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नर्मदापुरम · 1 घंटे पहले

घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं और जरूरतमंद बालिकाओं को मिला कौशल प्रशिक्षण

नर्मदापुरम में वन स्टॉप सेंटर ने घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं और जरूरतमंद बालिकाओं को ITI में प्रवेश दिलाया। फैशन डिजाइनिंग, COPA और स्टेनोग्राफी का प्रशिक्षण मिलेगा।

दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 1 घंटे पहले
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घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं और जरूरतमंद बालिकाओं को मिला कौशल प्रशिक्षण

नर्मदापुरम। महिला एवं बाल विकास विभाग की संयुक्त संचालक श्रीमती तृप्ति त्रिपाठी के मार्गदर्शन और सतत प्रयासों से वन स्टॉप सेंटर नर्मदापुरम द्वारा घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं एवं गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाली बालिकाओं को कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने की पहल की गई है। इसके तहत पात्र महिलाओं एवं बालिकाओं को शासकीय संभागीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (ITI) नर्मदापुरम तथा औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान माखन नगर में विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिलाया गया।

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इन प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में फैशन डिजाइनिंग, COPA और स्टेनोग्राफी शामिल हैं। प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाओं एवं बालिकाओं को रोजगार और स्वरोजगार के लिए आवश्यक कौशल विकसित करने का अवसर मिलेगा।

प्रशिक्षणार्थियों को नियमित प्रशिक्षण लेने की समझाइश

ITI में प्रवेश लेने वाले चयनित अभ्यर्थियों को संयुक्त संचालक श्रीमती तृप्ति त्रिपाठी ने संबोधित किया। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों को प्रशिक्षण को गंभीरता से लेने तथा नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित रहने की समझाइश दी।

उन्होंने कहा कि कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से महिलाएं और बालिकाएं अपने पैरों पर खड़े होने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद स्वरोजगार शुरू करने के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया गया।

वन स्टॉप सेंटर का किया निरीक्षण

संयुक्त संचालक श्रीमती तृप्ति त्रिपाठी ने वन स्टॉप सेंटर नर्मदापुरम का निरीक्षण भी किया। इस दौरान उन्होंने केंद्र में उपलब्ध व्यवस्थाओं की जानकारी ली तथा वहां उपस्थित हितग्राहियों से चर्चा की।

उन्होंने हितग्राहियों की काउंसलिंग करते हुए उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की। महिलाओं को उपलब्ध शासकीय योजनाओं एवं सहायता के माध्यम से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

इस पहल का उद्देश्य घरेलू हिंसा से प्रभावित महिलाओं और आर्थिक रूप से कमजोर बालिकाओं को कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनने के अवसर प्रदान करना है। फैशन डिजाइनिंग, COPA और स्टेनोग्राफी जैसे रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के माध्यम से प्रशिक्षणार्थियों को भविष्य में रोजगार एवं स्वरोजगार के नए विकल्प मिल सकेंगे।

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