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भोपाल · 20-08-2026

भोपाल में 36 किमी का छह लेन बायपास जल्द होगा शुरू, 3,200 पेड़ों की कटाई प्रस्तावित; जमीनी आकलन पर सवाल

भोपाल के पश्चिमी हिस्से में 35.6 किमी छह लेन बायपास का निर्माण जल्द शुरू होगा। परियोजना में 45 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित और 3200 पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है।

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समाचार डेस्क · 20-08-2026
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भोपाल में 36 किमी का छह लेन बायपास जल्द होगा शुरू, 3,200 पेड़ों की कटाई प्रस्तावित; जमीनी आकलन पर सवाल

भोपाल। राजधानी भोपाल के पश्चिमी हिस्से में बनने जा रहा करीब 36 किलोमीटर लंबा छह लेन बायपास अब निर्माण की दिशा में आगे बढ़ गया है। परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अगले दो-तीन महीनों में निर्माण कार्य शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। बायपास के बनने से शहर के भीतर भारी वाहनों का दबाव कम होने और बाहरी यातायात को वैकल्पिक मार्ग मिलने की उम्मीद है।

हालांकि, परियोजना के साथ पर्यावरणीय चिंता भी सामने आई है। एमपीआरडीसी के आंकड़ों के अनुसार बायपास निर्माण के लिए करीब 3,200 पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है। वहीं स्थानीय स्तर पर किए गए आकलन में पेड़ों की संख्या इससे कहीं अधिक बताई जा रही है। खासतौर पर कोलार क्षेत्र से जुड़े नौ गांवों में ही 8 हजार से अधिक पेड़ों के प्रभावित होने की संभावना जताई गई है। इससे सरकारी आंकड़ों और जमीनी आकलन के बीच अंतर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

35.6 किमी मुख्य सड़क, दोनों ओर सर्विस रोड

परियोजना के तहत करीब 35.611 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जाएगी। इसमें चार मुख्य लेन के साथ दोनों ओर दो-दो लेन की सर्विस रोड प्रस्तावित है। इस तरह पूरा मार्ग छह लेन का होगा।

प्रस्तावित बायपास 11 मील के पास कोलार तहसील के रतनपुर सड़क गांव से शुरू होकर फंदाकला के पास भोपाल-देवास मार्ग से जुड़ेगा। सड़क का मार्ग समसगढ़, समसपुरा और रातीबड़ क्षेत्र से होकर गुजरेगा।

इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य नर्मदापुरम और इटारसी की ओर से इंदौर जाने वाले भारी वाहनों को भोपाल शहर के भीतर प्रवेश किए बिना वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराना है। इससे शहर की प्रमुख सड़कों पर भारी वाहनों का दबाव कम होने की उम्मीद है।

भौगोलिक संदर्भ

45 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित होने की जानकारी

परियोजना में करीब 45 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। इसमें कोलार क्षेत्र में लगभग 28 हेक्टेयर वन भूमि शामिल होने की बात कही जा रही है।

रतनपुर सड़क, गुराड़ीघाट, थुआखेड़ा, महावड़िया और कालापानी क्षेत्र में घना वन क्षेत्र मौजूद है। यही इलाके पेड़ों की संख्या के लिहाज से सबसे संवेदनशील माने जा रहे हैं।

वन क्षेत्र की भरपाई के लिए एमपीआरडीसी ने अमझरा में 90 हेक्टेयर जमीन की मांग की है। यहां करीब 32 हजार पौधे लगाने की योजना बताई गई है।

सरकारी सूची में कई गांवों में पेड़ों की संख्या कम

परियोजना से जुड़े प्रशासनिक आंकड़ों में कई गांवों में प्रभावित होने वाले पेड़ों की संख्या अपेक्षाकृत कम दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार रतनपुर सड़क में 30, सेमरीकलां में 15, पिपलिया कैशी में 50, गुराड़ीघाट में 40, नरेला में 150, मुंडला में 70 और जाटखेड़ी में 84 पेड़ चिन्हित किए गए हैं।

इसी तरह समसपुरा में 54, दूबड़ी में 52, आंवला और हताईखेड़ी में 50-50 तथा फंदाकला में 25 पेड़ दर्ज किए गए हैं।

इन आंकड़ों को लेकर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि प्रस्तावित मार्ग के कई हिस्से घने वन क्षेत्र से होकर गुजरते हैं। स्थानीय आकलन में पेड़ों की संख्या सरकारी सूची से काफी अधिक बताई जा रही है। ऐसे में निर्माण शुरू होने से पहले पेड़ों की वास्तविक संख्या और प्रभावित वन क्षेत्र का स्पष्ट आकलन किए जाने की मांग उठ रही है।

विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन की चुनौती

बायपास परियोजना से भोपाल के यातायात को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर नर्मदापुरम, इटारसी और इंदौर के बीच आने-जाने वाले भारी वाहनों के लिए यह वैकल्पिक मार्ग महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

दूसरी ओर, बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई और वन क्षेत्र के प्रभावित होने की आशंका पर्यावरणीय चिंता का विषय है। ऐसे में परियोजना के सामने विकास की जरूरत के साथ वन एवं पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की चुनौती भी है।

अधिकारियों के अनुसार परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। संबंधित ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों की रिपोर्ट में भी भागीदारी रही है। अब निर्माण कार्य को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी है।

निर्माण शुरू होने से पहले पेड़ों की वास्तविक संख्या, वन क्षेत्र पर प्रभाव और प्रस्तावित प्रतिपूरक पौधरोपण की प्रभावशीलता पर स्पष्टता इस परियोजना की पर्यावरणीय स्वीकार्यता के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।

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