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मध्यप्रदेश · 21 दिन पहले

MP उपचुनाव नतीजे: BJP को झटका, 2 सीटों पर हार; जीत का अंतर भी घटा

मध्य प्रदेश उपचुनाव में BJP को दतिया और विजयपुर में हार मिली। बुधनी और अमरवाड़ा में जीत के बावजूद पार्टी का जीत का अंतर काफी घट गया।

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समाचार डेस्क · 21 दिन पहले
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MP उपचुनाव नतीजे: BJP को झटका, 2 सीटों पर हार; जीत का अंतर भी घटा

भोपाल। मध्य प्रदेश में हाल के विधानसभा उपचुनावों के नतीजों ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। चार सीटों के परिणामों में भाजपा को दतिया और विजयपुर में हार का सामना करना पड़ा, जबकि बुधनी और अमरवाड़ा में जीत मिली। हालांकि, इन दोनों सीटों पर भी भाजपा की जीत का अंतर पिछले चुनाव की तुलना में काफी कम हो गया।

इन नतीजों ने भाजपा के चुनावी प्रदर्शन और संगठनात्मक रणनीति को लेकर सवाल खड़े किए हैं। वहीं कांग्रेस इन परिणामों को अपने पक्ष में बदलते जनसमर्थन का संकेत बता रही है।

दतिया में भाजपा को लगातार दूसरी हार

दतिया विधानसभा सीट पर भाजपा को लगातार दूसरी बार हार मिली। 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के तत्कालीन प्रत्याशी डॉ. नरोत्तम मिश्रा को कांग्रेस प्रत्याशी से 7,742 वोटों से हार मिली थी।

उपचुनाव में भाजपा ने आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा, लेकिन कांग्रेस के घनश्याम सिंह ने उन्हें 6,016 वोटों से हरा दिया।

इस बार दतिया में मतदान प्रतिशत 71.42 फीसदी रहा, जो 2023 के विधानसभा चुनाव की तुलना में करीब 8 प्रतिशत कम था। वहीं आजाद समाज पार्टी के प्रत्याशी दामोदर यादव को करीब 15 प्रतिशत वोट मिलने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया।

विजयपुर में भी भाजपा को झटका

श्योपुर जिले की विजयपुर विधानसभा सीट पर भी भाजपा को उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा। नवंबर 2024 में हुए उपचुनाव में भी भाजपा को इस सीट पर झटका लगा था।

2023 के विधानसभा चुनाव में रामनिवास रावत कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर 4,437 वोटों से जीते थे। लोकसभा चुनाव के दौरान वे भाजपा में शामिल हो गए और बाद में उन्हें प्रदेश सरकार में वन मंत्री बनाया गया।

इसके बाद हुए उपचुनाव में भाजपा ने रावत को प्रत्याशी बनाया, लेकिन वे 7,364 वोटों से चुनाव हार गए। उन्हें भाजपा के पूर्व नेता मुकेश मल्होत्रा ने शिकस्त दी।

बुधनी में जीत, लेकिन 91 हजार से ज्यादा घट गई बढ़त

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की परंपरागत सीट मानी जाने वाली बुधनी में भाजपा जीतने में सफल रही, लेकिन जीत का अंतर पार्टी के लिए चिंता का विषय बन गया।

2023 के विधानसभा चुनाव में शिवराज सिंह चौहान ने बुधनी सीट पर 1,04,974 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में विदिशा से जीत के बाद उन्होंने बुधनी विधानसभा सीट छोड़ दी।

इसके बाद हुए उपचुनाव में भाजपा के रमाकांत भार्गव ने जीत दर्ज की, लेकिन उनकी जीत का अंतर केवल 13,901 वोट रहा। यानी 2023 की तुलना में भाजपा की जीत की बढ़त में करीब 91 हजार वोटों की कमी आई।

अमरवाड़ा में भी घटा जीत का अंतर

छिंदवाड़ा जिले की अमरवाड़ा विधानसभा सीट पर भाजपा ने कांग्रेस से सीट छीनने में सफलता हासिल की, लेकिन यहां भी जीत का अंतर काफी कम रहा।

2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी कमलेश शाह ने यह सीट 25,086 वोटों के अंतर से जीती थी। बाद में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया और उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे।

उपचुनाव में कमलेश शाह ने जीत तो दर्ज की, लेकिन इस बार जीत का अंतर घटकर महज 3,027 वोट रह गया।

चार सीटों के नतीजों से क्या संकेत?

चार उपचुनावों के परिणामों को एक साथ देखा जाए तो भाजपा के लिए तस्वीर पूरी तरह राहत देने वाली नहीं है। दो सीटों पर हार और दो सीटों पर जीत के अंतर में बड़ी गिरावट ने पार्टी के सामने कई सवाल खड़े किए हैं।

खास तौर पर बुधनी में जीत का अंतर करीब एक लाख से घटकर 14 हजार के आसपास रह जाना और अमरवाड़ा में 25 हजार से अधिक की पिछली जीत का अंतर करीब 3 हजार तक सिमट जाना भाजपा के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।

दूसरी ओर, कांग्रेस इन परिणामों को प्रदेश में अपने बढ़ते जनाधार के रूप में पेश कर रही है। भाजपा संगठन भी चुनावी नतीजों का आकलन कर कमजोरियों की पहचान और आगामी चुनावों की रणनीति पर मंथन में जुटा है।

हालांकि, उपचुनावों के सीमित आंकड़ों से पूरे प्रदेश के राजनीतिक रुझान का निश्चित निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी, लेकिन इन परिणामों ने भाजपा के लिए संगठन और चुनावी रणनीति की समीक्षा की जरूरत जरूर बढ़ा दी है।

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