सरकारी राशि गबन मामले में पूर्व सरपंच को 5 साल की सश्रम कारावास की सजा
इटारसी कोर्ट ने ग्राम पंचायत धुरपन के पूर्व सरपंच रमेश लोखंडे को ₹6.76 लाख सरकारी राशि के गबन मामले में 5 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई।


इटारसी। ग्राम पंचायत धुरपन के पूर्व सरपंच रमेश लोखंडे (55) को सरकारी राशि के गबन के मामले में इटारसी के तृतीय अपर जिला न्यायालय ने 5 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर 2,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना जमा नहीं करने की स्थिति में उसे 3 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
यह फैसला पीठासीन अधिकारी आदित्य रावत की अदालत में सुनाया गया। मामले में शासन की ओर से सीनियर एजीपी राजीव शुक्ला ने पैरवी की और अभियोजन की ओर से 11 गवाह पेश किए गए।
निर्माण कार्य के बिना निकाली गई थी राशि
अभियोजन के अनुसार मामला जनवरी 2012 से मई 2013 के बीच ग्राम पंचायत धुरपन में हुए कथित वित्तीय अनियमितता से जुड़ा है। आरोप था कि धुरपन में सीसी रोड और कलमेसरा में आंगनबाड़ी भवन के निर्माण कार्य कराए बिना ही शासकीय राशि का उपयोग किया गया।
मामले में कुल 6 लाख 76 हजार 990 रुपये की शासकीय राशि के गबन का आरोप लगाया गया था। प्रकरण में पूर्व सरपंच रमेश लोखंडे और तत्कालीन पंचायत सचिव नीलेश महतो के खिलाफ कार्रवाई की गई थी।
धारा 409/34 के तहत दोषी
न्यायालय ने मामले की सुनवाई के बाद पूर्व सरपंच रमेश लोखंडे को भारतीय दंड संहिता की धारा 409/34 के तहत दोषी करार देते हुए 5 वर्ष के सश्रम कारावास और 2,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई।
अर्थदंड जमा नहीं करने पर आरोपी को 3 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
पंचायत सचिव को पहले ही हो चुकी है सजा
इस मामले में तत्कालीन पंचायत सचिव नीलेश महतो भी सह-आरोपी थे। उन्हें न्यायालय द्वारा पूर्व में ही 10 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई जा चुकी है।
वहीं, पूर्व सरपंच रमेश लोखंडे पिछले करीब एक वर्ष से जेल में है। अदालत के आदेश के अनुसार जेल में बिताई गई अवधि को उसकी सजा में समायोजित किया जाएगा। सजा सुनाए जाने के बाद उसे जिला जेल नर्मदापुरम भेज दिया गया।
जिला पंचायत के निर्देश पर दर्ज हुई थी FIR
जानकारी के अनुसार यह कार्रवाई जिला पंचायत नर्मदापुरम के निर्देश पर जनपद पंचायत केसला द्वारा कराई गई कार्रवाई के बाद आगे बढ़ी। मामले में पथरौटा थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। पुलिस जांच और न्यायालय में चली सुनवाई के बाद अब अदालत ने पूर्व सरपंच को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है।
अभियोजन पक्ष की ओर से मामले को साबित करने के लिए कुल 11 गवाह न्यायालय के समक्ष पेश किए गए।

