मध्यप्रदेश में पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई के नियम बदले, पदीय दायित्व से जुड़े मामलों में अभियोजन स्वीकृति जरूरी
मध्यप्रदेश में पदीय दायित्व से जुड़े मामलों में राजपत्रित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई से पहले सरकार की अभियोजन स्वीकृति जरूरी होगी। PHQ ने जिला इकाइयों को निर्देश दिए।


भोपाल। मध्यप्रदेश में सरकारी कामकाज और पदीय दायित्व से जुड़ी शिकायतों को लेकर राजपत्रित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ सीधे आपराधिक कार्रवाई करना अब आसान नहीं होगा। पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने प्रदेश की सभी जिला पुलिस इकाइयों को नई गाइडलाइन के तहत कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं।
नई व्यवस्था के अनुसार, यदि किसी राजपत्रित पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकायत उसके पदीय दायित्व या शासकीय कर्तव्य के निर्वहन से जुड़ी है, तो एफआईआर अथवा न्यायिक कार्रवाई आगे बढ़ाने से पहले राज्य सरकार से अभियोजन की पूर्व स्वीकृति लेना जरूरी होगा।
केवल शिकायत के आधार पर सीधे कार्रवाई नहीं
पुलिस मुख्यालय की अपराध अनुसंधान शाखा की ओर से जारी निर्देशों के मुताबिक, केवल शिकायत मिलने के आधार पर संबंधित पुलिस अधिकारी के खिलाफ सीधे आपराधिक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
अभियोजन की स्वीकृति से पहले शासन स्तर पर यह परीक्षण किया जाएगा कि शिकायत वास्तव में अधिकारी द्वारा पद के दुरुपयोग से संबंधित है या फिर उसके शासकीय कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान लिया गया कोई निर्णय या की गई कार्रवाई इसका आधार है।
यदि मामला अधिकारी के पदीय दायित्व और शासकीय कर्तव्य से जुड़ा पाया जाता है, तो अदालत द्वारा संज्ञान लिए जाने से पहले शासन की अनुमति आवश्यक होगी।
ग्वालियर हाईकोर्ट के आदेश का हवाला
पुलिस मुख्यालय ने अपनी गाइडलाइन में ग्वालियर हाईकोर्ट की खंडपीठ के 19 जुलाई 2026 के आदेश का भी हवाला दिया है।
बताया गया है कि संबंधित मामले में पूर्व अभियोजन स्वीकृति के बिना दर्ज शिकायत के आधार पर की गई कार्रवाई को अदालत ने निरस्त कर दिया था। इसी न्यायिक दृष्टांत को ध्यान में रखते हुए PHQ ने प्रदेश की सभी जिला इकाइयों को आदेश का गहन अध्ययन करने और जरूरत के अनुसार संबंधित न्यायिक दृष्टांतों का उपयोग करने के निर्देश दिए हैं।
दुर्भावनापूर्ण शिकायतों से सुरक्षा का तर्क
नई व्यवस्था को पुलिस अधिकारियों को ड्यूटी के दौरान की जाने वाली दुर्भावनापूर्ण या बेबुनियाद शिकायतों से सुरक्षा देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कई बार उनके द्वारा शासकीय कर्तव्य के दौरान लिए गए निर्णयों या की गई कार्रवाई को लेकर शिकायतें सामने आती हैं। नई प्रक्रिया में ऐसे मामलों में पहले यह निर्धारित किया जाएगा कि आरोप वास्तव में पद के दुरुपयोग से जुड़े हैं या अधिकारी ने अपने आधिकारिक दायित्व के तहत कार्रवाई की थी।
जवाबदेही को लेकर भी उठ सकते हैं सवाल
हालांकि, इस व्यवस्था के साथ पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर सवाल भी उठ सकते हैं। यदि पदीय कर्तव्य से जुड़े मामलों में सरकार की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य होगी, तो शिकायतकर्ता के लिए न्यायिक प्रक्रिया का शुरुआती चरण अधिक जटिल हो सकता है।
दूसरी ओर, शासन की पूर्व अनुमति की व्यवस्था का उद्देश्य अधिकारियों को उनके वैधानिक शासकीय कार्यों के कारण दुर्भावनापूर्ण मुकदमों से सुरक्षा देना भी माना जा रहा है।
फिलहाल PHQ ने सभी जिला पुलिस इकाइयों को नई व्यवस्था के अनुरूप कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। शिकायतों की प्रकृति और संबंधित अधिकारी के पदीय दायित्व के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
