भोपाल में ग्राम पंचायत कर्मचारियों का आंदोलन: BJP कार्यालय से हटाए गए, बोर्ड ऑफिस चौराहे पर भूख हड़ताल शुरू
भोपाल में ग्राम पंचायत चौकीदार, भृत्य, सफाईकर्मी और पंप ऑपरेटर समेत अंशकालीन कर्मचारियों ने न्यूनतम वेतन और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग को लेकर भूख हड़ताल शुरू की।


भोपाल। ग्राम पंचायतों और विभिन्न सरकारी विभागों में काम करने वाले अंशकालीन, अस्थायी और मानदेय कर्मचारियों का दो दिवसीय आंदोलन सोमवार से शुरू हो गया। चौकीदार, भृत्य, सफाईकर्मी और पंप ऑपरेटर सहित विभिन्न श्रेणियों के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर बीजेपी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे थे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाकर बोर्ड ऑफिस चौराहे पहुंचाया, जिसके बाद कर्मचारियों ने वहीं भूख हड़ताल शुरू कर दी।
आंदोलनकारियों का कहना है कि वे वर्षों से ग्राम पंचायतों में सुरक्षा, सफाई, पेयजल व्यवस्था और रोजमर्रा के जरूरी काम संभाल रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है। कर्मचारियों ने सरकार से उन्हें शासकीय चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा देने के साथ न्यूनतम वेतन और अन्य सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं देने की मांग की है।
2 से 4 हजार रुपए तक मानदेय मिलने का दावा
कर्मचारी नेता वासुदेव शर्मा के मुताबिक, ग्राम पंचायतों में काम करने वाले कई कर्मचारियों को वर्तमान में महज 2 से 4 हजार रुपए प्रतिमाह मानदेय मिल रहा है। आंदोलनकारियों का कहना है कि इतनी कम राशि में परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल है।
कर्मचारियों ने न्यूनतम वेतन लागू करने के साथ वर्षों से लंबित एरियर का भुगतान करने की मांग भी उठाई है। उनका कहना है कि लंबे समय से सेवाएं देने के बावजूद उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं हुआ है।
सेवा शर्तें तय करने और सामाजिक सुरक्षा की मांग
आंदोलनकारियों ने केवल मानदेय बढ़ाने की मांग ही नहीं की है, बल्कि सेवा से जुड़ी स्थायी व्यवस्था लागू करने की मांग भी रखी है। कर्मचारियों के अनुसार उन्हें पीएफ, ईएसआई, चिकित्सा सुविधा, पेंशन या बीमा, वार्षिक वेतन वृद्धि और लंबित एरियर जैसी सुविधाएं मिलनी चाहिए।
कर्मचारियों का कहना है कि कई बार मांग उठाने के बावजूद समाधान नहीं हुआ। इसी वजह से इस बार दो दिवसीय आंदोलन के साथ भूख हड़ताल का निर्णय लिया गया है।
11 श्रेणियों के कर्मचारी आंदोलन में शामिल
वासुदेव शर्मा के अनुसार आंदोलन को ‘न्यूनतम वेतन दिलाओ उपवास आंदोलन’ नाम दिया गया है। इसमें ग्राम पंचायतों के चौकीदार, पंप ऑपरेटर, भृत्य, सफाईकर्मी, लोकल यूथ सर्वेयर सहित अलग-अलग विभागों में काम करने वाले अंशकालीन और अस्थायी कर्मचारी शामिल हैं।
आंदोलनकारियों का दावा है कि शिक्षा और जनजातीय कार्य विभाग के स्कूलों एवं छात्रावासों में काम करने वाले अंशकालीन कर्मचारियों को करीब 4 से 5 हजार रुपए प्रतिमाह मिलते हैं। उनका आरोप है कि कई कर्मचारियों से 10 से 12 घंटे तक काम कराया जाता है।
अलग-अलग विभागों में मानदेय को लेकर कर्मचारियों का दावा
आंदोलनकारियों ने विभिन्न श्रेणियों में मिलने वाले मानदेय का जो विवरण बताया है, वह इस प्रकार है—
स्कूल, छात्रावास और आयुष विभाग के अंशकालीन कर्मचारी: 4 से 5 हजार रुपए
ग्राम पंचायत चौकीदार, पंप ऑपरेटर, भृत्य और सफाईकर्मी: 3 से 4 हजार रुपए
स्वास्थ्य विभाग के चतुर्थ श्रेणी आउटसोर्स कर्मचारी: 7 से 8 हजार रुपए
लोक यूथ सर्वेयर: करीब 1 हजार रुपए
पेसा मोबिलाइजर: करीब 4 हजार रुपए
कोटवार: 2 से 5 हजार रुपए
मध्याह्न भोजन कार्यकर्ता: करीब 4 हजार रुपए
मनरेगा मेट: 2 हजार रुपए से कम
योग सहायक एवं प्रशिक्षक: करीब 4,500 रुपए
यह आंकड़े आंदोलनकारी कर्मचारियों की ओर से बताए गए हैं। अलग-अलग विभागों में लागू वास्तविक मानदेय और सेवा शर्तों की आधिकारिक स्थिति संबंधित विभागों के नियमों के अनुसार अलग हो सकती है।
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष को पत्र भेजकर उठाए सवाल
आंदोलनकारी वासुदेव शर्मा ने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष को पत्र भेजकर कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान की मांग की है। पत्र में दावा किया गया है कि वर्ष 2003 के बाद प्रदेश में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर स्थायी रोजगार के अवसर कम हुए हैं और बड़ी संख्या में काम अस्थायी तथा आउटसोर्स व्यवस्था के जरिए कराया जा रहा है।
पत्र में यह भी कहा गया है कि इन पदों पर काम करने वाले गरीब, मजदूर, दलित, आदिवासी, ओबीसी और मध्यमवर्गीय परिवारों के युवाओं को रोजगार की स्थिरता और सम्मानजनक वेतन नहीं मिल पा रहा है।
अब बोर्ड ऑफिस चौराहे पर जारी रहेगा आंदोलन
बीजेपी कार्यालय के बाहर से हटाए जाने के बाद कर्मचारी बोर्ड ऑफिस चौराहे पर पहुंच गए और वहीं भूख हड़ताल शुरू कर दी। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सरकार की ओर से ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में न्यूनतम वेतन, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का दर्जा, सेवा शर्तों का निर्धारण, पीएफ-ईएसआई, चिकित्सा सुविधा, पेंशन या बीमा, वार्षिक वेतन वृद्धि और लंबित एरियर का भुगतान शामिल है। अब देखना होगा कि दो दिवसीय आंदोलन और भूख हड़ताल के बाद सरकार की ओर से कर्मचारियों की मांगों पर क्या रुख सामने आता है।

