408 साल पुरानी खप्पर परंपरा: जलता खप्पर और तलवार लेकर निकलीं माता अंबे, 5 हजार भक्तों ने किए दर्शन
नवरात्र पर क्षत्रिय भावसार समाज ने निभाई ऐतिहासिक परंपरा, निमाड़ी गरबियों पर 30 मिनट तक रमती रहीं माता; गणेशजी, हनुमानजी और भूत-पिशाच के स्वरूप भी निकले


नवरात्र पर्व पर रविवार देर रात क्षत्रिय भावसार समाज ने अपनी 408 साल पुरानी खप्पर परंपरा का निर्वहन किया। भावसार मोहल्ला स्थित श्री सिद्धनाथ महादेव मंदिर से माता अंबे की भव्य सवारी निकाली गई। सवारी में माता अंबे के स्वरूप में एक हाथ में जलता हुआ खप्पर और दूसरे हाथ में तलवार धारण कर भक्तों को दर्शन दिए गए। इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन में करीब पांच हजार श्रद्धालु शामिल हुए। माता के जयकारों और भक्ति गीतों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया।
झाड़ स्तंभ की पूजा से हुई परंपरा की शुरुआत
खप्पर परंपरा के तहत सबसे पहले झाड़ स्तंभ की विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद तड़के करीब 4:30 बजे माता अंबे की सवारी निकाली गई। जलता खप्पर और तलवार धारण किए माता के स्वरूप ने श्रद्धालुओं को दर्शन दिए। सवारी के दौरान माता निमाड़ी गरबियों पर करीब 30 मिनट तक रमती रहीं। इस दौरान बड़ी संख्या में मौजूद भक्तों ने जयकारे लगाकर अपनी आस्था व्यक्त की।
आयोजन में गणेशजी, हनुमानजी और भूत-पिशाच के स्वरूप भी शामिल हुए। भक्ति गीतों और माता की स्तुति के बीच पूरी सवारी धार्मिक उत्साह के साथ संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की।
चार सदियों से निभाई जा रही परंपरा
खप्पर समिति के सदस्यों जगदीश भावसार, मधु भावसार और मनोहर भावसार ने बताया कि खप्पर परंपरा करीब 408 वर्षों से लगातार निभाई जा रही है। एक ही कुल के लोग पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस परंपरा को आगे बढ़ाते आ रहे हैं। हर वर्ष नवरात्र के अवसर पर आयोजित होने वाली इस सवारी में हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
समाज की यह ऐतिहासिक परंपरा धार्मिक आस्था के साथ पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत का भी प्रतीक है। आयोजन के माध्यम से समाज के लोग अपनी परंपराओं और मान्यताओं को जीवंत बनाए हुए हैं।
इन कलाकारों ने धारण किए देवी-देवताओं के स्वरूप
मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र भावसार के अनुसार, माता अंबे का स्वरूप हरिओम और सोनू बादशाह ने धारण किया। गणेशजी के स्वरूप में दिव्यांश भावसार और गर्व शामिल हुए, जबकि हनुमानजी का स्वरूप शशिकांत पटेल ने निभाया।
खप्पर परंपरा के दौरान श्रद्धालुओं की बड़ी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष बना दिया। 408 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के प्रति समाज की आस्था और सहभागिता ने एक बार फिर क्षेत्र में नवरात्र की धार्मिक छटा बिखेर दी।
