एआई की रफ्तार पर सुरक्षा का सवाल भारी, शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट
एआई कंपनियों के प्रमुखों की सुरक्षा संबंधी चेतावनी के बाद अमेरिका, यूरोप और एशिया के बाजारों में एआई शेयरों पर दबाव आया। ट्रंप और चीन की भूमिका भी चर्चा में।


बिजनेस डेस्क। कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई की तेज दौड़ के बीच अब इसकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ रही है। दुनिया की प्रमुख एआई कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों की ओर से विकास की रफ्तार धीमी करने की जरूरत बताए जाने के बाद सोमवार को अमेरिका, यूरोप और एशिया के बाजारों में एआई से जुड़ी कंपनियों के शेयरों पर दबाव देखने को मिला।
एआई क्षेत्र में अरबों डॉलर का निवेश हो रहा है। चिप, डेटा सेंटर, ऊर्जा और तकनीकी बुनियादी ढांचे से जुड़ी कंपनियों को इसका बड़ा फायदा मिला है। ऐसे में एआई विकास की रफ्तार धीमी होने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
एआई कंपनियां विकास की रफ्तार धीमी करने की बात क्यों कर रही हैं?
एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोडेई ने एआई मॉडल की क्षमता बढ़ाने की गति कम करने की अपील की है। उन्होंने एआई के गलत इस्तेमाल से पैदा होने वाले गंभीर खतरों की चेतावनी देते हुए कहा कि अगले छह से 12 महीनों में एआई एजेंट इंटरनेट के बड़े हिस्से पर नियंत्रण करने में सक्षम हो सकते हैं।
एक्सएआई के प्रमुख एलन मस्क और ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने भी एआई के संभावित जोखिमों पर चिंता जताई है।
यह चिंता हाल की घटनाओं के बाद और बढ़ी है। एंथ्रोपिक की एक रिपोर्ट में उसके क्लॉड एआई मॉडल के इस्तेमाल को हथियारों के विकास, साइबर गतिविधियों, निगरानी और धोखाधड़ी जैसी गतिविधियों से जोड़ा गया। एआई एजेंटों के संभावित दुरुपयोग और डेटा सेंटरों के बढ़ते विरोध ने भी बहस तेज की है।
अब सवाल सिर्फ एआई कितनी तेजी से आगे बढ़ेगा, यह नहीं है, बल्कि यह भी है कि उसे सुरक्षित तरीके से कितनी तेजी से विकसित किया जाए।
अमेरिका से एशिया तक शेयर बाजारों पर असर
एआई से जुड़ी चिंताओं के बीच सोमवार को तकनीकी शेयरों में तेज बिकवाली हुई। नैस्डैक 100 में शुरुआती कारोबार में करीब 1.2 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स 5.1 प्रतिशत नीचे आया।
एनवीडिया के शेयर में करीब 3.6 प्रतिशत, एएमडी में 5.6 प्रतिशत और माइक्रोन में 6 प्रतिशत की गिरावट रही। लैम रिसर्च और एप्लाइड मैटेरियल्स भी करीब 6 प्रतिशत नीचे आए। यूरोप के तकनीकी क्षेत्र में 2.2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और एएसएमएल करीब 5.9 प्रतिशत नीचे आया।
एशिया में सॉफ्टबैंक में एक समय 13.2 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। टीएसएमसी और एसके हाइनिक्स भी दबाव में रहे।
ट्रंप का रुख तकनीकी कंपनियों से अलग
एआई सुरक्षा को लेकर तकनीकी कंपनियों की चिंता के विपरीत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ज्यादा नियंत्रण और पाबंदियों के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि एआई और डेटा सेंटरों के खिलाफ विरोध अमेरिका की तकनीकी बढ़त को कमजोर कर सकता है और इसका फायदा चीन को मिलेगा।
अमेरिका में कुछ सांसद एआई पर नए नियमों की मांग कर रहे हैं, लेकिन ट्रंप का जोर विकास की गति कम करने के बजाय अमेरिका की तकनीकी बढ़त बनाए रखने पर है।
एआई पर भारी खर्च से बाजार क्यों चिंतित है?
एआई मॉडल और डेटा सेंटरों पर कंपनियां भारी रकम खर्च कर रही हैं। इस निवेश का असर चिप, ऊर्जा, डेटा सेंटर और तकनीकी बुनियादी ढांचे से जुड़ी कंपनियों तक पहुंचा है।
अगर सुरक्षा या आर्थिक कारणों से एआई कंपनियां अपना खर्च कम करती हैं तो इसका असर पूरे इकोसिस्टम पर पड़ सकता है। निवेशकों को आशंका है कि एआई पर खर्च में कमी से उन कंपनियों के शेयर भी दबाव में आ सकते हैं, जिन्हें इस निवेश से लगातार फायदा मिल रहा है।
2022 में चैटजीपीटी के आने के बाद एआई ने वैश्विक शेयर बाजारों को मजबूत सहारा दिया था। अब सुरक्षा, साइबर जोखिम, ऊर्जा खपत और भारी निवेश से जुड़े सवाल इस तेजी की स्थिरता पर बहस खड़ी कर रहे हैं।
चीन के सस्ते एआई मॉडल भी चुनौती
अमेरिका की एआई कंपनियों के सामने चीन की कम लागत वाली तकनीक भी बड़ी चुनौती बन रही है। मूनशॉट एआई का किमी के-3, अलीबाबा का क्वेन और डीपसीक के मॉडल कम लागत में एआई सेवाएं उपलब्ध कराने की प्रतिस्पर्धा बढ़ा रहे हैं।
इससे महंगे एआई मॉडल बनाने वाली कंपनियों पर लागत और कीमत कम करने का दबाव बढ़ सकता है। यानी उद्योग एक साथ सुरक्षा और प्रतिस्पर्धा, दोनों चुनौतियों का सामना कर रहा है।
आगे क्या?
एआई को लेकर कंपनियों, निवेशकों और सरकारों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल गति और सुरक्षा के बीच संतुलन का है। एक तरफ एआई में निवेश और तकनीकी प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है, तो दूसरी तरफ इसके दुरुपयोग और भारी खर्च को लेकर चिंताएं भी सामने आ रही हैं।
ऐसे में आने वाले समय में एआई की दिशा सिर्फ तकनीकी क्षमता से नहीं, बल्कि सुरक्षा नियमों, निवेश की क्षमता और अमेरिका-चीन की प्रतिस्पर्धा से भी तय होगी।

