ब्रेकिंग
शनिवार, 12 सितंबर 2026
Denva Post
सभी खबरें
भोपाल · 16 मिनट पहले

RGPV में बदलने जा रही परीक्षा मूल्यांकन व्यवस्था, अब कंप्यूटर स्क्रीन पर जांची जाएंगी उत्तरपुस्तिकाएं

RGPV में परीक्षा मूल्यांकन की व्यवस्था डिजिटल होने जा रही है। करीब 12,500 MCA विद्यार्थियों पर पायलट प्रोजेक्ट शुरू हुआ है। उत्तरपुस्तिकाएं स्कैन होंगी और रीवैल्यूएशन भी तेज होगा।

दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 16 मिनट पहले
शेयर
RGPV में बदलने जा रही परीक्षा मूल्यांकन व्यवस्था, अब कंप्यूटर स्क्रीन पर जांची जाएंगी उत्तरपुस्तिकाएं

भोपाल। राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) में परीक्षा मूल्यांकन की पारंपरिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अब उत्तरपुस्तिकाओं को मूल्यांकन केंद्रों तक पहुंचाकर कागज पर जांचने के बजाय स्कैन कर डिजिटल रूप में मूल्यांकनकर्ता तक पहुंचाया जाएगा। मूल्यांकनकर्ता कंप्यूटर स्क्रीन पर उत्तरपुस्तिका की डिजिटल कॉपी देखकर प्रश्नवार अंक दर्ज करेगा।

नई व्यवस्था में दर्ज किए गए अंक सीधे विश्वविद्यालय के रिजल्ट सिस्टम में डिजिटल रूप से सुरक्षित हो जाएंगे। इससे मूल्यांकन से लेकर रिजल्ट तैयार करने तक की प्रक्रिया में कई मैनुअल चरण कम होने की उम्मीद है।

इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा उन विद्यार्थियों को मिलने की उम्मीद है, जो कम अंक आने के बाद री-टोटलिंग या रीवैल्यूएशन के लिए आवेदन करते हैं। विश्वविद्यालय की कोशिश है कि डिजिटल प्रक्रिया के कारण रीवैल्यूएशन का परिणाम भी पहले की तुलना में कम समय में जारी किया जा सके।

12.5 हजार MCA विद्यार्थियों पर पहला प्रयोग

RGPV ने नई डिजिटल मूल्यांकन व्यवस्था का फिलहाल MCA के करीब 12,500 विद्यार्थियों की उत्तरपुस्तिकाओं पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर प्रयोग शुरू किया है।

यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो भविष्य में इसे विश्वविद्यालय के अन्य पाठ्यक्रमों की परीक्षाओं में भी लागू किया जा सकता है। ऐसे में RGPV से संबद्ध कॉलेजों के बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की परीक्षा और मूल्यांकन प्रक्रिया में बदलाव देखने को मिलेगा।

बारकोड से होगी उत्तरपुस्तिका की पहचान

नई व्यवस्था में प्रत्येक उत्तरपुस्तिका को एक यूनिक बारकोड दिया जाएगा। कॉपी स्कैन होने के बाद उसकी डिजिटल कॉपी मूल्यांकनकर्ता के कंप्यूटर सिस्टम पर उपलब्ध होगी।

इस प्रक्रिया में विद्यार्थी की पहचान को गोपनीय रखने में भी मदद मिलेगी। मूल्यांकनकर्ता को स्क्रीन पर उत्तरपुस्तिका की डिजिटल कॉपी दिखाई देगी और वह प्रत्येक प्रश्न के लिए निर्धारित अंक सीधे सिस्टम में दर्ज कर सकेगा।

अंक दर्ज होते ही उनका डिजिटल रिकॉर्ड विश्वविद्यालय के सुरक्षित डेटाबेस में चला जाएगा।

एक बार दर्ज अंक से तैयार होगा रिजल्ट

मौजूदा व्यवस्था में परीक्षा के बाद अंकों को अलग-अलग स्तरों पर दर्ज करने और उनका मिलान करने की जरूरत होती है। नई डिजिटल प्रणाली में मूल्यांकन के दौरान दर्ज अंक सीधे डेटाबेस में सुरक्षित रहेंगे।

इसी डिजिटल डेटा का इस्तेमाल आगे रिजल्ट, टीआर शीट और डिजिटल मार्कशीट तैयार करने में किया जा सकेगा। इससे एक ही अंक को अलग-अलग स्तर पर दोबारा दर्ज करने की जरूरत कम होगी।

इससे अंक दर्ज करने या जोड़ने में होने वाली मानवीय त्रुटियों को कम करने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।

रीवैल्यूएशन भी होगा डिजिटल

नई व्यवस्था में रिजल्ट जारी होने के बाद री-टोटलिंग और रीवैल्यूएशन की प्रक्रिया को भी इसी डिजिटल सिस्टम से जोड़े जाने की तैयारी है।

उत्तरपुस्तिका पहले से डिजिटल रूप में उपलब्ध होने के कारण उसे दोबारा जांच के लिए भेजने की पारंपरिक प्रक्रिया कम हो सकती है। इससे रीवैल्यूएशन की प्रक्रिया को तेज करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

इसका सीधा फायदा उन विद्यार्थियों को मिल सकता है, जिनके कम अंक आने के कारण उन्हें बैक के साथ अगले सेमेस्टर की परीक्षा में शामिल होना पड़ता है। यदि रीवैल्यूएशन का परिणाम समय पर जारी होता है तो विद्यार्थियों को लंबे इंतजार से राहत मिल सकती है।

रिजल्ट में देरी कम करने की कोशिश

मैनुअल व्यवस्था में उत्तरपुस्तिकाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने, मूल्यांकन कराने, टोटलिंग करने और फिर अंकों को रिजल्ट सिस्टम में दर्ज करने में काफी समय लगता है।

नई डिजिटल व्यवस्था में इन चरणों को कम करने की कोशिश की जा रही है। उत्तरपुस्तिका की स्कैन कॉपी सीधे मूल्यांकनकर्ता तक पहुंचेगी और मूल्यांकन के दौरान दर्ज अंक डिजिटल सिस्टम में सुरक्षित होते जाएंगे।

विश्वविद्यालय को उम्मीद है कि इससे रिजल्ट जारी करने में तेजी, रिकॉर्ड की बेहतर सुरक्षा और रीवैल्यूएशन प्रक्रिया में सुधार किया जा सकेगा।

पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा तो दूसरे पाठ्यक्रमों में भी विस्तार

फिलहाल यह व्यवस्था MCA के करीब 12,500 विद्यार्थियों की उत्तरपुस्तिकाओं के साथ आजमाई जा रही है। पायलट प्रोजेक्ट के परिणामों के आधार पर विश्वविद्यालय आगे इसे अन्य पाठ्यक्रमों में लागू करने पर निर्णय ले सकता है।

यदि यह व्यवस्था सफल रहती है तो RGPV की परीक्षा प्रणाली में यह एक बड़ा डिजिटल बदलाव होगा, जिसमें उत्तरपुस्तिका के मूल्यांकन से लेकर रिजल्ट और रीवैल्यूएशन तक की प्रक्रिया एक ही डिजिटल सिस्टम से संचालित की जा सकेगी।

यह खबर शेयर करें
शेयर
ज़्यादा जानें
झीलें और नदियां
राज्य और स्थानीय प्रशासन
डाक और पैकेज डिलीवरी