Sehore Monsoon: सीहोर में मानसून सुस्त, पिछले साल से 5.41 इंच कम बारिश; 66 में से 27 तालाब अब भी सूखे
सीहोर जिले में अब तक केवल 20 इंच (508.7 मिमी) बारिश हुई है, जो पिछले साल के 25.44 इंच (646.3 मिमी) से काफी कम है। 27 तालाब सूखे हैं और शहर की जलापूर्ति करने वाले प्रमुख तालाब भी बेहद कम भर पाए हैं।


सीहोर। अगस्त का पहला सप्ताह शुरू हो चुका है, लेकिन सीहोर जिले में मानसून अब तक उम्मीदों पर पूरी तरह खरा नहीं उतर पाया है। 3 अगस्त तक जिले में औसतन 20.03 इंच (508.7 मिमी) बारिश दर्ज की गई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक 25.44 इंच (646.3 मिमी) वर्षा हो चुकी थी। यानी इस बार अब तक 5.41 इंच (138.4 मिमी) कम बारिश हुई है। कम वर्षा का असर अब जिले के तालाबों, जलाशयों और पेयजल स्रोतों पर साफ दिखाई देने लगा है।
66 में से 27 तालाब अब भी सूखे
जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले के 66 प्रमुख तालाबों में से 27 तालाब पूरी तरह सूखे पड़े हैं, जबकि शेष 39 तालाबों में भी केवल 0.30 प्रतिशत से 67 प्रतिशत तक ही जलभराव हो सका है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो जिले में पेयजल और सिंचाई दोनों पर संकट गहरा सकता है।
शहर की पेयजल व्यवस्था पर भी असर
सीहोर शहर की जलापूर्ति जिन दो प्रमुख तालाबों पर निर्भर है, उनकी स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है।
भगवानपुरा तालाब की 6.71 एमसीएम क्षमता के मुकाबले केवल 0.70 एमसीएम (10.43%) पानी उपलब्ध है।
जमोनिया तालाब की 11.32 एमसीएम क्षमता के मुकाबले मात्र 1.40 एमसीएम (12.37%) जल भंडारण है।
वहीं आष्टा की आपातकालीन पेयजल व्यवस्था के लिए उपयोग होने वाले रामपुरा खुर्द डेम में भी केवल 2.38 एमसीएम (18.67%) पानी मौजूद है।
रबी फसल और पेयजल पर मंडराया संकट
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि यदि अगस्त में पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो जिले में करीब 29 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसल की सिंचाई और पलेवा प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा 4 हजार से अधिक कुएं, हैंडपंप और ट्यूबवेल पर्याप्त रूप से रिचार्ज नहीं हो पाएंगे, जिससे गर्मी के मौसम में पेयजल संकट और गहरा सकता है।
इन तालाबों में अब तक नहीं पहुंचा पानी
बरखेड़ी, बरखेड़ा, भाऊखेड़ी, बोरदी टैंक, ढाबलामाता, हालियाखेड़ी, इछावर, कालापीपल, कांकड़खेड़ा, कोनाझिर, लसुड़िया कांगर, मूंडला, पांगरा, रामदासी टैंक, रामपुरा, रसूलपुरा, अपर बोरदी, विनायकपुरा, बमुलिया भाटी, मैना-1, मैना-2, पंचापुरा, फूडरा, सेवदा और नींबूखेड़ा सहित कुल 27 तालाब अब भी पूरी तरह सूखे पड़े हैं।
तहसीलों में वर्षा का हाल
3 अगस्त तक जिले में सबसे अधिक वर्षा आष्टा में 22.74 इंच (582.0 मिमी) दर्ज की गई। इसके बाद:
रेहटी – 21.24 इंच (539.6 मिमी)
बुधनी – 20.75 इंच (527.0 मिमी)
इछावर – 20.71 इंच (526.0 मिमी)
भैरूंदा – 20.59 इंच (523.0 मिमी)
जावर – 19.49 इंच (495.0 मिमी)
सीहोर – 19.24 इंच (488.6 मिमी)
श्यामपुर – 14.62 इंच (371.4 मिमी) (सबसे कम)
मौसम विभाग ने दी राहत की उम्मीद
रफी अहमद किदवई कृषि महाविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एस.एस. तोमर के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र, सक्रिय मानसून ट्रफ, अरब सागर से मिल रही लगातार नमी और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से अगले 3 से 4 दिनों तक जिले में रुक-रुककर मध्यम से तेज बारिश होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम विभाग का पूर्वानुमान सही साबित होता है तो सूखे तालाबों में पानी पहुंचेगा, बांधों का जलस्तर बढ़ेगा और किसानों के साथ-साथ आम लोगों को भी बड़ी राहत मिलेगी।