंतिम निर्णय अभी होना बाकी है।
क्या है पूरा मामला?
गौरतलब है कि माखननगर परियोजना में आंगनवाड़ी सहायिका से कार्यकर्ता पद पर पदोन्नति को लेकर वरिष्ठता और चयन प्रक्रिया पर सवाल उठे थे। शिकायत के अनुसार, बज्जरवाड़ा क्षेत्र में पदोन्नति के दौरान नियुक्ति तिथि के आधार पर वरिष्ठता को लेकर विवाद सामने आया था। इस मामले में परियोजना अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा गया था। इसके बाद कमिश्नर ने 28 सितंबर को निलंबन आदेश जारी किया था।
अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद निर्धारित समय में अपील दायर होने पर सक्षम प्राधिकारी को छह महीने के भीतर उस पर निर्णय लेना होगा। इस प्रकरण में अंतिम स्थिति अपील पर होने वाले फैसले के बाद स्पष्ट होगी।
