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भोपाल · 1 घंटे पहले

मध्यप्रदेश में पर्यटन ने पकड़ी रफ्तार, 2025 में पहुंचे 21 करोड़ से ज्यादा पर्यटक

मध्यप्रदेश में पर्यटन तेजी से बढ़ा। 2025 में 21 करोड़ से ज्यादा पर्यटक पहुंचे। उज्जैन सबसे आगे रहा, जबकि विदेशी सैलानियों में भी बढ़ोतरी दर्ज हुई।

दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 1 घंटे पहले
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मध्यप्रदेश में पर्यटन ने पकड़ी रफ्तार, 2025 में पहुंचे 21 करोड़ से ज्यादा पर्यटक

भोपाल। मध्यप्रदेश में पर्यटन क्षेत्र लगातार विस्तार कर रहा है। वर्ष 2025 में प्रदेश के पर्यटन स्थलों पर 21 करोड़ 5 लाख से ज्यादा पर्यटक पहुंचे। यह आंकड़ा वर्ष 2024 की तुलना में करीब 57 प्रतिशत अधिक बताया गया है। घरेलू पर्यटकों के साथ विदेशी सैलानियों की संख्या में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। उपलब्ध सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024 में मध्यप्रदेश में 13.31 करोड़ घरेलू पर्यटक और 1.67 लाख विदेशी पर्यटक आए थे।

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वर्ष 2025 में प्रदेश में 1.83 लाख से अधिक विदेशी पर्यटकों के पहुंचने का आंकड़ा सामने आया है। पर्यटन में बढ़ती दिलचस्पी के पीछे धार्मिक स्थलों के साथ वन्यजीव, विरासत, ग्रामीण और एडवेंचर टूरिज्म की भी अहम भूमिका रही है।

उज्जैन बना प्रदेश का सबसे बड़ा पर्यटन केंद्र

पर्यटकों की संख्या के लिहाज से उज्जैन प्रदेश में सबसे आगे रहा। वर्ष 2025 में यहां 8 करोड़ 40 लाख से अधिक पर्यटकों के पहुंचने का दावा किया गया है। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग और महाकाल महालोक उज्जैन के प्रमुख आकर्षण बने हुए हैं।

इसके बाद इंदौर में 2.80 करोड़ से ज्यादा, चित्रकूट में करीब 1.62 करोड़ और मैहर में लगभग 1.61 करोड़ पर्यटकों के पहुंचने की जानकारी दी गई है।

धार्मिक पर्यटन के अन्य प्रमुख केंद्रों में दतिया का रतनगढ़ माता मंदिर भी शामिल रहा, जहां करीब एक करोड़ पर्यटक पहुंचे। नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर में 51.69 लाख और अमरकंटक में करीब 43.17 लाख पर्यटकों के पहुंचने की बात सामने आई है।

ये आंकड़े बताते हैं कि मध्यप्रदेश में धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन लगातार महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

विदेशी सैलानियों को भा रहा वन्यजीव पर्यटन

मध्यप्रदेश के जंगल और टाइगर रिजर्व विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का बड़ा केंद्र बन रहे हैं। वर्ष 2025 में प्रदेश पहुंचे करीब 1.83 लाख विदेशी पर्यटकों में से 93,412 ने वन्यजीव पर्यटन स्थलों का रुख किया। इस श्रेणी में विदेशी पर्यटकों की संख्या में 17.44 प्रतिशत की वृद्धि बताई गई है।

बांधवगढ़ और कान्हा विदेशी सैलानियों की पसंदीदा जगहों में शामिल रहे। बांधवगढ़ में करीब 31,390 और कान्हा में 23,992 विदेशी पर्यटक पहुंचे।

प्रोजेक्ट चीता के बाद कूनो राष्ट्रीय उद्यान भी अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के आकर्षण का नया केंद्र बनकर उभरा है। वर्ष 2025 में पहली बार कूनो पहुंचने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या 6,316 रही।

खजुराहो से मांडू तक विरासत पर्यटन का विस्तार

धार्मिक पर्यटन के अलावा मध्यप्रदेश के ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थलों की लोकप्रियता भी बढ़ रही है। वर्ष 2025 में करीब 59 लाख विरासत प्रेमियों के प्रदेश के विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों पर पहुंचने की जानकारी दी गई है।

भोजपुर, ग्वालियर, मांडू, खजुराहो, सांची, भीमबेटका और ओरछा जैसे स्थल देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं।

वहीं चंदेरी के पास स्थित प्राणपुर को क्राफ्ट हैंडलूम टूरिज्म विलेज के रूप में विकसित किया गया है। यहां पर्यटक चंदेरी साड़ी और अन्य हस्तशिल्प तैयार करने की प्रक्रिया को करीब से देख सकते हैं। इससे पर्यटन को स्थानीय कला और रोजगार से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।

गांवों में भी बढ़ रहा पर्यटन

मध्यप्रदेश में पर्यटन को बड़े शहरों और प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों तक सीमित रखने के बजाय ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तार देने पर भी जोर दिया जा रहा है। प्रदेश के छह गांवों को एस्ट्रो विलेज के रूप में विकसित किया जा रहा है।

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ग्रामीण होमस्टे, स्थानीय खान-पान, हस्तशिल्प और प्राकृतिक पर्यटन के जरिए छोटे गांवों को पर्यटन के नक्शे पर लाने की कोशिश की जा रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटकों के ठहरने और स्थानीय उत्पादों की बिक्री के नए अवसर बन सकते हैं।

एडवेंचर टूरिज्म से रोजगार को बढ़ावा

प्रदेश में पर्यटन के नए स्वरूपों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। स्काई डाइविंग, स्कूबा डाइविंग, कयाकिंग और बर्ड वॉचिंग जैसी गतिविधियां पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं।

इसके अलावा गांधीसागर, हनुवंतिया, कूनो और चंदेरी में आयोजित होने वाले विभिन्न फेस्टिवल भी पर्यटन गतिविधियों को बढ़ाने में भूमिका निभा रहे हैं।

मध्यप्रदेश सरकार पर्यटन को रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने के लिए होमस्टे, हेली टूरिज्म और साहसिक पर्यटन जैसी गतिविधियों का विस्तार कर रही है। राज्य सरकार के एक हालिया दस्तावेज में ग्रामीण होमस्टे में करीब 1,000 कमरों तथा अन्य 500 नए कमरों के विस्तार और नर्मदा, बेतवा व चंबल में रिवर क्रूज जैसी योजनाओं का भी उल्लेख है।

धार्मिक पर्यटन के साथ बदल रहा पर्यटन का चेहरा

मध्यप्रदेश में पर्यटन का बढ़ता आंकड़ा अब केवल धार्मिक स्थलों की लोकप्रियता तक सीमित नहीं है। धार्मिक पर्यटन, वन्यजीव, विरासत, ग्रामीण पर्यटन और एडवेंचर टूरिज्म मिलकर प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र को नया स्वरूप दे रहे हैं।

बढ़ते पर्यटक आगमन से होटल, होमस्टे, परिवहन, स्थानीय बाजार, गाइड, हस्तशिल्प और खान-पान जैसे क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। ऐसे में पर्यटन अब प्रदेश की स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिए भी एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बनता जा रहा है।

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