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मध्यप्रदेश · 23-08-2026

MP में युवा वोटरों पर भाजपा की नजर, Gen-Z और Gen-Alpha पर फोकस

मध्यप्रदेश में भाजपा, सरकार और RSS ने युवा वोटरों तक पहुंच बढ़ाने की तैयारी शुरू की। स्कूल-कॉलेज, सोशल मीडिया, इन्फ्लुएंसर्स, AI और स्किल ट्रेनिंग पर फोकस।

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समाचार डेस्क · 23-08-2026
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MP में युवा वोटरों पर भाजपा की नजर, Gen-Z और Gen-Alpha पर फोकस

भोपाल। मध्यप्रदेश में युवा वोटरों, खासकर Gen-Z और Gen-Alpha तक पहुंच बनाने के लिए भाजपा, सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपनी गतिविधियां बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। युवाओं से सीधे संवाद के साथ सोशल मीडिया पर प्रभाव रखने वाले युवा इन्फ्लुएंसर्स से संपर्क बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

युवा पीढ़ी के बदलते रुझान और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए राजनीतिक संगठन अब पारंपरिक बैठकों के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म को भी अपनी रणनीति का अहम हिस्सा बना रहे हैं। इसके जरिए युवाओं की समस्याओं, उनकी पसंद और भविष्य से जुड़ी अपेक्षाओं को समझने की कोशिश की जाएगी।

मध्यप्रदेश में 18 से 29 वर्ष की उम्र के 1.40 करोड़ से ज्यादा मतदाता बताए जा रहे हैं। आगामी नगरीय निकाय, पंचायत और विधानसभा चुनावों में यह बड़ा मतदाता वर्ग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसी को देखते हुए राजनीतिक दलों ने युवाओं तक अपनी पहुंच बढ़ाने पर फोकस करना शुरू कर दिया है।

स्कूल-कॉलेज और छात्रावासों तक पहुंचेगा युवा मोर्चा

भाजपा संगठन ने युवाओं से संपर्क बढ़ाने की जिम्मेदारी अपने युवा मोर्चे को दी है। इसके तहत स्कूल, कॉलेज और छात्रावासों में संपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाने की तैयारी है।

इन कार्यक्रमों में मंत्री, सांसद और विधायक भी शैक्षणिक संस्थानों में जाकर युवाओं से संवाद कर सकते हैं। पार्टी की कोशिश केवल सरकार की योजनाओं की जानकारी देने तक सीमित रहने की नहीं है, बल्कि युवाओं से उनके मुद्दों पर सीधे बातचीत करने की भी है।

रोजगार, शिक्षा, कौशल विकास, प्रतियोगी परीक्षाओं और भविष्य के अवसर जैसे विषयों पर युवाओं से चर्चा को इन कार्यक्रमों का प्रमुख हिस्सा बनाया जाएगा।

सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर भी नजर

युवा वोटरों तक पहुंच बनाने के लिए भाजपा सोशल मीडिया पर सक्रिय युवाओं और इन्फ्लुएंसर्स के साथ संवाद बढ़ाने की तैयारी में है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल जिलों में सोशल मीडिया पर सक्रिय युवा इन्फ्लुएंसर्स से संवाद करेंगे। इसके लिए अलग-अलग जिलों में कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जा रही है।

पार्टी की रणनीति में सोशल मीडिया को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि युवा वर्ग का बड़ा हिस्सा अपनी जानकारी, विचार और मनोरंजन के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निर्भर है। ऐसे में राजनीतिक दल अब युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं।

RSS भी नई पीढ़ी से करेगा संवाद

युवाओं तक पहुंच बनाने की इस कवायद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी में है। संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले की ओर से नई पीढ़ी के साथ सीधे संवाद पर जोर दिया गया है।

शुरुआती चरण में सितंबर में भोपाल में संघ के पदाधिकारियों द्वारा युवाओं से संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाने की तैयारी है। इन संवाद कार्यक्रमों के जरिए युवा पीढ़ी के विचारों और उनके सवालों को समझने की कोशिश की जाएगी।

AI और स्किल ट्रेनिंग को बनाया आधार

युवाओं को जोड़ने की रणनीति में कौशल विकास और नई तकनीक को भी अहम आधार बनाया जा रहा है। मध्यप्रदेश सरकार अगले वर्ष को ‘युवा वर्ष’ के रूप में मनाने की घोषणा कर चुकी है।

युवाओं के लिए AI स्किल ट्रेनिंग, ऑनलाइन कोचिंग, रोजगारपरक प्रशिक्षण और नई तकनीक से जुड़े कार्यक्रमों पर जोर दिया जा रहा है। सरकार और संगठन का प्रयास है कि युवाओं को रोजगार और भविष्य के कौशल से जोड़ने वाले कार्यक्रमों के जरिए भी उनसे संपर्क बढ़ाया जाए।

चुनावी नजरिए से भी अहम है युवा वोट बैंक

मध्यप्रदेश में 18 से 29 वर्ष की उम्र के 1.40 करोड़ से अधिक मतदाता होने के कारण युवा वर्ग आने वाले चुनावों में राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण हो गया है।

नगरीय निकाय, पंचायत और विधानसभा चुनावों को देखते हुए भाजपा सहित राजनीतिक दल युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। पारंपरिक राजनीतिक कार्यक्रमों के साथ अब कॉलेज कैंपस, सोशल मीडिया, डिजिटल कंटेंट और इन्फ्लुएंसर नेटवर्क भी राजनीतिक संपर्क का हिस्सा बनते जा रहे हैं।

भाजपा प्रवक्ता मिलन भार्गव ने कहा कि पार्टी युवाओं के साथ लगातार संवाद करती है और अब इसमें और तेजी लाई जा रही है। उनके मुताबिक भाजपा हर वर्ग को साथ लेकर चलने के लिए काम कर रही है।

कुल मिलाकर मध्यप्रदेश की राजनीति में युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कवायद तेज होती दिखाई दे रही है। आने वाले समय में राजनीतिक दल युवाओं के बीच किस तरह के मुद्दे उठाते हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किस तरह की रणनीति अपनाते हैं, यह चुनावी राजनीति में अहम भूमिका निभा सकता है।

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