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देनवा एक्सक्लूसिव · 1 मिनट पहले

क्या 'सांदीपनि' नाम बदलते ही बदल गए नियम? सीएम राइज स्कूलों में चयन प्रक्रिया से समझौता, प्रदेश में शिक्षकों के सीधे मर्जर पर उठा बवंडर

सीएम राइज से सांदीपनि विद्यालयों में शिफ्ट किए गए शिक्षकों की पदस्थापना प्रक्रिया पर सवाल। 2021 में चयन परीक्षा,2026 में काउंसलिंग व्यवस्था क्यों?

दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 1 मिनट पहले
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क्या 'सांदीपनि' नाम बदलते ही बदल गए नियम? सीएम राइज स्कूलों में चयन प्रक्रिया से समझौता, प्रदेश में शिक्षकों के सीधे मर्जर पर उठा बवंडर

मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी 'सीएम राइज योजना'—जिसे अब 'सांदीपनि विद्यालय' के नाम से भी संचालित/पुनर्नामित किया जा रहा है—शिक्षा व्यवस्था को अंतर्राष्ट्रीय मानकों पर खड़ा करने के दावों के साथ शुरू की गई थी। इस योजना की मूल आत्मा यह थी कि इन विद्यालयों में अध्यापन का जिम्मा केवल उन्हीं शिक्षकों के पास होगा जो कड़ी लिखित परीक्षा, पेडागॉजी मूल्यांकन और मैरिट प्रक्रिया को पार कर चुके हों।

लेकिन 15 सितंबर 2026 को लोक शिक्षण संचालनालय (DPI), भोपाल द्वारा जारी नए पत्र और शिक्षकों के सीधे मर्जर ने एक बड़ा प्रशासनिक विवाद खड़ा कर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या योजना का नाम या स्वरूप बदलने की आड़ में शिक्षकों की चयन प्रक्रिया और गुणवत्ता के मूल मानकों को शिथिल कर दिया गया है? बिना लिखित परीक्षा और बिना मेरिट पास किए कैंपस शालाओं के शिक्षकों को इन हाई-टेक विद्यालयों में अध्यापन की खुली छूट क्यों दी जा रही है?

2021 का मूल ब्लूप्रिंट: बिना 50% अंक और परीक्षा के प्रवेश पूरी तरह बंद

25 अगस्त 2021 को जब प्रदेश में 255 सर्वसुविधा युक्त सीएम राइज स्कूलों के गठन का विज्ञापन जारी हुआ था, तब चयन व्यवस्था अत्यंत सख्त रखी गई थी।

3 नवंबर 2021 के आधिकारिक पत्र और चयन परीक्षा के मुख्य दिशा-निर्देश स्पष्ट थे:

80 अंकों की लिखित परीक्षा: शिक्षकों के विषय ज्ञान और पेडागॉजी (शिक्षणशास्त्र) के परीक्षण के लिए 80 अंकों की लिखित परीक्षा अनिवार्य थी।

50% न्यूनतम कट-ऑफ: सीएम राइज में पदस्थापना के लिए न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक पाना अनिवार्य शर्त थी।

विमर्श पोर्टल पर अंडरटेकिंग: चयनित विद्यालयों में पहले से पदस्थ शिक्षकों को 11 नवंबर 2021 तक विमर्श पोर्टल पर लिखित सहमति देनी थी कि वे परीक्षा में शामिल होंगे।

अनुत्तीर्ण होने पर निष्कासन: जो शिक्षक परीक्षा में नहीं बैठते या 50% अंक नहीं ला पाते, उनका स्थानांतरण सामान्य शालाओं में किया जाना तय था।

सह-अकादमिक पदों हेतु कठोर मानक: लाइब्रेरियन (B.Lib/M.Lib), खेल (B.P.Ed), संगीत, आईटी (BCA/MCA) और काउंसलर पदों के लिए भी पोर्टफोलियो (10 अंक) तथा साक्षात्कार (40 अंक) अनिवार्य किया गया था।

इन नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि नई व्यवस्था के तहत बच्चों को केवल सर्वोत्कृष्ट शैक्षणिक प्रतिभाएं ही पढ़ाएं।

नीतिगत अंतर्विरोध 2021 बनाम 2026
नीतिगत अंतर्विरोध 2021 बनाम 2026

2026 का नया आदेश: नियमों में 'चुपचाप' बड़ी शिथिलता

15 सितंबर 2026 को लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी नए निर्देश ने 2021 की उस चयन प्रणाली को पूरी तरह उलट दिया है।

नवनिर्मित भवनों में सीएम राइज (सांदीपनि) विद्यालयों के शिफ्ट होने के बाद जो निकटतम प्राथमिक/माध्यमिक शालाएं (कैंपस-1, कैंपस-2) इनमें मर्ज हुई हैं, उनके शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा की शर्त गायब कर दी गई है।

15 सितंबर 2026 के पत्र की मुख्य विसंगतियां:

परीक्षा खत्म, केवल 'सहमति' काफी: नए पत्र के अनुसार, यदि कैंपस शाला का शिक्षक सीएम राइज (सांदीपनि) में पदस्थ रहने के लिए केवल अपनी सहमति दे देता है, तो उसे सीधे अध्यापन की अनुमति मिल जाएगी। पात्रता सिद्ध करने का कोई प्रावधान नहीं रखा गया है।

काउंसलिंग का उल्टा नियम: 2021 में परीक्षा न पास करने वालों को बाहर भेजने का नियम था, लेकिन 2026 के नए आदेश में काउंसलिंग केवल उन शिक्षकों के लिए 25 सितंबर 2026 तक रखी गई है जो स्वयं बाहर जाना चाहते हैं।

अतिरिक्त पदस्थापना की आड़: नवीन नामांकन और प्री-प्रायमरी पदों की गणना के आधार पर अतिरिक्त शिक्षकों का निर्धारण जिला मॉनिटरिंग कमेटी के जरिए राज्य स्तर पर भेजने की बात कहकर प्रशासनिक भ्रम पैदा किया जा रहा है।

लोक शिक्षण संचालनालय  पत्र
लोक शिक्षण संचालनालय पत्र

प्रदेश में शिक्षकों के सीधे समायोजन से भड़का असंतोष

प्रदेश में कैंपस शालाओं के शिक्षकों को बिना किसी चयन परीक्षा या न्यूनतम कट-ऑफ के सीधे सीएम राइज/सांदीपनि परिसर में मर्ज कर दिया गया है।

यह सीधा विरोधाभास उन सैकड़ों योग्य शिक्षकों के मुंह पर तमाचा है जिन्होंने 2021 में कड़ी लिखित परीक्षा दी, न्यूनतम 50% अंक हासिल किए और पारदर्शी प्रक्रिया से नियुक्ति पाई। जब मूल नियम में बिना परीक्षा पास किए सीएम राइज में पदस्थ रहना असंभव था, तो प्रदेश में 19 शिक्षकों के लिए इस प्रक्रिया को शिथिल करने का अधिकार किस स्तर पर दिया गया?

शिक्षाविदों और प्रतियोगी शिक्षकों का आरोप है कि 'सांदीपनि' नामकरण और कैंपस शिफ्टिंग के नाम पर चयन व्यवस्था में बड़ा प्रशासनिक समझौता किया गया है।

अति-महत्वपूर्ण सवाल जिनका जवाब लोक शिक्षण संचालनालय को देना होगा

क्या नाम बदलते ही गुणवत्ता के मानक बदल गए?

सीएम राइज का नाम 'सांदीपनि' या स्वरूप बदलते ही 2021 के कठोर चयन नियमों को क्यों भुला दिया गया?

मेधावी शिक्षकों के अधिकार पर डाका क्यों?

लिखित परीक्षा पास करके आए शिक्षकों और बिना परीक्षा सीधे मर्ज किए गए शिक्षकों को एक समान पायदान पर खड़ा करना किस हद तक न्यायसंगत है?

25 सितंबर की डेडलाइन का प्रशासनिक दबाव:

विभाग 25 सितंबर 2026 तक काउंसलिंग निपटाने की आपाधापी में क्यों है? क्या यह बिना परीक्षा वाले शिक्षकों को स्थायी रूप से सीएम राइज में स्थापित करने की जल्दबाजी है?

प्रदेश मॉडल की जांच कौन करेगा?

प्रदेश में मर्ज किए गए शिक्षकों की शैक्षणिक और तकनीकी पात्रता जांचे बिना उन्हें विश्वस्तरीय माने जाने वाले स्कूलों में पढ़ाने की जिम्मेदारी कैसे सौंपी जा रही है?

मुख्यमंत्री की इस महत्वाकांक्षी योजना में चयन प्रक्रिया का यह सरलीकरण स्पष्ट संकेत देता है कि प्रशासनिक सहूलियत के आगे शिक्षा की गुणवत्ता और मेरिट व्यवस्था को किनारे कर दिया गया है।

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