MP News: तेंदुआ शिकार और अंगों की तस्करी मामले में एक और गिरफ्तारी, 3 राज्यों तक फैला नेटवर्क
मध्य प्रदेश में तेंदुओं के शिकार और उनके अंगों की तस्करी के मामले में एसटीएसएफ ने मुरैना से एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। इस मामले में अब तक तीन राज्यों से 15 आरोपी पकड़े जा चुके हैं, जबकि जांच में 10 तेंदुओं के शिकार की बात सामने आई है।


मुरैना/शिवपुरी। मध्यप्रदेश में तेंदुओं के अवैध शिकार और उनके अंगों की कथित तस्करी से जुड़े मामले में स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स (STSF) ने एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। टीम ने मुरैना निवासी सुखदेव पिता सर्वेश को 26 अगस्त को गिरफ्तार किया। उसे शिवपुरी की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से न्यायालय ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।
जांच में सामने आया है कि इस गिरोह ने श्योपुर और मुरैना क्षेत्र में कम से कम 10 तेंदुओं का शिकार किया था। यह इलाका चीता लैंडस्केप के लिहाज से भी महत्वपूर्ण और संवेदनशील माना जाता है। STSF को पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के दौरान मिली जानकारी के आधार पर सुखदेव तक पहुंचने में सफलता मिली।
तीन राज्यों तक फैला नेटवर्क
इस मामले में अब तक मध्यप्रदेश, हरियाणा और दिल्ली से जुड़े 15 आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। जांच एजेंसी का कहना है कि आरोपियों के कब्जे से तेंदुओं के कई अंग बरामद किए गए हैं।
इसके अलावा वन्यजीवों के शिकार में इस्तेमाल किए जाने वाले छह लेग होल्ड ट्रैप और एक चाकू भी जब्त किया गया है। बरामदगी के बाद जांच एजेंसी अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।
श्योपुर-मुरैना क्षेत्र में शिकार का आरोप
जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि आरोपियों ने श्योपुर और मुरैना के आसपास के इलाकों में तेंदुओं को निशाना बनाया। वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से यह क्षेत्र बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां का भू-भाग चीता लैंडस्केप से भी जुड़ा हुआ है।
STSF अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि शिकार के बाद तेंदुओं के अंगों को कहां भेजा जाता था और इस अवैध कारोबार में किन लोगों की भूमिका थी।
तस्करी नेटवर्क के आगे तक पहुंचने की कोशिश
जांच एजेंसी को आशंका है कि तेंदुओं के शिकार और उनके अंगों की तस्करी का नेटवर्क सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है। तीन राज्यों से आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का दायरा और बढ़ गया है।
STSF यह भी पता लगा रही है कि आरोपियों के बीच संपर्क कैसे होता था, वन्यजीवों के अंगों की आपूर्ति किसे की जाती थी और इस नेटवर्क में अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।
फिलहाल मामले की जांच जारी है। एजेंसी को उम्मीद है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर वन्यजीव शिकार और तस्करी से जुड़े नेटवर्क की अन्य कड़ियों का भी खुलासा हो सकता है।
