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नर्मदापुरम · 10 मिनट पहले

नशामुक्त मध्यप्रदेश की ओर बढ़ते कदम, जनभागीदारी और पुनर्वास पर सरकार का जोर

मध्यप्रदेश में नशामुक्त भारत अभियान को गति देने के लिए जागरूकता, उपचार और पुनर्वास पर जोर दिया जा रहा है। प्रदेश में 213 संस्थाएं और 12 हजार मास्टर वॉलंटियर्स जुड़े हैं।

दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 10 मिनट पहले
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नशामुक्त मध्यप्रदेश की ओर बढ़ते कदम, जनभागीदारी और पुनर्वास पर सरकार का जोर

नर्मदापुरम। मध्यप्रदेश में नशे के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ नशे की चपेट में आए लोगों को उपचार और पुनर्वास उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संचालित नशामुक्त भारत अभियान के तहत प्रदेश में जनभागीदारी, जागरूकता, उपचार और पुनर्वास को अभियान का प्रमुख आधार बनाया गया है।

राज्य सरकार का मानना है कि नशे की समस्या केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहती, बल्कि इसका असर परिवार, आर्थिक स्थिति और सामाजिक जीवन पर भी पड़ता है। ऐसे में युवाओं को नशे से दूर रखने और प्रभावित लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सरकारी विभागों के साथ सामाजिक संस्थाओं और नागरिकों की भागीदारी बढ़ाई जा रही है।

प्रदेश में 213 पंजीकृत संस्थाएं कर रहीं काम

नशे के दुष्परिणामों के प्रति लोगों को जागरूक करने और प्रभावित व्यक्तियों एवं उनके परिवारों तक सहायता पहुंचाने के लिए प्रदेश में 213 पंजीकृत संस्थाएं कार्यरत हैं। इनके माध्यम से जागरूकता कार्यक्रमों के साथ नशामुक्ति और पुनर्वास से जुड़ी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।

अभियान में शिक्षण संस्थानों, सामाजिक एवं स्वयंसेवी संगठनों, धार्मिक संस्थाओं, युवाओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को भी जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

मध्यप्रदेश के प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान

नशामुक्त भारत अभियान के तहत मध्यप्रदेश में किए गए कार्यों को राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला है। वर्ष 2023-24 की संस्थागत पुरस्कार श्रेणी में शहीद भगत सेवा समिति, रीवा को तथा व्यक्तिगत श्रेणी में राजीव तिवारी, मुक्ति नशामुक्ति केंद्र, भोपाल को सम्मानित किया गया।

13 अगस्त 2025 को भोपाल के रवीन्द्र भवन में आयोजित राज्य स्तरीय नशामुक्ति शपथ ग्रहण समारोह में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों एवं संस्थाओं को सम्मानित किया गया।

उपचार और पुनर्वास के लिए केंद्र संचालित

नशामुक्ति अभियान में जागरूकता के साथ उपचार और पुनर्वास पर भी ध्यान दिया जा रहा है। प्रदेश में 13 नशामुक्ति सह पुनर्वास केंद्र (IRCA) संचालित हैं। इसके अलावा 7 आउटरीच एंड ड्रॉप इन सेंटर (ODIC) और 3 कम्युनिटी बेस्ड पीयर-लेड इंटरवेंशन सेंटर (CPLI) भी संचालित किए जा रहे हैं।

इन केंद्रों के माध्यम से नशे से प्रभावित लोगों तक पहुंचकर उन्हें उपचार, परामर्श और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सहयोग से नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्रों के संचालन और विस्तार के लिए अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है।

12 हजार मास्टर वॉलंटियर्स अभियान से जुड़े

नशे के खिलाफ जनजागरूकता को स्थानीय स्तर तक पहुंचाने के लिए प्रदेश में करीब 12 हजार मास्टर वॉलंटियर्स तैयार किए गए हैं। ये स्वयंसेवक लोगों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने और अभियान से संबंधित गतिविधियों में सहभागिता बढ़ाने का काम कर रहे हैं।

अभियान में स्वयंसेवकों की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि नशामुक्ति के लिए परिवार और समुदाय की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है।

युवाओं और विद्यार्थियों पर विशेष फोकस

नशामुक्त भारत अभियान के तहत युवाओं और विद्यार्थियों को विशेष रूप से जागरूक करने के लिए विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए।

अभियान में डिजिटल माध्यम का भी इस्तेमाल किया गया। QR Code के माध्यम से करीब 2.46 लाख ऑनलाइन ई-प्लेज कराए जाने की जानकारी दी गई है।

इसके अलावा विश्व तंबाकू निषेध दिवस, अंतरराष्ट्रीय नशा निवारण दिवस, मद्य निषेध सप्ताह और मद्य निषेध संकल्प दिवस के अवसर पर भी जनजागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं।

पुलिस भी चला रही जागरूकता अभियान

नशे के अवैध कारोबार पर नियंत्रण और जनजागरूकता बढ़ाने में पुलिस की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा “नशे से दूरी है बहुत जरूरी” जैसे अभियानों के माध्यम से लोगों को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

सरकारी विभागों, पुलिस, सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों और नागरिक समाज के बीच समन्वय के जरिए नशे के खिलाफ जागरूकता का वातावरण तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।

सामाजिक भागीदारी पर जोर

सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन कल्याण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा के मार्गदर्शन में नशामुक्ति अभियान में सामाजिक भागीदारी को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। विभाग की ओर से जागरूकता के साथ उपचार और पुनर्वास की व्यवस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।

अभियान में नशे की समस्या से प्रभावित व्यक्ति को केवल उपेक्षा की दृष्टि से देखने के बजाय उसे उपचार, परामर्श और पुनर्वास की जरूरत वाले व्यक्ति के रूप में सहयोग देने पर जोर दिया जा रहा है।

जनभागीदारी से नशामुक्त समाज का लक्ष्य

नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए परिवार, शिक्षक, युवा, सामाजिक संगठन, जनप्रतिनिधि और आम नागरिकों की संयुक्त भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। युवाओं को नशे से दूर रखने के साथ नशे की चपेट में आए लोगों को उपचार और सामाजिक सहयोग उपलब्ध कराना अभियान की प्राथमिकताओं में शामिल है।

सरकार और सामाजिक संस्थाओं के इन प्रयासों का उद्देश्य जागरूकता, उपचार, पुनर्वास और जनभागीदारी के माध्यम से नशे के खिलाफ व्यापक सामाजिक वातावरण तैयार करना है।

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