MP हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: सिमरोल-चोरल के जंगलों में ढाई लाख पेड़ों की कटाई पर रोक, रेलवे और वन विभाग को नोटिस
इंदौर के सिमरोल, चोरल और बड़वाह के जंगलों में रेलवे ट्रैक निर्माण के लिए ढाई लाख से अधिक पेड़ों की कटाई पर MP हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगाई। अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी।


इंदौर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में पर्यावरण संरक्षण को लेकर महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अदालत ने सिमरोल, चोरल और बड़वाह क्षेत्र के जंगलों में रेलवे ट्रैक निर्माण के लिए प्रस्तावित ढाई लाख से अधिक पेड़ों की कटाई पर अंतरिम रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोकजे और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगल पीठ ने मामले में वन विभाग और रेलवे को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। प्रकरण की अगली सुनवाई 30 नवंबर को निर्धारित की गई है।
यह मामला रेलवे ट्रैक निर्माण के लिए बदले गए डिजाइन और उससे प्रभावित होने वाले विशाल वन क्षेत्र से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने आशंका जताई है कि बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर असर पड़ सकता है।
वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर खतरे की आशंका
याचिकाकर्ता करण बैरागी की ओर से अधिवक्ता मनीष यादव ने अदालत में पक्ष रखते हुए बताया कि प्रस्तावित रेलवे ट्रैक का क्षेत्र जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। यहां बाघ, तेंदुए, चीतल, सांभर, लोमड़ी, मोर और जंगली खरगोश सहित कई वन्यजीव पाए जाते हैं।
याचिका में चोरल के जंगलों के पर्यावरणीय महत्व का उल्लेख करते हुए कहा गया कि ये जंगल निमाड़ क्षेत्र से आने वाली गर्म हवाओं को रोकने और इंदौर सहित आसपास के इलाकों के तापमान को नियंत्रित रखने में भूमिका निभाते हैं। ऐसे में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई से वन्यजीवों के आवास और स्थानीय जलवायु पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
रेलवे ट्रैक के डिजाइन में बदलाव पर उठे सवाल
याचिका में रेलवे परियोजना के प्रारंभिक और संशोधित डिजाइन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार, शुरुआती डिजाइन में करीब 40 से 50 हजार पेड़ों के प्रभावित होने का अनुमान था। लेकिन चढ़ाई कम करने और सिमरोल से बड़वाह के बीच यात्रा में 30 से 40 मिनट का समय बचाने के उद्देश्य से डिजाइन में बदलाव किया गया।
दावा किया गया है कि संशोधित डिजाइन के कारण पेड़ों की कटाई का दायरा बढ़कर ढाई लाख से अधिक हो गया। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि इंदौर सहित मालवा क्षेत्र पहले ही बढ़ती गर्मी की चुनौती का सामना कर रहा है। ऐसे में बड़े पैमाने पर वन क्षेत्र के नष्ट होने से पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो सकता है।

बाघ और तेंदुओं की मौजूदगी के प्रमाण का हवाला
याचिका में क्षेत्र की जैव विविधता से जुड़े आंकड़ों का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि इलाके में बाघों के 37 और तेंदुओं की मौजूदगी के प्रमाण पगमार्क के रूप में दर्ज किए गए हैं।
इसके अलावा, पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण सलाई के पेड़ों की संख्या में कमी और स्थानीय वृक्ष प्रजातियों के दुर्लभ होने का मुद्दा भी उठाया गया। याचिका में दावा किया गया कि मालवा क्षेत्र का लगभग आधा वन क्षेत्र पहले ही नष्ट हो चुका है, जबकि करीब 58 स्थानीय वृक्ष प्रजातियां बेहद दुर्लभ स्थिति में पहुंच गई हैं।
इन दावों के आधार पर अदालत से परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों की विस्तृत जांच कराने की मांग की गई है।
रेलवे और हाईवे परियोजनाओं के दस्तावेज पेश करने की मांग
याचिकाकर्ता ने अदालत से इंदौर-खंडवा रेलवे परियोजना और संबंधित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के सभी जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत कराने का अनुरोध किया है। साथ ही, मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पर्यावरण एवं वन्यजीव विशेषज्ञों की स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग भी की गई है।
30 नवंबर को होगी अगली सुनवाई
मामले की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने प्रस्तावित पेड़ कटाई पर अंतरिम रोक लगाते हुए रेलवे और वन विभाग को नोटिस जारी किए हैं। अब संबंधित विभागों को अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखना होगा।
अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी। इस मामले में आगे होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट होगा कि रेलवे परियोजना के डिजाइन, वन क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव और प्रस्तावित पेड़ कटाई को लेकर अदालत क्या रुख अपनाती है। फिलहाल अंतरिम रोक से क्षेत्र के पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण हो गए हैं।
