जिले में ठप हो सकती है मध्याह्न भोजन व्यवस्था: 3 साल के बकाए और मानदेय की मांग को लेकर 1,500 से अधिक स्कूलों की रसोइया बहनें हड़ताल की राह पर
PM POSHAN योजना में लंबित भुगतान, खाद्यान्न और रसोई सुविधाओं को लेकर महिला स्व-सहायता समूह महासंघ ने हड़ताल की चेतावनी दी है। जिले के 1500 से अधिक स्कूल प्रभावित होने का दावा।


नर्मदापुरम। सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए गर्म भोजन तैयार करने वाली महिला स्व-सहायता समूहों और रसोइया बहनों की समस्याएं अब आंदोलन की ओर बढ़ती दिखाई दे रही हैं। प्रांतीय महिला एवं स्व-सहायता समूह महासंघ, मध्यप्रदेश ने प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना (PM POSHAN) के तहत काम कर रहे समूहों और रसोइया बहनों की लंबित राशि, खाद्यान्न और अन्य समस्याओं को लेकर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र भेजा है।
महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो महिला स्व-सहायता समूह और रसोइया बहनें अनिश्चितकालीन चूल्हा बंद हड़ताल पर जा सकती हैं। महासंघ के दावे के अनुसार इसका असर जिले के 1500 से अधिक शालाओं की भोजन व्यवस्था पर पड़ सकता है।
तीन वर्षों की जून की 15 दिन की राशि का मामला
महासंघ द्वारा उठाए गए मुद्दों में सबसे प्रमुख जून माह की 15 दिवस की लंबित राशि का है। महासंघ के अनुसार वर्ष 2024, 2025 और 2026 की जून माह की 15 दिवस की राशि उपलब्ध नहीं कराई गई है। पत्र में संबंधित रसोइया बहनों से जुड़ी करीब 2 लाख 32 हजार रुपये की राशि लंबित होने का उल्लेख किया गया है।
महासंघ का कहना है कि पूर्व में जून माह की 15 दिवस की राशि नियमित रूप से प्राप्त होती थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में भुगतान व्यवस्था प्रभावित हुई है। संगठन ने तीनों वर्षों की लंबित राशि का तत्काल भुगतान करने की मांग की है।
अलग-अलग तारीखों पर भुगतान से बढ़ रही परेशानी
महासंघ ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों में राशि अलग-अलग समय पर जारी किए जाने पर भी सवाल उठाया है। संगठन का कहना है कि भुगतान की एक समान व्यवस्था नहीं होने से महिला स्व-सहायता समूहों और रसोइया बहनों को आर्थिक प्रबंधन में परेशानी होती है।
महासंघ ने मांग की है कि प्रदेश के सभी जिलों में एक निश्चित तारीख पर राशि और खाद्यान्न उपलब्ध कराने की व्यवस्था लागू की जाए। संगठन के अनुसार इससे समूहों को पहले से आर्थिक योजना बनाने में सुविधा होगी और विद्यालयों में भोजन व्यवस्था को भी नियमित रखने में मदद मिलेगी।
महंगाई बढ़ी, योजना की लागत राशि बढ़ाने की मांग
महासंघ ने PM POSHAN के तहत मिलने वाली लागत राशि के पुनर्निर्धारण की मांग भी की है। संगठन ने दाल, तेल, सब्जी, मसाले और ईंधन सहित भोजन तैयार करने में इस्तेमाल होने वाली आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों का हवाला देते हुए कहा है कि वर्तमान परिस्थितियों में निर्धारित राशि पर भोजन व्यवस्था संचालित करना मुश्किल हो रहा है।
महासंघ का कहना है कि योजना की लागत राशि को मौजूदा बाजार दरों और महंगाई को ध्यान में रखते हुए पुनर्निर्धारित किया जाना चाहिए।
रसोई गैस और जर्जर रसोई भवन भी समस्या
बच्चों के भोजन की व्यवस्था से जुड़े बुनियादी ढांचे को लेकर भी महासंघ ने चिंता जताई है। ज्ञापन में कई स्थानों पर जर्जर रसोई शेड, रसोई गैस और अन्य आवश्यक सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया गया है।
संगठन का कहना है कि भोजन तैयार करने वाली महिलाओं को सुरक्षित रसोई, गैस, आवश्यक बर्तन और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराना जरूरी है। इन सुविधाओं के अभाव में न केवल रसोइया बहनों को परेशानी होती है, बल्कि विद्यालयों में भोजन व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।
भुगतान और खाद्यान्न वितरण में पारदर्शिता की मांग
महासंघ ने राशि और खाद्यान्न वितरण व्यवस्था को पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि समूहों को समय पर राशि और खाद्यान्न उपलब्ध होने से ही विद्यालयों में बच्चों के लिए भोजन व्यवस्था लगातार संचालित की जा सकती है।
ज्ञापन में योजना से जुड़ी व्यवस्थाओं में जिम्मेदारी तय करने तथा अनियमितता या लापरवाही की स्थिति में संबंधित स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग भी की गई है।
रसोइया बहनों के मानदेय पर भी सवाल
महासंघ ने रसोइया बहनों के मानदेय को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की है। संगठन के अनुसार सीमित मानदेय और बढ़ती महंगाई के बीच काम करने वाली महिलाओं के सामने आर्थिक कठिनाइयां बनी हुई हैं।
महासंघ का कहना है कि सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने और उसे नियमित रूप से संचालित करने में रसोइया बहनों तथा महिला स्व-सहायता समूहों की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में उनके मानदेय, कार्य परिस्थितियों और मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी सरकार को निर्णय लेना चाहिए।
15 सितंबर की समयसीमा, अब आगे क्या?
महासंघ की ओर से श्रीमती गौरी इस्कर ने बताया कि संगठन ने केंद्रीय मंत्री से मांगों पर तत्काल सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह किया है। मुख्य मांगों में तीन वर्षों की जून माह की 15 दिवस की लंबित राशि का भुगतान, एक समान भुगतान व्यवस्था, समय पर खाद्यान्न उपलब्ध कराना, रसोई गैस एवं आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना और योजना की लागत राशि का पुनर्निर्धारण शामिल है।
महासंघ ने कहा है कि 15 सितंबर तक मांगों पर केंद्र और राज्य स्तर से कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में महिला स्व-सहायता समूह और रसोइया बहनें अनिश्चितकालीन चूल्हा बंद हड़ताल पर जाने का निर्णय ले सकती हैं।
यदि हड़ताल होती है तो महासंघ के दावे के अनुसार जिले के 1500 से अधिक स्कूलों में बच्चों के लिए बनने वाले मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। हालांकि, हड़ताल की स्थिति में वास्तविक रूप से कितने विद्यालय और बच्चे प्रभावित होंगे, यह प्रशासनिक निर्णय और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
अब निगाहें प्रशासन और शासन स्तर पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हैं। लंबित भुगतान, खाद्यान्न और रसोई व्यवस्था से जुड़े इन मुद्दों का समाधान होता है या आंदोलन आगे बढ़ता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
