नर्मदापुरम में JOSH टीमों का शुभारंभ, टीबी उन्मूलन के लिए युवाओं की भागीदारी पर जोर
स्वास्थ्य कर्मियों और NCC कैडेट्स ने देखा राष्ट्रीय शुभारंभ का सीधा प्रसारण, जागरूकता और समय पर जांच पर रहेगा फोकस


नर्मदापुरम। टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत तपेदिक (टीबी) उन्मूलन के प्रयासों को गति देने और आमजन में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से नर्मदापुरम में JOSH (Joint Squad for Health) टीमों के राष्ट्रीय शुभारंभ कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देखा गया। 8 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने इन टीमों का शुभारंभ किया।
जिला क्षय केंद्र नर्मदापुरम में आयोजित कार्यक्रम में सीएमएचओ डॉ. नरसिंह गेहलोत, डॉ. संजय पुरोहित, जिला क्षय अधिकारी डॉ. प्रियंका दुबे और जिला युवा अधिकारी जिंदल सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, एसटीएलएस, निश्चय मित्र, पैरामेडिकल स्टाफ तथा एनसीसी कैडेट्स मौजूद रहे। सभी ने राष्ट्रीय कार्यक्रम का सीधा प्रसारण देखा और टीबी उन्मूलन के प्रयासों में सक्रिय भागीदारी का संकल्प लिया।
टीबी के खिलाफ जागरूकता बढ़ाएंगी JOSH टीमें
JOSH पहल केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय तथा रक्षा मंत्रालय के सहयोग से शुरू की गई है। इन टीमों में प्रथम श्रेणी के अधिकारी, MY Bharat के स्वयंसेवक और एनसीसी कैडेट्स शामिल हैं। इनका उद्देश्य समुदाय के बीच टीबी से जुड़ी सही जानकारी पहुंचाना, संदिग्ध मरीजों को जांच के लिए प्रेरित करना और उपचार के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
इस पहल के माध्यम से टीबी के संभावित मरीजों की पहचान, जांच और उपचार की प्रक्रिया में सामुदायिक भागीदारी मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। टीमों की गतिविधियों की रियल-टाइम रिपोर्टिंग के लिए मोबाइल एप्लीकेशन भी शुरू किया गया है। इसके साथ ही जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एआई आधारित चैटबॉट ‘खुशी अवतार’ की शुरुआत भी की गई।
दो सप्ताह से अधिक खांसी हो तो कराएं जांच
कार्यक्रम में टीबी के लक्षणों और समय पर उपचार के महत्व के बारे में जानकारी दी गई। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक खांसी रहना, बुखार आना, वजन कम होना, रात में पसीना आना और भूख कम लगना टीबी के संभावित लक्षण हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर नजदीकी शासकीय स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराना जरूरी है।
अधिकारियों ने बताया कि टीबी एक उपचार योग्य बीमारी है। समय पर जांच, चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित और पूरा उपचार तथा पौष्टिक आहार से मरीज स्वस्थ हो सकते हैं। शासकीय स्वास्थ्य संस्थानों में टीबी की जांच और उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हैं।
जनभागीदारी से साकार होगा टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य
कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने संदिग्ध मरीजों की पहचान, समय पर जांच, उपचार तथा मरीजों के नियमित फॉलोअप को प्रभावी बनाने का संकल्प लिया। साथ ही आमजन से अपील की गई कि टीबी के लक्षणों को नजरअंदाज न करें और किसी भी तरह की जानकारी या सहायता के लिए नजदीकी शासकीय स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
टीबी उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों के साथ समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी को जरूरी बताते हुए उपस्थित लोगों ने “टीबी हारेगा, देश जीतेगा” का संदेश दिया। JOSH टीमों के माध्यम से युवाओं की भागीदारी बढ़ाकर टीबी के प्रति जागरूकता को जन-जन तक पहुंचाने और टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने पर जोर दिया गया।
