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भोपाल · 8 मिनट पहले

MP में स्वामित्व योजना पर सरकार और पटवारियों में टकराव तेज, 50 लाख परिवारों की रजिस्ट्री पर संकट

29 पटवारी बर्खास्त, 129 निलंबित और 3500 से अधिक को नोटिस; डिप्टी सीएम से मुलाकात के बाद भी काम पर लौटने को तैयार नहीं संघ

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दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 8 मिनट पहले
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MP में स्वामित्व योजना पर सरकार और पटवारियों में टकराव तेज, 50 लाख परिवारों की रजिस्ट्री पर संकट

भोपाल। मध्यप्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण परिवारों को संपत्ति के दस्तावेज उपलब्ध कराने की मुहिम अब सरकार और पटवारी संघ के बीच टकराव का मुद्दा बन गई है। प्रदेश के करीब 50 लाख ग्रामीण परिवारों की संपत्तियों की निशुल्क रजिस्ट्री के लक्ष्य को समय पर पूरा कराने के लिए सरकार ने सख्ती बढ़ा दी है। दूसरी ओर, पटवारी संघ बर्खास्तगी और निलंबन की कार्रवाई वापस लेने सहित अपनी मांगों पर अड़ा हुआ है। शुक्रवार सुबह पटवारी संघ के प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से मुलाकात कर अपनी समस्याएं रखीं, लेकिन बैठक के बाद भी काम पर लौटने को लेकर सहमति नहीं बन सकी।

संघ पदाधिकारियों के मुताबिक, उपमुख्यमंत्री ने उनकी मांगों पर विचार करते हुए सुधार के लिए नोटशीट मुख्य सचिव को भेजी है। हालांकि, पटवारी संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर निर्णय नहीं होता और कार्रवाई वापस नहीं ली जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। ऐसे में योजना की प्रगति के साथ-साथ आम लोगों के नियमित राजस्व कार्यों पर भी असर पड़ने की आशंका है।

29 पटवारी बर्खास्त, 129 निलंबित; 3500 से अधिक को नोटिस

स्वामित्व योजना का काम पूरा नहीं होने और असहयोग के आरोपों को लेकर प्रदेश के विभिन्न जिलों में पटवारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अब तक 29 पटवारियों को बर्खास्त किया गया है, जबकि 129 से अधिक पटवारियों को निलंबित किया गया है। इसके अलावा 3500 से अधिक पटवारियों को नोटिस जारी किए गए हैं।

प्रशासनिक अधिकारियों को योजना के काम की लगातार समीक्षा करने और निर्धारित लक्ष्य के अनुसार प्रगति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। कार्रवाई का दायरा परिवीक्षाधीन पटवारियों तक भी पहुंचा है। जानकारी के मुताबिक, देवास, रतलाम और आगर मालवा जिलों में कम से कम नौ परिवीक्षाधीन पटवारियों की सेवाएं समाप्त की गई हैं। देवास में तीन पटवारियों की सेवाएं समाप्त किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।

वहीं, पटवारी संघ का दावा है कि प्रदेशभर में छह हजार से अधिक परिवीक्षाधीन पटवारियों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। इन आंकड़ों के बीच सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है।

संपत्ति के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर को लेकर पटवारियों की आपत्ति

पटवारियों के विरोध की प्रमुख वजह स्वामित्व योजना के अंतर्गत तैयार होने वाले संपत्ति संबंधी दस्तावेजों में उनकी भूमिका और कानूनी जवाबदेही को लेकर है। पटवारियों का कहना है कि जिस संपत्ति के वे स्वयं मालिक नहीं हैं, उसके दस्तावेजों में निष्पादक के रूप में हस्ताक्षर करने की जिम्मेदारी और भविष्य में उत्पन्न होने वाले विवादों में उनकी जवाबदेही स्पष्ट होनी चाहिए।

उनकी मांग है कि दस्तावेजों पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया, संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी और संभावित कानूनी विवादों की स्थिति में पटवारियों की भूमिका को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

दूसरी ओर, सरकार का जोर योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को संपत्ति संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराने और निर्धारित समयसीमा में काम पूरा करने पर है। यही मतभेद अब आंदोलन और प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में सामने आ रहा है।

डिप्टी सीएम से मुलाकात, मुख्य सचिव तक पहुंचा मामला

शुक्रवार को उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में प्रांतीय पटवारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष अश्विन सैनी, मध्यप्रदेश पटवारी संघ के प्रांताध्यक्ष उपेंद्र सिंह बघेल सहित अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।

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बैठक के बाद संघ पदाधिकारियों ने बताया कि उपमुख्यमंत्री ने उनकी मांगों को उचित मानते हुए सुधार के लिए नोटशीट मुख्य सचिव को भेजी है। संघ नेताओं ने प्रदेशभर के पटवारियों से धैर्य बनाए रखने और एकजुट रहने की अपील की।

हालांकि, फिलहाल इस मुलाकात के बाद आंदोलन समाप्त होने के संकेत नहीं मिले हैं। संघ का स्पष्ट कहना है कि बर्खास्तगी और निलंबन की कार्रवाई वापस लेने सहित मांगों पर ठोस निर्णय होने के बाद ही पटवारी काम पर लौटेंगे। अब निगाहें मुख्य सचिव स्तर पर होने वाली कार्रवाई और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।

भ्रष्टाचार के मामलों में भी जांच और कार्रवाई

पटवारियों से जुड़े विवादों के बीच जमीन के नामांतरण में कथित रिश्वतखोरी के मामलों को लेकर भी कार्रवाई की जानकारी सामने आई है। भोपाल और सीहोर में पुराने लोकायुक्त मामलों में जमीन के नामांतरण के बदले कथित रिश्वत मांगने के आरोपों के संबंध में संबंधित पटवारियों के खिलाफ अभियोजन की अनुमति दिए जाने की जानकारी है।

इन मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, स्वामित्व योजना को लेकर चल रहे विरोध और भ्रष्टाचार संबंधी मामलों को अलग-अलग संदर्भों में देखना जरूरी है। किसी भी आरोप में संबंधित व्यक्ति की जिम्मेदारी का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

50 लाख परिवारों को दस्तावेज देने का लक्ष्य

राज्य सरकार ने 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी भूमि पर काबिज पात्र परिवारों को संपत्ति के दस्तावेज उपलब्ध कराने का अभियान शुरू किया था। इसके अंतर्गत करीब 50 लाख हितग्राहियों को निशुल्क रजिस्ट्री के माध्यम से संपत्ति संबंधी दस्तावेज देने का लक्ष्य रखा गया है।

इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के अधिकार को दस्तावेजी आधार देना और जमीन से जुड़े विवादों को कम करने में मदद करना है। संपत्ति के वैध दस्तावेज मिलने से हितग्राहियों को अपने स्वामित्व का प्रमाण रखने और जरूरत के अनुसार उसका उपयोग करने में सुविधा मिल सकती है।

लेकिन पटवारियों के विरोध के कारण यदि सर्वेक्षण, सत्यापन और दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया प्रभावित होती है, तो योजना की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। इसका सीधा असर उन ग्रामीण परिवारों पर पड़ने की आशंका है, जो लंबे समय से अपनी संपत्ति के दस्तावेज मिलने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

हड़ताल लंबी चली तो अटक सकते हैं जमीन से जुड़े काम

पटवारियों के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने से केवल स्वामित्व योजना ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों से जुड़े कई नियमित राजस्व कार्य भी प्रभावित हो सकते हैं। इनमें जमीन का नामांतरण, भूमि बंटवारा, सीमांकन, खसरा-खतौनी संबंधी काम और भूमि रिकॉर्ड में सुधार जैसे कार्य शामिल हैं।

इसके अलावा फसल नुकसान का सर्वेक्षण, सरकारी योजनाओं के हितग्राहियों का सत्यापन, जाति, आय और निवास प्रमाणपत्रों के लिए आवश्यक राजस्व सत्यापन तथा राजस्व वसूली जैसे कामों में भी देरी होने की आशंका है।

ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन से जुड़े कई मामलों में पटवारियों की रिपोर्ट और सत्यापन महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में आंदोलन लंबा खिंचने पर किसानों, जमीन मालिकों और अन्य जरूरतमंद नागरिकों को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं।

समाधान की राह देख रहे ग्रामीण परिवार

स्वामित्व योजना पर सरकार और पटवारी संघ के बीच जारी गतिरोध अब इस सवाल पर आकर टिक गया है कि प्रशासनिक सख्ती और कर्मचारियों की मांगों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। सरकार के सामने निर्धारित लक्ष्य पूरा करने की चुनौती है, जबकि पटवारी संघ अपनी कानूनी जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने और दंडात्मक कार्रवाई वापस लेने की मांग कर रहा है।

उपमुख्यमंत्री की पहल के बाद अब मुख्य सचिव स्तर पर होने वाली कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि सरकार और संघ के बीच सहमति बनती है, तो योजना के काम को गति मिल सकती है और आम लोगों के राजस्व कार्य भी सामान्य हो सकते हैं। लेकिन विवाद जारी रहने पर सबसे अधिक परेशानी उन ग्रामीण परिवारों को उठानी पड़ सकती है, जिन्हें अपनी संपत्ति के दस्तावेज मिलने का इंतजार है।

फिलहाल, 50 लाख परिवारों को दस्तावेज उपलब्ध कराने का लक्ष्य और पटवारियों की मांगों के बीच टकराव बरकरार है। अब देखना होगा कि सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालती है या प्रशासनिक कार्रवाई और आंदोलन का यह संघर्ष आगे और तेज होता है।

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