सहारनपुर PNB करेंसी चेस्ट में 17.29 करोड़ के जाली नोट
सहारनपुर PNB करेंसी चेस्ट में 17.29 करोड़ के जाली नोट मिलने के मामले में SIT ने जांच तेज की। CCTV फुटेज, कॉल डिटेल और डिजिटल साक्ष्यों से आरोपियों की तलाश जारी है।


सहारनपुर। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की घंटाघर स्थित करेंसी चेस्ट में 17.29 करोड़ रुपये के जाली नोट मिलने के मामले में पुलिस की जांच अब डिजिटल साक्ष्यों पर केंद्रित होती जा रही है। मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने बृहस्पतिवार को करेंसी चेस्ट पहुंचकर CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल की। पुलिस संदिग्ध कर्मचारियों और मामले से जुड़े लोगों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), मोबाइल लोकेशन तथा आपसी संपर्क की भी जांच कर रही है।
हालांकि, मामले में नामजद तीनों आरोपी अभी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। पुलिस की कई टीमें उनकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं।
करेंसी चेस्ट से जुड़े लोगों की गतिविधियों पर नजर
PNB की करेंसी चेस्ट से करोड़ों रुपये के गबन और जाली नोट मिलने के मामले में कोतवाली सदर बाजार पुलिस के साथ सर्विलांस और क्राइम ब्रांच की टीमें भी जांच में जुटी हैं। एसएसपी द्वारा गठित SIT अलग से मामले की कड़ियां जोड़ने में लगी है।
जांच के दायरे में करेंसी चेस्ट से जुड़े कर्मचारी और हाल के दिनों में बैंक में आने-जाने वाले लोग भी शामिल किए गए हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि करेंसी चेस्ट और उससे जुड़े संवेदनशील स्थानों तक किन-किन लोगों की पहुंच थी।
इसके लिए बैंक परिसर के अंदर और बाहर लगे CCTV कैमरों की पुरानी रिकॉर्डिंग खंगाली जा रही है। बैंक के आसपास लगे अन्य कैमरों से प्राप्त फुटेज को भी मिलाया जा रहा है, ताकि संदिग्ध गतिविधियों और लोगों की आवाजाही की कड़ियां जोड़ी जा सकें।
SIT ने करेंसी चेस्ट पहुंचकर खंगाली CCTV फुटेज
बृहस्पतिवार को SIT की टीम ने PNB की करेंसी चेस्ट का निरीक्षण किया। टीम ने करेंसी चेस्ट के अंदर के अलावा बाहर और आसपास लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग की भी जांच की।
पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि जाली नोट करेंसी चेस्ट तक किस माध्यम से पहुंचे और इस पूरी प्रक्रिया में किन लोगों की भूमिका रही। जांच अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती जाली नोटों के स्रोत तथा उन्हें करेंसी चेस्ट तक पहुंचाने वाले व्यक्ति या नेटवर्क की पहचान करना है।
मोबाइल और कॉल डिटेल भी जांच का अहम हिस्सा
पुलिस अब डिजिटल साक्ष्यों के जरिए संदिग्ध लोगों के बीच संपर्क और गतिविधियों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
जांच के दौरान संदिग्ध अवधि में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), लोकेशन और आपसी संपर्क की पड़ताल की जा रही है। विशेष रूप से उन मोबाइल नंबरों पर ध्यान दिया जा रहा है, जिनसे संदिग्ध कर्मचारियों या मामले से जुड़े लोगों के बीच लगातार बातचीत हुई थी।
पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि घटना से पहले और बाद में संदिग्ध लोगों की गतिविधियां किस क्षेत्र में थीं और उनके बीच किस तरह का संपर्क हुआ।
आरोपियों के मोबाइल नंबर बंद, लोकेशन तलाशने में मुश्किल
पुलिस के मुताबिक, मामले में नामजद आरोपियों के मोबाइल नंबर बंद बताए जा रहे हैं। इसके चलते सर्विलांस टीम को उनकी मौजूदा लोकेशन का पता लगाने में परेशानी आ रही है।
गबन और जाली नोटों से जुड़े इस मामले में तीनों नामजद आरोपी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।
इन तीन लोगों के खिलाफ दर्ज हुई FIR
सहारनपुर के घंटाघर क्षेत्र में स्थित PNB की करेंसी चेस्ट में बैंक की विभिन्न शाखाओं का कैश जमा होता है। यहां से बैंक के मुख्यालय को भी नकदी भेजी जाती है।
PNB के नोडल अधिकारी अरुण कुमार चौबे की तहरीर पर कोतवाली सदर बाजार पुलिस ने मामले में तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।
FIR में वरिष्ठ प्रबंधक मंडल कार्यालय रवि कुमार, करेंसी चेस्ट प्रबंधक सुशील शर्मा और हरियाणा के खेरा बाजार, जगाधरी स्थित करेंसी चेस्ट प्रबंधक अमित कुमार के नाम शामिल बताए गए हैं।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि करेंसी चेस्ट में इतनी बड़ी मात्रा में जाली नोट कैसे पहुंचे और कथित गबन की पूरी प्रक्रिया में किस-किस की भूमिका रही।
पुलिस की कई टीमें जांच में जुटीं
SIT के अलावा कोतवाली सदर बाजार पुलिस, सर्विलांस और क्राइम ब्रांच की टीमें भी मामले की जांच कर रही हैं। पुलिस CCTV फुटेज, मोबाइल डेटा और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है।
एसपी सिटी व्योम बिंदल के अनुसार, करेंसी चेस्ट से लेकर उसके बाहर तक लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें दबिश दे रही हैं और डिजिटल साक्ष्यों की मदद से मामले की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

