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मध्यप्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीदी ₹2700 प्रति क्विंटल पर, किसानों को कर्ज चुकाने में भी राहत

मध्यप्रदेश में किसानों के लिए बड़ा ऐलान। गेहूं की सरकारी खरीदी ₹2700 प्रति क्विंटल पर होगी। कृषि ऋण चुकाने की समयसीमा जून-जुलाई तक बढ़ाने की बात कही गई है।

दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · अभी अभी
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मध्यप्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीदी ₹2700 प्रति क्विंटल पर, किसानों को कर्ज चुकाने में भी राहत

भोपाल। मध्यप्रदेश में किसानों के लिए सरकार ने गेहूं की सरकारी खरीदी और कृषि ऋण को लेकर अहम घोषणाएं की हैं। प्रदेश में गेहूं की खरीदी 2700 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर किए जाने की बात कही गई है। इसके साथ ही खाद और बीज के लिए लिए गए कृषि ऋण को चुकाने की समयसीमा में भी किसानों को राहत दी गई है।

अब किसानों को 31 मार्च की निर्धारित समयसीमा के बजाय जून-जुलाई में शून्य प्रतिशत ब्याज पर कृषि ऋण चुकाने की सुविधा दिए जाने की बात कही गई है। सरकार का कहना है कि किसानों को राहत देने के साथ खेती की लागत कम करना, सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना और किसानों की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करना प्राथमिकता है।

गेहूं की खरीद 2700 रुपये प्रति क्विंटल पर

प्रदेश में किसानों से गेहूं की सरकारी खरीदी 2700 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किए जाने का ऐलान किया गया है। सरकार के मुताबिक इस वर्ष प्रदेश में करीब 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी हुई है।

सरकार का फोकस केवल समर्थन मूल्य के जरिए किसानों को राहत देने पर नहीं है, बल्कि खेती की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भी योजनाएं लागू करने पर है।

जून-जुलाई तक बिना ब्याज चुका सकेंगे कृषि ऋण

खाद और बीज की जरूरतों के लिए किसानों द्वारा लिए जाने वाले कृषि ऋण को लेकर भी राहत की घोषणा की गई है। किसानों को अब 31 मार्च के बजाय जून-जुलाई में अपना कृषि ऋण चुकाने का अवसर मिलेगा।

इस दौरान किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज की सुविधा मिलने की बात कही गई है। सरकार के इस फैसले से किसानों पर फसल के दौरान कर्ज चुकाने का दबाव कम होने की उम्मीद है।

किसानों को दिन में बिजली देने की तैयारी

गेहूं और चने जैसी फसलों के लिए सिंचाई की जरूरत को देखते हुए किसानों को दिन के समय बिजली उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

सरकार का मानना है कि दिन में बिजली मिलने से किसानों को रात के समय खेतों में सिंचाई करने की परेशानी से राहत मिलेगी। इससे खेती में सुरक्षा और सुविधा दोनों बढ़ने की उम्मीद है।

वहीं प्रदेश में धान की औसत उत्पादकता बढ़ने की भी जानकारी दी गई है। धान की उत्पादकता 32 से बढ़कर 36 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंचने की बात कही गई है।

खेती के साथ पशुपालन और उद्यानिकी पर जोर

बलराम कृषि महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव किसानों से पारंपरिक खेती के साथ आय के दूसरे साधन अपनाने की अपील कर रहे हैं।

किसानों को पशुपालन, दूध उत्पादन और उद्यानिकी जैसी गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि खेती के साथ अतिरिक्त आय के स्रोत विकसित करने से किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया जा सकता है।

मुख्यमंत्री की ओर से किसानों से अपनी कृषि भूमि नहीं बेचने की अपील भी की जा रही है। सरकार का कहना है कि आधुनिक तकनीक और बेहतर कृषि प्रबंधन के जरिए आने वाले समय में खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।

मशीनों से कम होगी खेती की लागत

खेती में आधुनिक कृषि मशीनों के उपयोग को बढ़ावा देने पर भी सरकार का जोर है। किसानों को ऐसी मशीनों के इस्तेमाल के लिए जागरूक किया जा रहा है, जिससे श्रम लागत और समय दोनों को कम किया जा सके।

इनमें रीपर कम बाइंडर, डीएसआर, हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, स्ट्रॉ रीपर, थ्रेशर और लेजर लैंड लेवलर जैसी मशीनें शामिल हैं।

मशीनों के उपयोग से फसल की बुवाई, कटाई और खेत की तैयारी जैसे काम कम समय में पूरे किए जा सकते हैं। इससे किसानों की उत्पादन लागत घटाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

प्राकृतिक और जैविक खेती को भी बढ़ावा

सरकार किसानों को प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर भी प्रोत्साहित कर रही है। इसके साथ आधुनिक कृषि तकनीक को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है।

सरकार का उद्देश्य किसानों को ऐसी कृषि व्यवस्था से जोड़ना है, जिसमें कम लागत, बेहतर उत्पादन और खेती के साथ अतिरिक्त आय पर एक साथ काम किया जा सके।

कुल मिलाकर गेहूं के समर्थन मूल्य, कृषि ऋण में राहत, दिन में बिजली और आधुनिक कृषि मशीनों को बढ़ावा देने के फैसलों के जरिए सरकार किसानों की लागत घटाने और उनकी आय बढ़ाने की दिशा में काम करने का दावा कर रही है।

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