मूंग खरीदी मामले में MPWLC शाखा प्रबंधक हेमंत चंदेल की भूमिका पर सोशल मीडिया में सवाल
माखननगर में अमानत मूंग खरीदी मामले में छह लोगों पर केस दर्ज होने के बाद MPWLC शाखा प्रबंधक हेमंत चंदेल की भूमिका पर सोशल मीडिया में सवाल उठे हैं। किसान संगठन ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।


नर्मदापुरम/माखननगर। माखननगर तहसील क्षेत्र में अमानत मूंग की खरीदी और वसूली से जुड़े मामले में वेयरहाउस से संबंधित छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद अब इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर नए सवाल उठाए जा रहे हैं। क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन के जिला प्रवक्ता किसान केशव साहू ने एक पत्र के माध्यम से MPWLC के माखननगर क्षेत्र के शाखा प्रबंधक हेमंत चंदेल की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
किसान नेता ने कलेक्टर नर्मदापुरम, पत्रकारों और किसान संगठनों को संबोधित कर कहा कि अमानत मूंग मामले में हुई कार्रवाई का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कार्रवाई से क्षेत्र और किसानों की छवि खराब होने से बचाने की दिशा में प्रशासन की पहल सराहनीय है।
एकलव्य और कनकधारा वेयरहाउस का किया उल्लेख
केशव साहू ने अपने पत्र में माखननगर क्षेत्र के एकलव्य वेयरहाउस, कनकधारा वेयरहाउस तथा हाल में सामने आए दो अन्य वेयरहाउस का उल्लेख करते हुए इन मामलों में MPWLC शाखा प्रबंधक हेमंत चंदेल की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने सवाल किया कि इन वेयरहाउस से जुड़े मामलों में संबंधित अधिकारी की क्या भूमिका रही और क्षेत्र में वेयरहाउसिंग व्यवस्था की निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी।
कलेक्टर से गहराई से जांच की मांग
किसान नेता ने कलेक्टर नर्मदापुरम से मांग की है कि हेमंत चंदेल की भूमिका की भी निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। उनका कहना है कि जांच होने से यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित मामलों में किस स्तर पर जिम्मेदारी तय होती है और वास्तविक स्थिति क्या है।
‘किसी बेकसूर की बलि न चढ़े’
केशव साहू ने यह भी कहा कि मामले की जांच सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर की जानी चाहिए, ताकि किसी निर्दोष को बिना पर्याप्त जांच के जिम्मेदार न ठहराया जाए।
उन्होंने वेयरहाउस कॉरपोरेशन मध्यप्रदेश के अध्यक्ष की ओर से अधिकारियों को हटाने को लेकर कही गई बातों का भी उल्लेख करते हुए पूरे घटनाक्रम की गहराई से समीक्षा करने की मांग की है।
किसानों की छवि बचाने की बात
किसान नेता ने कहा कि अमानत मूंग खरीदी से जुड़े मामले का असर पूरे क्षेत्र के किसानों की छवि पर नहीं पड़ना चाहिए। इसलिए जरूरी है कि प्रशासन निष्पक्ष जांच कर वास्तविक दोषियों की पहचान करे और यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
