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नर्मदापुरम · 1 घंटे पहले

खाद की किल्लत न हो, नरवाई जलाने पर भी लगे रोक; कलेक्टर ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

नर्मदापुरम कलेक्टर आशीष वशिष्ठ ने खाद वितरण की समीक्षा कर डीएपी के विकल्प के रूप में एनपीके को बढ़ावा देने और नरवाई जलाने वालों पर जुर्माने के निर्देश दिए।

दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 1 घंटे पहले
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खाद की किल्लत न हो, नरवाई जलाने पर भी लगे रोक; कलेक्टर ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश

नर्मदापुरम। जिले में किसानों को खाद की सुगम उपलब्धता सुनिश्चित करने और खेतों में नरवाई जलाने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए कलेक्टर आशीष वशिष्ठ ने अधिकारियों को विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए हैं। बुधवार को आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने खाद वितरण व्यवस्था और कृषि विभाग की गतिविधियों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को मैदानी स्तर पर सक्रिय रहकर किसानों की समस्याओं का समाधान करने को कहा।

कलेक्टर ने निर्देश दिए कि किसानों को डीएपी खाद के विकल्प के रूप में एनपीके के उपयोग और उठाव के लिए प्रोत्साहित किया जाए। इसके साथ ही किसानों की जरूरत के मुताबिक यूरिया की उपलब्धता और वितरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि सहकारी समितियों के माध्यम से खाद की नियमित आपूर्ति जारी रखी जाए, ताकि किसानों को खाद के लिए परेशान न होना पड़े।

मैदानी स्तर पर खाद वितरण की होगी निगरानी

खाद वितरण व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए कलेक्टर ने जिला विपणन अधिकारी और कृषि विभाग के अधिकारियों को अपनी-अपनी टीमों को फील्ड में सक्रिय करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अधिकारी खाद की उपलब्धता और वितरण पर लगातार नजर रखें तथा किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार खाद उपलब्ध कराना सुनिश्चित करें।

नरवाई जलाने पर जुर्माने की कार्रवाई

बैठक में नरवाई प्रबंधन का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। कलेक्टर ने कृषि विभाग को जिले में नरवाई जलाने से होने वाली आगजनी की घटनाओं की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों के बीच जागरूकता बढ़ाकर ऐसी घटनाओं को रोका जाए। इसके बावजूद नरवाई जलाने के मामले सामने आने पर संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार जुर्माना लगाने की कार्रवाई की जाए।

गांवों में कार्यशालाओं के जरिए किसानों को करेंगे जागरूक

कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि किसानों के साथ निरंतर संवाद और समन्वय बनाए रखें। उन्हें नरवाई प्रबंधन के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग, फसल चक्र परिवर्तन, जैविक खेती और कृषि विकास से जुड़ी तकनीकों की जानकारी दी जाए।

इसके लिए ग्राम स्तर पर संगोष्ठियों और कार्यशालाओं का आयोजन करने के निर्देश भी दिए गए। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि खाद की सुगम आपूर्ति के साथ पर्यावरण संरक्षण और नरवाई प्रबंधन को भी प्राथमिकता दी जाए, ताकि किसानों को राहत मिलने के साथ खेतों में आगजनी की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।

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