मध्यप्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को झटका, FPPA सरचार्ज बढ़कर 5.06 फीसदी
मध्यप्रदेश में बिजली का FPPA सरचार्ज 24 सितंबर से बढ़कर 5.06% हो गया है। जानिए नई दर से बिजली बिल पर कितना असर पड़ेगा और अप्रैल से अब तक दरों में कितना बदलाव हुआ।


भोपाल। मध्यप्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं के बिल पर एक बार फिर अतिरिक्त भार बढ़ गया है। मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी ने फ्यूल एवं पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPA/एफपीपीएएस) की दर बढ़ा दी है। 24 सितंबर 2026 से अगले एक महीने के लिए यह सरचार्ज 4.59 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.06 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे बिजली की प्रति यूनिट लागत पर करीब चार पैसे का अतिरिक्त भार पड़ेगा।
नई दर का असर घरेलू उपभोक्ताओं के साथ बिजली की अन्य श्रेणियों पर भी पड़ेगा। एफपीपीएएस ऊर्जा शुल्क के आधार पर लगाया जाता है और इसे बिजली बिल में अलग से जोड़ा जाता है। ऐसे में सितंबर के बाद जारी होने वाले बिजली बिलों में बढ़े हुए सरचार्ज का असर दिखाई देगा।
ईंधन और बिजली खरीद की लागत से तय होता है सरचार्ज
एफपीपीएएस बिजली उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले ईंधन और बिजली खरीद की वास्तविक लागत में होने वाले बदलाव की भरपाई के लिए लगाया जाता है। मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग के प्रावधानों के अनुसार इसकी गणना हर महीने की जाती है।
बिजली उत्पादन अथवा खरीदी की लागत में बदलाव होने पर एफपीपीएएस की दर भी घट या बढ़ सकती है। वितरण कंपनियों को इसकी गणना और वसूली से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने के साथ बिजली बिल में सरचार्ज की राशि अलग से दर्शानी होती है।
अप्रैल से लगातार बदलती रही दर
वर्ष 2026 में एफपीपीएएस की दर में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 24 अप्रैल को यह 5.36 प्रतिशत थी। इसके बाद 24 मई को घटकर 3.91 प्रतिशत, 24 जून को 1.11 प्रतिशत और 24 जुलाई को 3.77 प्रतिशत हो गई।
इसके बाद 24 अगस्त से एफपीपीएएस बढ़ाकर 4.59 प्रतिशत किया गया था। अब 24 सितंबर से इसमें फिर बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.06 प्रतिशत कर दिया गया है।
बिल में अलग से दिखेगा असर
एफपीपीएएस ऊर्जा शुल्क पर आधारित होने के कारण उपभोक्ता के वास्तविक बिजली उपयोग और ऊर्जा शुल्क के अनुसार बिल पर इसका प्रभाव अलग-अलग हो सकता है। नई दर एक महीने के लिए लागू की गई है और आगे ईंधन तथा बिजली खरीद की लागत के आधार पर इसमें फिर बदलाव संभव है।

