नेपाल में फ्लैश फ्लड के बाद भयावह हालात, मुर्दाघर पड़े कम; भारत की गंडक नदी में मिले 7 शव
नेपाल में फ्लैश फ्लड के बाद हालात भयावह हैं। मुर्दाघरों की क्षमता खत्म होने लगी है और भारत के महाराजगंज-कुशीनगर में गंडक नदी से 7 शव बरामद हुए हैं।


काठमांडू। नेपाल में बुधवार को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। मध्य और दक्षिणी नेपाल में करीब 200 किलोमीटर लंबे भोटे कोशी-त्रिशूली-नारायणी नदी कॉरिडोर के आसपास शव मिलने का सिलसिला जारी है। बड़ी संख्या में शव बरामद होने के कारण कई जिलों के मुर्दाघरों की क्षमता जवाब दे गई है।
नदियों में बहकर गए लोगों के शव जैसे-जैसे निचले इलाकों में पहुंच रहे हैं, प्रशासन को उन्हें एक जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरित करना पड़ रहा है। कई जगह सरकारी इमारतों और सामुदायिक भवनों को अस्थायी शव प्रबंधन केंद्र और मुर्दाघर के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
भारत तक पहुंचा बाढ़ का असर
नेपाल में तबाही के बाद नदियों का बढ़ा जलस्तर भारत के सीमावर्ती इलाकों तक पहुंच गया है। शुक्रवार सुबह तक उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर जिलों में गंडक नदी से सात अज्ञात शव बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है।
नेपाल सीमा से लगे महाराजगंज जिले में सशस्त्र सीमा बल (SSB) के जवानों ने मोटरबोट की मदद से तीन महिलाओं और एक पुरुष के शव बरामद किए। वहीं कुशीनगर में गंडक नदी के छितौनी तटबंध के पास तीन अन्य शव मिले।
शवों की पहचान फिलहाल नहीं हो सकी है। स्थानीय प्रशासन द्वारा आवश्यक कानूनी प्रक्रिया और पहचान की कार्रवाई की जा रही है।
नेपाल में नदी किनारे सैकड़ों सुरक्षाकर्मी तैनात
नेपाल सरकार ने रसुवा से लेकर भारतीय सीमा से लगे चितवन और अन्य संभावित क्षेत्रों में नदी किनारे सैकड़ों सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया है। इनका मुख्य उद्देश्य बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में तलाशी अभियान चलाना और नदी में बहकर आने वाले शवों को बरामद करना है।
जिलों में शव रखने की जगह कम पड़ने के बाद नेपाल के गृह मंत्रालय ने रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग, गोरखा, चितवन और नवलपरासी के प्रशासन के साथ समन्वय शुरू किया है।
नेपाल गृह मंत्रालय की संयुक्त प्रवक्ता रमा आचार्य सुबेदी के मुताबिक, जहां भी शव मिल रहे हैं, वहां उनके उचित प्रबंधन और पहचान की प्रक्रिया के लिए संबंधित प्रशासन के साथ समन्वय किया जा रहा है। प्राथमिकता शवों को सुरक्षित रखने और जल्द से जल्द उनकी पहचान सुनिश्चित करने की है।
चितवन में सबसे ज्यादा 221 शव बरामद
भारतीय सीमा के नजदीक नारायणी नदी के किनारे स्थित चितवन इस आपदा से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल है। शुक्रवार तक यहां 221 शव बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई।
चितवन के अस्पतालों में मौजूद मुर्दाघरों की क्षमता केवल करीब 30 से 50 शवों की थी। बड़ी संख्या में शव पहुंचने के बाद अधिकारियों को भरतपुर में एक खाली सरकारी इमारत को अस्थायी शव प्रबंधन और पहचान केंद्र में बदलना पड़ा।
इस केंद्र में करीब 250 शव रखने की क्षमता बताई गई है।
शवों को सुरक्षित रखने के लिए प्रशासन ने एयर कंडीशनर और ड्राई आइस की व्यवस्था की है। यदि यह क्षमता भी पूरी हो जाती है तो देवघाट स्थित इलेक्ट्रिक श्मशान घाट को वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर इस्तेमाल करने की तैयारी है।
चितवन के मुख्य जिला अधिकारी गणेश अर्याल ने बताया कि तलाशी अभियान लगातार जारी रहने के कारण शवों के प्रबंधन की चुनौती बढ़ती जा रही है। उनके मुताबिक कई शव क्षत-विक्षत स्थिति में मिल रहे हैं, जिससे उनकी पहचान करना और कठिन हो रहा है।
धाडिंग और गोरखा से शव पोखरा भेजे गए
निचले इलाकों में लगातार शव मिलने के कारण दूसरे जिलों के प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया है। धाडिंग और गोरखा से बरामद शवों को काठमांडू और पोखरा भेजा गया है।
वहीं पूर्वी नवलपरासी से बरामद शवों को पोखरा, पाल्पा, बुटवल और भैरहवा भेजने की व्यवस्था की गई है। कावासोती स्थित अंकुर सामुदायिक वन हॉल को भी अस्थायी कोल्ड स्टोरेज के रूप में इस्तेमाल किए जाने की जानकारी है।
पोखरा में भी शव रखने की क्षमता खत्म
शुक्रवार तक धाडिंग, गोरखा, तनहुन और पूर्वी नवलपरासी से बरामद 102 शवों को फोरेंसिक जांच के लिए पोखरा ले जाया गया।
कास्की के मुख्य जिला अधिकारी कुमान सिंह गुरुंग के मुताबिक पोखरा के मुर्दाघरों में कुल मिलाकर केवल 88 शव रखने की क्षमता है। बरामद शवों की संख्या को देखते हुए यह क्षमता भी पार हो चुकी है।
ऐसे में प्रशासन को शवों को सुरक्षित रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर निर्भर रहना पड़ रहा है।
10 दिन से दो सप्ताह तक ही सुरक्षित रखे जा सकते हैं शव
पोखरा एकेडमी ऑफ हेल्थ साइंसेज के अधिकारियों के अनुसार सामान्य तौर पर 2 से 6 डिग्री सेल्सियस तापमान पर शवों को करीब 10 दिन से दो सप्ताह तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
यदि इससे अधिक समय तक शवों को सुरक्षित रखना हो तो सब-जीरो तापमान वाली विशेष सुविधाओं की आवश्यकता होती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस स्तर की पर्याप्त भंडारण सुविधा वहां मौजूद नहीं है।
इस कारण प्रशासन के सामने शवों के सुरक्षित प्रबंधन, फोरेंसिक जांच और जल्द पहचान की चुनौती लगातार बढ़ रही है।
बढ़ती आपदा के बीच राहत और पहचान अभियान जारी
नेपाल में फ्लैश फ्लड के बाद राहत और बचाव अभियान के साथ-साथ लापता लोगों की तलाश भी जारी है। नदियों के तेज बहाव के कारण दूर-दराज के इलाकों से शव निचले क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं।
भारत के सीमावर्ती जिलों में भी प्रशासन और सुरक्षा बल सतर्क हैं। गंडक नदी में मिले अज्ञात शवों की पहचान के लिए संबंधित एजेंसियां कार्रवाई कर रही हैं।
फिलहाल नेपाल प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, बरामद शवों की पहचान और उन्हें सुरक्षित रखने की व्यवस्था करना है। लगातार बदलते नदी प्रवाह और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बीच राहत एवं बचाव दलों के लिए अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
