इंदौर में ‘द सेंसेरी चाइल्ड’ डॉक्यूमेंट्री लॉन्च, ऑटिज्म और न्यूरोडाइवर्जेंट बच्चों को समझने पर जोर
इंदौर में ‘द सेंसेरी चाइल्ड’ डॉक्यूमेंट्री लॉन्च हुई। जानें ऑटिज्म और न्यूरोडाइवर्जेंट बच्चों के व्यवहार को समझने, समय पर पहचान और विशेषज्ञ मार्गदर्शन के महत्व पर डॉक्टरों ने क्या कहा।


इंदौर। बदलती जीवनशैली, परिवारों की संरचना में बदलाव और बच्चों के व्यवहार से जुड़ी चुनौतियों को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है। इसी दिशा में इंदौर के डॉक्टरों और विशेषज्ञों ने ऑटिज्म और न्यूरोडाइवर्जेंट बच्चों के व्यवहार तथा उनकी संवेदी जरूरतों पर केंद्रित डॉक्यूमेंट्री फिल्म ‘द सेंसेरी चाइल्ड’ तैयार की है।
इंदौर के एक होटल में आयोजित कार्यक्रम में डॉक्यूमेंट्री फिल्म का लॉन्च किया गया। फिल्म का शुभारंभ डॉ. प्रियंका गर्ग ने किया। कार्यक्रम में ऑटिज्म से जुड़ी चुनौतियों से जूझ रहे बच्चों और उनके माता-पिता ने भी हिस्सा लिया और अपनी व्यक्तिगत यात्राओं व अनुभवों को साझा किया।
कार्यक्रम में डॉक्टरों ने इस बात पर जोर दिया कि बच्चों के असामान्य या अलग व्यवहार को केवल जिद, शरारत या अनुशासन की समस्या समझने के बजाय उसके पीछे छिपी संभावित संवेदी, भावनात्मक या विकासात्मक जरूरतों को समझना जरूरी है।
समय पर पहचान और विशेषज्ञ मार्गदर्शन पर जोर
डॉ. प्रियंका गर्ग और डॉ. सुभाष गर्ग के अनुसार, ‘द सेंसेरी चाइल्ड’ ऑटिज्म और न्यूरोडाइवर्जेंट बच्चों के व्यवहार तथा संवेदी जरूरतों को समझने पर केंद्रित डॉक्यूमेंट्री है।
डॉक्टरों ने बताया कि कई माता-पिता यह मान लेते हैं कि ऑटिज्म से जुड़े लक्षणों में सुधार संभव नहीं है। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार समय पर पहचान, उचित मार्गदर्शन और जरूरत के अनुसार थैरेपी एवं अन्य सहयोग से बच्चों के विकास तथा दैनिक जीवन की क्षमताओं में सुधार की दिशा में काम किया जा सकता है।
डॉक्यूमेंट्री के लॉन्च कार्यक्रम में ऐसे कई बच्चे अपने माता-पिता के साथ पहुंचे, जिनके परिवारों ने उपचार, थैरेपी, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और निरंतर प्रयासों के अपने अनुभव साझा किए।
व्यवहार को समस्या नहीं, संकेत के रूप में समझने का संदेश
डॉक्यूमेंट्री में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि बच्चे के व्यवहार को केवल बदलने या रोकने की कोशिश करने के बजाय उसके पीछे के कारण को समझना जरूरी है।
कई बार किसी बच्चे का चिड़चिड़ापन, किसी आवाज या स्पर्श के प्रति असहजता, किसी गतिविधि से बचना या संवाद करने का अलग तरीका माता-पिता को सामान्य अनुशासन की समस्या लग सकता है। डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि ऐसे व्यवहारों के पीछे बच्चे की संवेदी, भावनात्मक या विकासात्मक जरूरतें भी हो सकती हैं।
इसलिए बच्चे के व्यवहार को समझकर उसके अनुरूप सहयोग और विशेषज्ञ सलाह लेने की दिशा में कदम बढ़ाना महत्वपूर्ण हो सकता है।
बच्चों और माता-पिता की कहानियों ने दिया प्रेरक संदेश
फिल्म के लॉन्च कार्यक्रम में शामिल बच्चों और उनके माता-पिता ने अपनी यात्राओं और अनुभवों को साझा किया। परिवारों ने बताया कि समय पर पहचान, विशेषज्ञों की सलाह, थैरेपी, परिवार के सहयोग और लगातार प्रयासों के बाद बच्चों के व्यवहार, संवाद और दैनिक जीवन से जुड़ी क्षमताओं में सकारात्मक बदलाव देखने को मिले।
कार्यक्रम में बच्चों की मौजूदगी ने यह संदेश भी दिया कि ऑटिज्म से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद बच्चों की अपनी क्षमताएं और प्रतिभाएं होती हैं। सही सहयोग और अनुकूल वातावरण उनके विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
माता-पिता के लिए जागरूकता सबसे जरूरी
डॉ. प्रियंका गर्ग ने कहा कि बच्चे के व्यवहार को समझना उसके विकास की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम है। माता-पिता को बच्चे के व्यवहार को केवल समस्या मानने के बजाय यह समझने की कोशिश करनी चाहिए कि बच्चा अपने व्यवहार के माध्यम से क्या बताना चाहता है।
उन्होंने कहा कि हर व्यवहार के पीछे कोई न कोई कारण हो सकता है और बच्चे के व्यवहार को बदलने से पहले उसे समझने की कोशिश करना जरूरी है। उनके अनुसार, परिवार और समाज की जागरूकता बच्चों के बेहतर विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि बच्चों को केवल उनके व्यवहार के आधार पर देखने के बजाय उनकी संवेदी जरूरतों, भावनाओं, क्षमताओं और व्यक्तिगत विशेषताओं को समझना चाहिए।
‘व्यवहार के पीछे भी एक बच्चा है’
‘द सेंसेरी चाइल्ड’ के जरिए ऑटिज्म और न्यूरोडाइवर्जेंस को लेकर समाज में बेहतर समझ विकसित करने का प्रयास किया गया है। डॉक्यूमेंट्री का मुख्य संदेश यही है कि बच्चे के व्यवहार को केवल समस्या के रूप में देखने के बजाय उसके पीछे मौजूद बच्चे की जरूरतों और भावनाओं को समझा जाए।
डॉक्टरों के अनुसार, सही मार्गदर्शन, विशेषज्ञ सहयोग और परिवार के निरंतर समर्थन से बच्चों के विकास की दिशा में सकारात्मक प्रयास किए जा सकते हैं।
डॉक्यूमेंट्री के लॉन्च कार्यक्रम में डॉ. सुभाष गर्ग, डॉ. प्रियंका गर्ग, डॉ. शुभांगिनी, डॉ. ऋषिकेश, डॉ. किशन, डॉ. अमित, डॉ. राजा, डॉ. जया पॉल, डॉ. ध्रुव दवे, डॉ. राशि गुप्ता, डॉ. अनुशिखा मौर्या, डॉ. गायत्री जैरिया और डॉ. मेघा परमार सहित अन्य विशेषज्ञ मौजूद रहे।

