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भोपाल · 32 मिनट पहले

स्वामित्व योजना पर सरकार सख्त: रजिस्ट्री से इनकार करने वाले पटवारियों पर होगी कार्रवाई

मध्यप्रदेश में स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री को लेकर  सरकार सख्त। मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने कलेक्टरों को गुरुवार से शनिवार तक रजिस्ट्री कराने और आदेश न मानने पर कार्रवाई के निर्देश दिए।

दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 32 मिनट पहले
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स्वामित्व योजना पर सरकार सख्त: रजिस्ट्री से इनकार करने वाले पटवारियों पर होगी कार्रवाई

भोपाल। मध्यप्रदेश में स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना-2026 के तहत ग्रामीण संपत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री को लेकर अब सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। रजिस्ट्री प्रक्रिया में पटवारियों की भूमिका को लेकर सामने आए विरोध और काम शुरू करने में हो रही देरी के बीच मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि शासन के आदेश के अनुसार रजिस्ट्री का काम हर हाल में कराया जाए। आदेशों का पालन नहीं करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।

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सरकार का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार अधिकार अभिलेखों का पंजीयन तेजी से पूरा करना है। योजना के तहत प्रदेश में करीब 50 लाख निजी संपत्तियों के अधिकार अभिलेखों का नि:शुल्क पंजीयन किया जाना है। इसके लिए हितग्राहियों से स्टांप ड्यूटी और पंजीयन शुल्क नहीं लिया जाएगा।

गुरुवार से शनिवार तक लगेंगे रजिस्ट्री शिविर

मुख्य सचिव के निर्देश के मुताबिक ग्राम पंचायत स्तर पर गुरुवार, शुक्रवार और शनिवार को विशेष शिविर लगाकर रजिस्ट्री का काम कराया जाना है। शासन ने प्रत्येक निष्पादन अधिकारी के लिए प्रतिदिन लगभग 30 से 40 रजिस्ट्रियों का लक्ष्य तय किया है।

कलेक्टरों को जिले में योजना की माइक्रो प्लानिंग, शिविरों की निगरानी और प्रतिदिन की प्रगति रिपोर्ट सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार चाहती है कि अभियान को तय समयसीमा में पूरा किया जाए और पात्र ग्रामीणों को उनके संपत्ति अधिकार का दस्तावेज जल्द उपलब्ध हो।

योजना के तहत शिविर तीन चरणों में आयोजित किए जा रहे हैं। पहला चरण 17 से 19 सितंबर, दूसरा 24 से 26 सितंबर और तीसरा चरण 1 से 3 अक्टूबर तक निर्धारित है।

पटवारियों के विरोध के बाद बढ़ा दबाव

स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री प्रक्रिया में पटवारियों को निष्पादन अधिकारी बनाए जाने को लेकर विरोध सामने आया था। कुछ स्थानों पर पटवारियों ने रजिस्ट्रीकर्ता के रूप में अपनी भूमिका और संभावित जवाबदेही को लेकर आपत्ति जताई थी। रिपोर्टों के मुताबिक इस मुद्दे पर शासन स्तर पर बैठकों के बावजूद गतिरोध पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ।

इसी के बाद सरकार ने अब जिलों के प्रशासनिक तंत्र को स्पष्ट संदेश दिया है कि योजना के तहत निर्धारित कार्य में देरी नहीं होनी चाहिए। इससे स्वामित्व योजना के क्रियान्वयन को लेकर प्रशासनिक सख्ती बढ़ने के संकेत हैं।

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50 लाख से अधिक संपत्तियों की मुफ्त रजिस्ट्री का लक्ष्य

मध्यप्रदेश में स्वामित्व अभियान के तहत ग्रामीण आबादी की संपत्तियों के अधिकार अभिलेख तैयार किए गए हैं।  सरकारी जानकारी के मुताबिक 41,568 गांवों में 68.47 लाख अधिकार अभिलेख तैयार किए जा चुके हैं। इनमें से करीब 50 लाख निजी संपत्तियों के अधिकार अभिलेखों का नि:शुल्क पंजीयन किया जाना है।

सरकार का कहना है कि पंजीयन के बाद ग्रामीणों को अपनी संपत्ति का मजबूत दस्तावेजी अधिकार मिलेगा। इसके आधार पर वे मकान निर्माण, व्यवसाय, कृषि और अन्य आर्थिक गतिविधियों के लिए बैंक ऋण जैसी सुविधाओं का लाभ लेने में सक्षम हो सकेंगे।

राजस्व विभाग होगा नोडल एजेंसी

योजना के क्रियान्वयन में राजस्व विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है। विभाग योजना के समन्वय, क्रियान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी संभालेगा।

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वहीं रजिस्ट्री प्रक्रिया के समन्वय में संबंधित वाणिज्यिक कर/पंजीयन तंत्र की भूमिका रहेगी, जबकि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को स्थानीय स्तर पर अधिकारियों को सहयोग देने की जिम्मेदारी दी गई है।

जिला स्तर पर अभियान के संचालन की मुख्य जिम्मेदारी कलेक्टरों की होगी। अपर कलेक्टर, नोडल अधिकारी और तहसीलदार सहित संबंधित राजस्व अधिकारी भी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।

सारा से लेकर संपदा ऐप तक पूरी प्रक्रिया

सरकार ने स्वामित्व योजना की रजिस्ट्री प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित करने की व्यवस्था की है। भूमि की लैंड लिंकिंग और हितग्राही की ई-केवाईसी जैसी प्रक्रिया के बाद ‘सारा’ ऐप के माध्यम से निष्पादन और ‘संपदा’ ऐप पर पंजीयन की कार्रवाई की जाती है।

पंजीयन पूरा होने के बाद संबंधित दस्तावेज हितग्राही को उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य गांव के स्तर पर ही संपत्ति पंजीयन को आसान और तेज बनाना है।

अब कलेक्टरों पर निगरानी और कार्रवाई की जिम्मेदारी

 सरकार के सख्त निर्देशों के बाद अब जिलों में कलेक्टरों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है। उन्हें न केवल पटवारियों और संबंधित कर्मचारियों से काम कराना है, बल्कि तय दिनों में शिविर लगवाकर निर्धारित लक्ष्य के मुताबिक रजिस्ट्री भी सुनिश्चित करनी होगी।

योजना को लेकर जारी निर्देशों का पालन नहीं होने की स्थिति में संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई की चेतावनी ने प्रशासनिक तंत्र पर दबाव बढ़ा दिया है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार की सख्ती के बाद पटवारियों और प्रशासन के बीच चल रहा गतिरोध कितनी तेजी से खत्म होता है और 50 लाख से अधिक ग्रामीण संपत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री का लक्ष्य तय समय में कितना पूरा हो पाता है।

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