सर्वे में NDA की बढ़त बरकरार, लेकिन 2029 की राह में मोदी सरकार के सामने नई चुनौतियां
India Today-CVoter सर्वे में NDA को 326 और BJP को 261 सीटों का अनुमान है। मोदी की लोकप्रियता 48.7% पर, जबकि कांग्रेस को 106 सीटों का अनुमान है। जानिए 2029 से पहले राजनीतिक संकेत।


चुनाव अभी दूर हैं, लेकिन राजनीतिक दलों की तैयारियां और जनता का मूड अभी से चुनावी बहस का हिस्सा बनने लगा है। India Today-CVoter के Mood of the Nation सर्वे के आंकड़े इसी राजनीतिक माहौल की एक तस्वीर पेश करते हैं। सर्वे के मुताबिक यदि आज लोकसभा चुनाव होते हैं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाला NDA 326 सीटों के साथ सरकार बनाने की स्थिति में होगा। बहुमत के लिए जरूरी 272 सीटों से 54 सीट अधिक का यह अनुमान सत्तारूढ़ गठबंधन की मजबूती दिखाता है।
लेकिन इस तस्वीर का दूसरा पहलू भी उतना ही महत्वपूर्ण है। जनवरी 2026 के सर्वे में NDA को 352 सीटों का अनुमान था। यानी छह महीने में अनुमानित सीटों में 26 सीट की गिरावट आई है। इसे सरकार के लिए तत्काल खतरे के रूप में देखना जल्दबाजी होगी, लेकिन इसे नजरअंदाज करना भी राजनीतिक भूल होगी।
मोदी की लोकप्रियता मजबूत, लेकिन गिरावट का संकेत भी
सर्वे का सबसे महत्वपूर्ण पहलू प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत लोकप्रियता है। 48.7 प्रतिशत लोगों ने उन्हें प्रधानमंत्री पद के लिए पहली पसंद बताया है। यह आंकड़ा विपक्ष के किसी भी चेहरे से काफी आगे है।
फिर भी जनवरी 2026 के 55 प्रतिशत के मुकाबले यह गिरावट करीब 6 प्रतिशत अंक की है। यही वह आंकड़ा है जिस पर भाजपा और NDA को गंभीरता से विचार करना चाहिए। लोकप्रियता में मामूली उतार-चढ़ाव सामान्य राजनीतिक प्रक्रिया है, लेकिन लगातार बदलते सामाजिक और आर्थिक मुद्दों के बीच जनता की प्राथमिकताओं को समझना जरूरी है।
मोदी की लोकप्रियता आज भी NDA की सबसे बड़ी राजनीतिक पूंजी है। इसलिए सवाल यह नहीं है कि उनकी लोकप्रियता खत्म हो रही है, बल्कि यह है कि क्या आने वाले वर्षों में भाजपा इस लोकप्रियता को शासन के ठोस प्रदर्शन और संगठनात्मक मजबूती में बदल पाएगी?
BJP का अनुमान 2024 से बेहतर, लेकिन पिछले सर्वे से कमजोर
सर्वे में भाजपा को 261 सीटें मिलने का अनुमान है। यह जनवरी के 287 सीटों के अनुमान से 26 कम है, लेकिन 2024 लोकसभा चुनाव में मिली 240 सीटों से 21 अधिक है।
यह अंतर महत्वपूर्ण है। इसका अर्थ यह है कि सर्वे भाजपा की स्थिति को 2024 के वास्तविक चुनाव परिणाम से बेहतर मान रहा है, लेकिन पिछले कुछ महीनों की तुलना में उसके लिए कुछ राजनीतिक जमीन खिसकने के संकेत भी दे रहा है।
भाजपा के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि अपने मौजूदा जनाधार को बनाए रखना है। रोजगार, महंगाई, शिक्षा, किसानों की आय, युवाओं के अवसर और स्थानीय स्तर पर प्रशासन जैसे मुद्दे आने वाले चुनावों में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।
कांग्रेस के लिए राहत, लेकिन अभी लंबा रास्ता
सर्वे में कांग्रेस को 106 सीटों का अनुमान मिला है, जबकि जनवरी में यह आंकड़ा 80 था। 26 सीटों की यह अनुमानित बढ़ोतरी विपक्षी पार्टी के लिए निश्चित रूप से राहत की खबर है।
लेकिन इसे कांग्रेस की वापसी की अंतिम घोषणा मानना उचित नहीं होगा। 106 सीटों का अनुमान अभी भी भाजपा के 261 के अनुमान से बहुत पीछे है। इसके अलावा पूरे INDIA गठबंधन को 185 सीटों का अनुमान मिला है, जो 2024 में विपक्षी गठबंधन द्वारा जीती गई 234 सीटों से कम है।
इसलिए कांग्रेस के सामने दोहरी चुनौती है—अपना स्वतंत्र जनाधार बढ़ाना और विपक्षी गठबंधन को प्रभावी एवं एकजुट बनाए रखना।
वोट शेयर की तस्वीर भी महत्वपूर्ण
NDA को 45.1 प्रतिशत और INDIA गठबंधन को 39.1 प्रतिशत वोट शेयर मिलने का अनुमान है। दोनों के बीच करीब 6 प्रतिशत अंक का अंतर है।
यह अंतर बताता है कि फिलहाल NDA को राजनीतिक बढ़त हासिल है। लेकिन भारतीय चुनाव व्यवस्था में वोट शेयर और सीटों का संबंध हमेशा सीधा नहीं होता। कुछ राज्यों में कुछ प्रतिशत वोट का बदलाव दर्जनों सीटों के परिणाम बदल सकता है।
इसलिए आज के सर्वे को 2029 का चुनाव परिणाम मान लेना उतना ही गलत होगा, जितना इसे पूरी तरह नजरअंदाज करना।
युवाओं की नाराजगी सबसे बड़ा संकेत
सर्वे में सामने आए संकेतों में युवाओं और Gen Z की प्राथमिकताएं खास महत्व रखती हैं। शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता जैसे मुद्दे नई पीढ़ी के लिए बेहद संवेदनशील हैं।
आज का युवा केवल राजनीतिक भाषण नहीं सुनना चाहता। वह यह जानना चाहता है कि पढ़ाई के बाद रोजगार मिलेगा या नहीं, प्रतियोगी परीक्षा में मेहनत का निष्पक्ष परिणाम मिलेगा या नहीं और उसकी आर्थिक स्वतंत्रता का रास्ता कितना आसान होगा।
यही कारण है कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर सरकारों की जवाबदेही आने वाले समय में और बढ़ेगी।
कांग्रेस को अवसर मिला है, लेकिन भरोसा जीतना होगा
कांग्रेस ने पिछले कुछ समय में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को आक्रामक तरीके से उठाया है। सर्वे में उसकी सीटों का अनुमान बढ़ना इस बात का संकेत माना जा सकता है कि विपक्ष के लिए राजनीतिक जगह मौजूद है।
लेकिन विपक्ष को केवल सरकार विरोधी अभियान तक सीमित रहने से आगे बढ़ना होगा। जनता को स्पष्ट वैकल्पिक नीतियां, नेतृत्व, आर्थिक दृष्टिकोण और शासन का भरोसेमंद मॉडल भी दिखाना होगा।
सिर्फ सत्ता विरोधी माहौल से चुनाव नहीं जीते जाते। जनता को यह विश्वास भी दिलाना पड़ता है कि सत्ता मिलने के बाद बेहतर विकल्प क्या होगा।
2029 अभी दूर है, लेकिन संकेत महत्वपूर्ण हैं
2029 का लोकसभा चुनाव अभी काफी दूर है। अगले तीन वर्षों में देश की राजनीति में कई बदलाव संभव हैं। आर्थिक परिस्थितियां बदल सकती हैं, नए मुद्दे सामने आ सकते हैं, राज्यों के चुनाव राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं और राजनीतिक गठबंधन भी बदल सकते हैं।
इसलिए वर्तमान सर्वे को भविष्यवाणी के बजाय राजनीतिक संकेतक के रूप में देखना अधिक उचित होगा।
NDA के लिए संदेश साफ है—जनता का भरोसा अभी मजबूत है, लेकिन उसमें कुछ कमी के संकेत भी दिखाई दे रहे हैं। भाजपा की सबसे बड़ी ताकत प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता है, लेकिन शिक्षा, रोजगार और युवाओं से जुड़े सवालों को नजरअंदाज करना भविष्य में महंगा पड़ सकता है।
विपक्ष के लिए भी संदेश उतना ही स्पष्ट है। कांग्रेस की स्थिति में सुधार के संकेत जरूर हैं, लेकिन NDA को चुनौती देने के लिए केवल सीटों में अनुमानित बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं होगी। विपक्ष को संगठन, नेतृत्व, गठबंधन और वैकल्पिक नीतियों के स्तर पर लंबी तैयारी करनी होगी।
लोकतंत्र में सर्वे जनता के मूड की एक झलक देते हैं, अंतिम फैसला नहीं। असली फैसला चुनाव के दिन मतदाता ही करता है। इसलिए आज NDA की बढ़त दिखाई दे रही है, लेकिन 2029 की राजनीतिक कहानी अभी लिखी जानी बाकी है।

