MP News:बुधनी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजना में बड़ी कार्रवाई, लापरवाह ठेकेदार का अनुबंध रद्द, 5.40 करोड़ की बैंक गारंटी जब्त
बुधनी अधोसंरचना विकास परियोजना में गंभीर लापरवाही और कार्यों की बेहद धीमी प्रगति पर एमपीयूडीसी ने ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। अनुबंध समाप्त कर कंपनी को एक वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट किया गया तथा 5.40 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी राजसात कर दी गई।


भोपाल/सीहोर। मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी (एमपीयूडीसी) ने सीहोर जिले की महत्वाकांक्षी बुधनी अधोसंरचना विकास परियोजना में गंभीर लापरवाही बरतने वाले संविदाकार पर बड़ी कार्रवाई की है। निर्माण कार्यों में लगातार देरी, अनुबंध की शर्तों के उल्लंघन और खराब प्रगति को देखते हुए कंपनी ने संविदाकार का अनुबंध तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया है, उसे एक वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया है तथा करीब 5 करोड़ 40 लाख रुपये की बैंक गारंटी भी राजसात कर ली है।
निर्माण कार्यों में लगातार मिल रही थी शिकायतें
एमपीयूडीसी के अनुसार, संयुक्त उपक्रम मेसर्स जेएससी आईए वोज़रोज़्देनिये इंडिया प्राइवेट लिमिटेड एवं मेसर्स काश्यपी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड को एमपीयूएसआईपी-एएफ पैकेज-1जी (ए) के तहत बुधनी में कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
इनमें प्रमुख रूप से—
टॉय विलेज
रेंटल हाउसिंग
कन्वेंशन सेंटर
स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स
हाट बाजार
अन्य शहरी अधोसंरचना परियोजनाएं
शामिल थीं।
कई चेतावनियों के बाद भी नहीं सुधरी कार्यप्रणाली
एमपीयूडीसी ने बताया कि संविदाकार को समय-समय पर समीक्षा बैठकों के माध्यम से कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। पर्याप्त मशीनरी लगाने, तकनीकी संसाधन बढ़ाने तथा आवश्यक ड्राइंग एवं डिजाइन समय पर उपलब्ध कराने को भी कहा गया।
इसके बावजूद कार्यों की गति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। विभाग ने कई कारण बताओ नोटिस और लिखित चेतावनियां भी जारी कीं, लेकिन स्थिति जस की तस बनी रही।
स्पष्टीकरण भी नहीं आया काम
कंपनी ने संविदाकार द्वारा प्रस्तुत जवाब और स्पष्टीकरण का तकनीकी एवं प्रशासनिक स्तर पर परीक्षण किया। जांच में पाया गया कि दिए गए जवाब वास्तविक प्रगति और अनुबंध की शर्तों के अनुरूप संतोषजनक नहीं हैं।
इसके बाद उपलब्ध तकनीकी रिपोर्टों और रिकॉर्ड के आधार पर अनुबंध समाप्त करने का अंतिम निर्णय लिया गया।
5.40 करोड़ की बैंक गारंटी भी जब्त
प्रबंध संचालक संकेत भोंडवे के निर्देश पर न केवल अनुबंध समाप्त किया गया, बल्कि संविदाकार को एक वर्ष के लिए ब्लैकलिस्ट भी कर दिया गया। साथ ही लगभग 5 करोड़ 40 लाख रुपये की बैंक गारंटी राजसात कर सरकारी हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की गई।
सरकार का स्पष्ट संदेश
एमपीयूडीसी ने कहा कि राज्य सरकार की अधोसंरचना परियोजनाओं में गुणवत्ता, समयबद्धता और वित्तीय अनुशासन सर्वोच्च प्राथमिकता है। यदि कोई ठेकेदार कार्यों में लापरवाही करता है, अनुबंध का उल्लंघन करता है या परियोजनाओं को अनावश्यक रूप से विलंबित करता है, तो उसके खिलाफ अनुबंध के प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी।
कंपनी का कहना है कि यह कार्रवाई केवल दंडात्मक नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन की सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि विकास परियोजनाओं में लापरवाही अब किसी भी स्तर पर स्वीकार नहीं की जाएगी।
