त्योहारी सीजन में दालों के दाम ने बढ़ाई चिंता
भोपाल के थोक बाजार में सितंबर से दालों के भाव बढ़े। तुवर दाल 111 से 130 रुपये किलो पहुंची, जबकि चना, मूंग, उड़द और मसूर के दाम भी बढ़े।


भोपाल। त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ ही दालों की बढ़ती कीमतों ने रसोई का बजट बिगाड़ना शुरू कर दिया है। भोपाल के थोक बाजार में सितंबर की शुरुआत से अब तक कई प्रमुख दालों के भाव में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इनमें तुवर दाल सबसे ज्यादा महंगी हुई है।
भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू के अनुसार, अच्छी गुणवत्ता वाली तुवर दाल करीब एक सप्ताह पहले 119 रुपये किलो के आसपास बिक रही थी, जो अब बढ़कर करीब 130 रुपये किलो तक पहुंच गई है। वहीं 1 सितंबर को इसका थोक भाव करीब 111 रुपये किलो था। इस तरह सितंबर की शुरुआत से तुवर दाल के भाव में करीब 19 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है।
चना से मसूर तक बढ़े दाम
दालों में तेजी का असर केवल तुवर तक सीमित नहीं है। सितंबर की शुरुआत की तुलना में चना, मूंग, उड़द और मसूर के भाव में भी बढ़ोतरी हुई है।
| दाल | 1 सितंबर का भाव | मौजूदा भाव |
| तुवर दाल | 111 रुपये/kg | 130 रुपये/kg |
| चना दाल | 76 रुपये/kg | 80 रुपये/kg |
| हरी मूंग | 85 रुपये/kg | 89 रुपये/kg |
| मूंग मोगर | 91 रुपये/kg | 93 रुपये/kg |
| उड़द मोगर | 102 रुपये/kg | 105 रुपये/kg |
| मसूर | 73 रुपये/kg | 76 रुपये/kg |
थोक बाजार के इन भावों का असर आगे चलकर खुदरा बाजार में भी दिखाई दे सकता है। हालांकि खुदरा कीमतें गुणवत्ता, ब्रांड, दुकान और स्थानीय बाजार की स्थिति के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।
त्योहार और शादी सीजन से बढ़ी मांग
व्यापारियों के मुताबिक दालों की कीमतों में तेजी के पीछे मांग और उपलब्धता के बीच बन रहा अंतर प्रमुख कारणों में से एक है। गणेश उत्सव के बाद नवरात्रि, दीपावली और इसके बाद शादी का सीजन आने वाला है। इन अवसरों पर खाद्यान्न और दालों की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है।
बढ़ती मांग को देखते हुए व्यापारी और मिलर्स पहले से स्टॉक जुटाने में लगे हैं। दूसरी ओर उत्पादक राज्यों से मंडियों में दलहन की आवक सामान्य से कम रहने और पुराने स्टॉक में कमी आने से बाजार में उपलब्धता पर दबाव बताया जा रहा है।
नई फसल की पर्याप्त आवक शुरू होने में अभी समय है। ऐसे में बाजार में उपलब्ध माल की स्थिति और बढ़ती मांग के बीच संतुलन बिगड़ने से कीमतों पर दबाव बढ़ रहा है।
बारिश और उत्पादन का अनुमान भी असर डाल रहा
विवेक साहू के अनुसार, दालों के भाव केवल स्थानीय मांग से निर्धारित नहीं होते। दलहन उत्पादक क्षेत्रों में बारिश, मौसम की स्थिति, बुवाई और संभावित उत्पादन का अनुमान भी बाजार की दिशा तय करता है।
इसके अलावा भारत की आयात जरूरत भी घरेलू बाजार पर असर डालती है। म्यांमार और कनाडा जैसे देशों से आने वाली दालों की कीमत और उपलब्धता में बदलाव का असर भारतीय बाजार पर पड़ सकता है। आयातित माल की कीमत के साथ परिवहन और अन्य लागत बढ़ने पर उसका असर थोक बाजार से होते हुए खुदरा कीमतों तक पहुंचता है।
शक्कर के बाद अब दालों पर बाजार की नजर
विवेक साहू ने हाल में शक्कर के बाजार में आई तेजी का उदाहरण देते हुए कहा कि सरकारी हस्तक्षेप और बाजार में उपलब्धता बढ़ने के बाद शक्कर के भाव में राहत आई। उनका कहना है कि दालों के मामले में भी पर्याप्त बफर स्टॉक खुले बाजार में उपलब्ध कराया जाए तो कीमतों पर दबाव कम किया जा सकता है।
फिलहाल तुवर दाल में एक सप्ताह में करीब 10 रुपये और सितंबर की शुरुआत से करीब 19 रुपये प्रति किलो की तेजी ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा है।
आने वाले दिनों में नई फसल की आवक, बाजार में उपलब्ध स्टॉक और मांग की स्थिति दालों के भाव की दिशा तय करेगी। त्योहारों से पहले यदि आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो रसोई के बजट पर दबाव बना रह सकता है।
