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मॉस्को · 31 मिनट पहले

यूनाइटेड रशिया ने जीतीं 355 सीटें, युद्ध के बीच फिर मजबूत हुआ क्रेमलिन का संसदीय बहुमत

रूस के संसदीय चुनाव 2026 में यूनाइटेड रशिया ने 450 में 355 सीटें जीतीं। यूक्रेन युद्ध के बीच हुए चुनाव में पार्टी को 57.83% पार्टी-लिस्ट वोट मिले।

दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 31 मिनट पहले
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यूनाइटेड रशिया ने जीतीं 355 सीटें, युद्ध के बीच फिर मजबूत हुआ क्रेमलिन का संसदीय बहुमत

मॉस्को। रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के शासनकाल में यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद हुए पहले संसदीय चुनाव के नतीजों ने सत्तारूढ़ यूनाइटेड रशिया की संसद में मजबूत स्थिति को फिर सामने ला दिया है। केंद्रीय चुनाव आयोग के लगभग पूर्ण नतीजों के अनुसार, पुतिन समर्थक पार्टी ने 450 सदस्यीय स्टेट ड्यूमा में 355 सीटें जीती हैं। पार्टी को पार्टी-लिस्ट वाले चुनाव में 57.83 प्रतिशत वोट मिले।

इन नतीजों के बाद यूनाइटेड रशिया के पास ड्यूमा की करीब 80 प्रतिशत सीटें हैं और वह संविधान में बदलाव के लिए जरूरी बहुमत भी बनाए रखने में सफल रही है। 2021 के पिछले संसदीय चुनाव में पार्टी को 49.8 प्रतिशत वोट मिले थे और उसने 450 में 324 सीटें जीती थीं।

तीन दिन चली वोटिंग, 59.3% मतदान

रूस में संसदीय चुनाव के लिए 18 से 20 सितंबर तक तीन दिन मतदान हुआ। केंद्रीय चुनाव आयोग के अनुसार करीब 11.1 करोड़ मतदाता मतदान के लिए पात्र थे और मतदान प्रतिशत 59.3% रहा। चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग की सुविधा भी दी गई थी।

रूस में ड्यूमा की 450 सीटों में से आधी यानी 225 सीटें पार्टी-लिस्ट प्रणाली और बाकी 225 सीटें सिंगल-सीट निर्वाचन क्षेत्रों से चुनी जाती हैं। यूनाइटेड रशिया ने दोनों ही व्यवस्थाओं में मजबूत प्रदर्शन किया।

विपक्षी दलों की मौजूदगी सीमित

चुनाव में कम्युनिस्ट पार्टी, LDPR, न्यू पीपल और ए जस्ट रशिया जैसे दलों ने सीटें हासिल कीं। हालांकि इनमें से कई पार्टियों ने पिछले वर्षों में क्रेमलिन की प्रमुख नीतियों पर यूनाइटेड रशिया के साथ मतदान किया है।

वहीं उदारवादी याब्लोको पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर संसद में जगह नहीं बना सकी। पार्टी ने यूक्रेन युद्ध को लेकर विरोध का रुख अपनाया था। Reuters और AP के अनुसार, चुनाव से पहले युद्ध-विरोधी कई उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से रोका गया या वे जेल अथवा निर्वासन में थे।

रूस के सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में याब्लोको को पार्टी-लिस्ट चुनाव से बाहर कर दिया था। हालांकि उसके कुछ उम्मीदवार सिंगल-सीट निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव मैदान में थे।

यूक्रेन युद्ध के बाद पहला संसदीय चुनाव

2026 का चुनाव रूस के फरवरी 2022 में यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने के हमले के बाद पहला संसदीय चुनाव था। मतदान के दौरान रूस ने यूक्रेन के उन क्षेत्रों में भी चुनाव कराया जिन्हें मॉस्को ने 2022 में रूस में शामिल करने का दावा किया था।

क्रीमिया में भी मतदान कराया गया, जिसे रूस ने 2014 में अपने कब्जे में लिया था। यूक्रेन ने इन क्षेत्रों में कराए गए मतदान को अवैध बताया है। AP के अनुसार, इन क्षेत्रों में मतदान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी आपत्तियां सामने आईं।

OSCE पर्यवेक्षकों की मौजूदगी नहीं

इस चुनाव में यूरोप में सुरक्षा और सहयोग संगठन यानी OSCE के अंतरराष्ट्रीय चुनाव पर्यवेक्षक आमंत्रित नहीं किए गए। इससे चुनाव प्रक्रिया की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय निगरानी सीमित रही।

रूसी अधिकारियों ने चुनाव को निष्पक्ष और सुचारु बताया, जबकि विदेशों में मौजूद विपक्षी कार्यकर्ताओं और कुछ आलोचकों ने चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप लगाए। इन आरोपों और आधिकारिक दावों के बीच अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है।

संसद में युद्ध के पूर्व सैनिक भी पहुंचे

चुनाव के बाद रूसी संसद में यूक्रेन युद्ध में हिस्सा ले चुके पूर्व सैनिकों की भी एंट्री हुई है। Reuters के अनुसार, युद्ध में सेवा दे चुके 46 पूर्व सैनिक चुनाव जीतकर संसद पहुंचे, जिनमें बड़ी संख्या यूनाइटेड रशिया के उम्मीदवारों की थी।

क्रेमलिन ने युद्ध में हिस्सा ले चुके लोगों को राजनीतिक व्यवस्था में शामिल करने की नीति को आगे बढ़ाया है। इन पूर्व सैनिकों को भविष्य की सरकारी और राजनीतिक पहलों में भूमिका देने की बात भी सामने आई है।

चुनाव के दौरान मॉस्को पर बड़ा ड्रोन हमला

रूस में मतदान के अंतिम दिन यूक्रेन की ओर से बड़े पैमाने पर ड्रोन हमले भी हुए। रूसी रक्षा मंत्रालय ने पूरे रूस और कब्जे वाले क्षेत्रों के आसपास 1,110 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराने का दावा किया। मॉस्को के मेयर सर्गेई सोब्यानिन ने राजधानी की ओर आने वाले करीब 450 ड्रोन को नष्ट करने की बात कही।

मॉस्को क्षेत्र में हमलों के कारण एक तेल रिफाइनरी और रिहायशी इमारत को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, मॉस्को क्षेत्र में दो लोगों की मौत हुई और 20 लोग घायल हुए।

पुतिन के लिए चुनाव का क्या संदेश?

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने चुनाव से पहले इसे रूस की एकता और उनकी नीतियों के समर्थन के संकेत के तौर पर पेश किया था। चुनाव के बाद यूनाइटेड रशिया की बड़ी जीत क्रेमलिन को संसद में पहले से मौजूद मजबूत नियंत्रण को बनाए रखने में मदद करती है।

हालांकि, चुनाव में विपक्षी उम्मीदवारों की सीमित मौजूदगी, युद्ध-विरोधी नेताओं पर कार्रवाई और स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय निगरानी की अनुपस्थिति को लेकर आलोचनाएं भी सामने आई हैं। इसलिए चुनाव परिणाम को रूस की राजनीतिक स्थिति का एक महत्वपूर्ण संकेत तो माना जा सकता है, लेकिन उसके अर्थ को समझते समय चुनावी माहौल और विपक्ष की भागीदारी की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

अब नई संसद का पहला सत्र

चुनाव परिणामों के बाद नई स्टेट ड्यूमा का सत्र शुरू होगा। यूनाइटेड रशिया के पास 355 सीटों के साथ स्पष्ट संवैधानिक बहुमत है।

इन नतीजों के बाद रूस की संसद में क्रेमलिन समर्थक राजनीतिक ताकत की स्थिति मजबूत बनी हुई है। वहीं यूक्रेन युद्ध, अर्थव्यवस्था, प्रतिबंधों, ड्रोन हमलों और घरेलू राजनीतिक नियंत्रण से जुड़े मुद्दे नई संसद के सामने प्रमुख चुनौतियों में बने रहेंगे।

2026 का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह युद्ध शुरू होने के बाद रूस में हुआ पहला संसदीय चुनाव है और इसके नतीजों ने अगले राजनीतिक दौर के लिए स्टेट ड्यूमा में यूनाइटेड रशिया की मजबूत स्थिति को स्पष्ट कर दिया है।

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