कान्हा में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस का कहर, इलाज के दौरान मादा बाघ शावक की मौत; अब तक 9 बाघों की गई जान
8 अक्टूबर को अरौली गांव के पास से किया गया था रेस्क्यू, गंभीर संक्रमण से नहीं बच सकी जान; एक दिन पहले महिला पर किया था हमला


कान्हा टाइगर रिजर्व में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) का संक्रमण वन्यजीवों के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। मुक्की परिक्षेत्र स्थित वन्यजीव उपचार केंद्र में भर्ती एक मादा बाघ शावक की रविवार को उपचार के दौरान मौत हो गई। प्राथमिक जांच में मौत की वजह कैनाइन डिस्टेंपर वायरस का घातक संक्रमण माना जा रहा है। इस घटना के बाद कान्हा राष्ट्रीय उद्यान में इस वायरस से जान गंवाने वाले बाघों की संख्या बढ़कर नौ हो गई है। वन्यजीव चिकित्सकों की टीम ने शावक को बचाने के लिए लगातार प्रयास किए, लेकिन उसकी गंभीर हालत के कारण सफलता नहीं मिल सकी।
8 अक्टूबर को अरौली गांव के पास से किया था रेस्क्यू
वन विभाग की टीम ने 8 अक्टूबर को वन विकास निगम के मोहगांव प्रोजेक्ट के अंतर्गत अरौली गांव के पास से इस मादा बाघ शावक को रेस्क्यू किया था। शावक की तलाश के लिए चलाए गए अभियान में हाथियों की मदद ली गई थी। घने जंगल में छिपे शावक की शारीरिक स्थिति बेहद कमजोर थी, जिसके बाद वन विभाग की टीम ने आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाते हुए उसे मुक्की स्थित वन्यजीव उपचार केंद्र पहुंचाया।
यहां पशु चिकित्सकों ने शावक का उपचार शुरू किया और उसकी स्थिति पर लगातार निगरानी रखी। हालांकि, गंभीर संक्रमण के चलते उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। मौत के बाद अधिकारियों ने निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत शव का दाह संस्कार कर दिया।
रेस्क्यू से एक दिन पहले महिला पर किया था हमला
इस बाघ शावक से जुड़ी एक घटना 7 अक्टूबर की रात सामने आई थी। खटिया रेंज की मोहगांव बीट के अंतर्गत अरौली गांव में अपने घर के आंगन में खाट पर सो रही 50 वर्षीय रमली बाई मरावी पर शावक ने हमला कर दिया था।
हमले में महिला के सिर और चेहरे पर पंजों से गहरे घाव आए और शावक उसे खाट से नीचे घसीट ले गया। महिला की चीख सुनकर उनका बेटा तुरंत बाहर आया और मदद के लिए शोर मचाने लगा। आसपास के लोगों की मौजूदगी और शोरगुल से घबराकर शावक महिला को छोड़कर जंगल की ओर भाग गया।
इस घटना के अगले दिन वन विभाग ने शावक को रेस्क्यू कर उपचार केंद्र पहुंचाया था। अब उपचार के दौरान उसकी मौत होने से इस पूरे घटनाक्रम का दुखद अंत हुआ है।
वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा है कैनाइन डिस्टेंपर वायरस
कैनाइन डिस्टेंपर वायरस एक संक्रामक रोगजनक है, जो बाघों सहित कई मांसाहारी वन्यजीवों को प्रभावित कर सकता है। यह संक्रमण जानवरों के श्वसन तंत्र, पाचन तंत्र और तंत्रिका तंत्र पर गंभीर असर डाल सकता है। गंभीर स्थिति में यह जानलेवा भी साबित होता है।
कान्हा टाइगर रिजर्व में इस संक्रमण से अब तक नौ बाघों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। मादा बाघ शावक की मौत ने वन्यजीवों की निगरानी, संक्रमण के प्रसार को रोकने और प्रभावित जानवरों के समय पर उपचार की चुनौती को और गंभीर बना दिया है।
संक्रमण पर नियंत्रण वन प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती
कान्हा जैसे महत्वपूर्ण बाघ संरक्षण क्षेत्र में लगातार बाघों की मौत वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से चिंता का विषय है। ऐसे में संक्रमण के संभावित स्रोतों की पहचान, प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और अन्य संवेदनशील वन्यजीवों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
हालांकि, संक्रमण के प्रसार के स्रोत और अन्य वन्यजीवों में इसकी वर्तमान स्थिति को लेकर विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है। वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों की निगरानी तथा वैज्ञानिक जांच से ही बीमारी के प्रभाव और उससे निपटने के उपायों की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।
