दिल्ली जल बोर्ड टेंडर मामले में सत्येंद्र जैन समेत पांच आरोपी न्यायिक हिरासत में, एक को पुलिस रिमांड
दिल्ली जल बोर्ड STP टेंडर अनियमितता मामले में सत्येंद्र जैन और उदित प्रकाश राय समेत 5 आरोपी न्यायिक हिरासत में भेजे गए। अंकित श्रीवास्तव 2 दिन की पुलिस रिमांड पर।


नई दिल्ली। दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के अपग्रेडेशन और विस्तार से जुड़े टेंडर में कथित अनियमितताओं के मामले में राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत ने बुधवार को पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन समेत पांच आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया। वहीं, दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व संविदा सलाहकार अंकित श्रीवास्तव को दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।
विशेष न्यायाधीश दिग्विनय सिंह ने सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी को अवैध घोषित करने की मांग वाली याचिका भी खारिज कर दी। मामले की जांच एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) कर रही है।
छह आरोपियों की हुई गिरफ्तारी
ACB ने मामले में मंगलवार को कुल छह लोगों को गिरफ्तार किया था। बुधवार को जांच एजेंसी ने सत्येंद्र जैन, डीजेबी के पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय समेत पांच आरोपियों को अदालत में पेश किया और 14 दिन की न्यायिक हिरासत की मांग की।
वहीं, जांच एजेंसी ने अंकित श्रीवास्तव के लिए पुलिस हिरासत मांगी। अदालत ने उन्हें दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया।
ACB का आरोप है कि दिल्ली जल बोर्ड के STP के अपग्रेडेशन और क्षमता विस्तार से जुड़े टेंडर में शर्तों के साथ कथित तौर पर हेरफेर किया गया। एजेंसी ने आपराधिक साजिश और संदिग्ध रिश्वत भुगतान की भी जांच की है।
गिरफ्तारी को लेकर सत्येंद्र जैन के वकील की दलील
सुनवाई के दौरान सत्येंद्र जैन की ओर से पेश अधिवक्ता ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि इस मामले में एफआईआर मई 2024 में दर्ज हुई थी, लेकिन सत्येंद्र जैन को पहली बार 5 अगस्त 2026 को पूछताछ के लिए बुलाया गया।
वकील के मुताबिक, इसके बाद मंगलवार को फोन कर उन्हें दोबारा बुलाया गया और फिर गिरफ्तार कर लिया गया। बचाव पक्ष ने दावा किया कि गिरफ्तारी को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त सामग्री उपलब्ध नहीं है। अदालत में यह भी बताया गया कि सत्येंद्र जैन की ओर से जमानत याचिका दाखिल की जाएगी।
उदित प्रकाश राय के अधिवक्ता ने भी गिरफ्तारी का विरोध किया। बचाव पक्ष ने बताया कि वह वर्तमान में मिजोरम सरकार में सचिव के पद पर कार्यरत हैं।
तकनीकी पहलुओं से खुद को अलग बताया
सुनवाई के दौरान सत्येंद्र जैन ने परियोजना के तकनीकी पहलुओं से खुद को अलग बताया। उन्होंने कहा कि परियोजना के तकनीकी निर्णयों के लिए वह अधिकारियों और विशेषज्ञों पर निर्भर थे।
जैन के अनुसार, परियोजना का उद्देश्य यमुना की सफाई से जुड़ा था। नए STP बनाने में चार से पांच वर्ष लग सकते थे, इसलिए मौजूदा संयंत्रों की क्षमता बढ़ाने का निर्णय लिया गया।
उन्होंने बताया कि शुरुआती योजना प्रतिदिन 300 एमजीडी पानी के शोधन की थी। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 5 करोड़ रुपये प्रति एमजीडी बताई गई थी। बाद में टेंडर को चार पैकेज में बांटा गया, जिनकी कुल अनुमानित बोली करीब 1,500 करोड़ रुपये थी।
सत्येंद्र जैन ने अदालत में कहा कि वह टेंडर की तकनीकी प्रक्रिया में सीधे तौर पर शामिल नहीं थे। उन्होंने यह भी कहा कि प्री-बिड बैठक के समय वह जेल में थे, इसलिए बैठक में हुई चर्चा की उन्हें जानकारी नहीं थी।
मई 2024 में दर्ज हुई थी FIR
मामले में दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय की शिकायत के आधार पर मई 2024 में एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोप है कि डीजेबी के STP के विस्तार और अपग्रेडेशन से जुड़े टेंडर में कथित अनियमितताएं हुईं और टेंडर की शर्तों में हेरफेर किया गया।
ACB ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के अलावा धोखाधड़ी, आपराधिक न्यासभंग और आपराधिक साजिश से जुड़ी धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।
जांच एजेंसी अब आरोपों से जुड़े दस्तावेजों, टेंडर प्रक्रिया और कथित वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है।
पहले भी तिहाड़ जा चुके हैं सत्येंद्र जैन
सत्येंद्र जैन को 30 मई 2022 को एक अन्य मामले में गिरफ्तार किया गया था, जिसके बाद उन्हें तिहाड़ जेल भेजा गया था। मई 2023 में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें अंतरिम जमानत दी थी।
मार्च 2024 में उनकी अंतरिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण किया। बाद में राउज एवेन्यू कोर्ट से नियमित जमानत मिलने के बाद 18 अक्टूबर 2024 को वह जेल से बाहर आए थे।
फिलहाल दिल्ली जल बोर्ड के STP टेंडर मामले में अदालत के आदेश के बाद पांच आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं, जबकि अंकित श्रीवास्तव से पुलिस दो दिन तक पूछताछ करेगी। मामले की जांच जारी है।