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नई दिल्ली · 47 मिनट पहले

रत्ना सिंह के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई को मंजूरी, दिल्ली हाई कोर्ट करेगा अंतिम फैसला

न्यायिक अधिकारी पर सोशल मीडिया में की गई टिप्पणियों का मामला; दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता अमोल सिन्हा ने दी कार्रवाई शुरू करने की सहमति

दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 47 मिनट पहले
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रत्ना सिंह के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई को मंजूरी, दिल्ली हाई कोर्ट करेगा अंतिम फैसला

नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर न्यायिक अधिकारी के खिलाफ की गई टिप्पणियों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की लीगल हेड रत्ना सिंह की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दिल्ली सरकार के अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता (आपराधिक) अमोल सिन्हा ने उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के लिए सहमति दे दी है। यह मामला साकेत जिला अदालत के एक न्यायिक अधिकारी के आदेश के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर की गई टिप्पणियों से जुड़ा है।

जानकारी के अनुसार, अधिवक्ता कौशिक चटर्जी ने इस मामले में 14 अक्टूबर को शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद 28 अक्टूबर को पूरक प्रतिवेदन भी सौंपा गया। मामले की समीक्षा के बाद दो नवंबर को अमोल सिन्हा ने अवमानना कानून की धारा 15(2) के तहत आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने के लिए सहमति प्रदान की।

न्यायिक अधिकारी के आदेश के बाद शुरू हुआ विवाद

पूरा विवाद साकेत अदालत के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अभिनव पांडेय के एक आदेश से जुड़ा है। यह आदेश दिल्ली पुलिस की ओर से रत्ना सिंह को हिरासत में लिए जाने से संबंधित कार्यवाही के दौरान पारित किया गया था।

इस आदेश के बाद रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर न्यायिक अधिकारी को लेकर टिप्पणियां की थीं। शिकायतकर्ता अधिवक्ता कौशिक चटर्जी ने इन टिप्पणियों को न्यायपालिका की गरिमा और न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता के लिए अनुचित बताते हुए कार्रवाई की मांग की थी।

न्यायिक स्वतंत्रता पर सवाल उठने का आरोप

अमोल सिन्हा के अनुसार, रत्ना सिंह की टिप्पणियां केवल न्यायिक आदेश की आलोचना तक सीमित नहीं थीं। उनमें कथित तौर पर यह संकेत दिया गया था कि संबंधित न्यायिक अधिकारी किसी बाहरी प्राधिकारी के निर्देश पर काम कर रहे थे।

उनका मानना है कि इस तरह की टिप्पणियां न्यायिक प्रक्रिया की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर सकती हैं। इससे न्यायालय की गरिमा और आम लोगों के बीच न्यायिक संस्थाओं की विश्वसनीयता भी प्रभावित होने की आशंका है।

आलोचना और आपराधिक अवमानना में अंतर

हालांकि, अमोल सिन्हा ने यह भी स्पष्ट किया कि अधिकारियों और विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की व्यवस्था की आलोचना को केवल तीखी टिप्पणी होने के आधार पर आपराधिक अवमानना नहीं माना जा सकता।

उन्होंने कहा कि कार्रवाई शुरू करने के लिए दी गई सहमति प्रारंभिक स्तर पर आरोपों की प्रकृति के आकलन पर आधारित है। इसका अर्थ यह नहीं है कि रत्ना सिंह को आपराधिक अवमानना का दोषी ठहरा दिया गया है।

दिल्ली हाई कोर्ट करेगा अंतिम फैसला

इस मामले में अब अंतिम निर्णय दिल्ली हाई कोर्ट को करना है। अमोल सिन्हा की सहमति कार्रवाई शुरू करने की प्रक्रिया का एक प्रारंभिक कदम है। अवमानना हुई है या नहीं और संबंधित टिप्पणियां कानून के दायरे में आती हैं या नहीं, इसका स्वतंत्र रूप से आकलन हाई कोर्ट करेगा।

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