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भोपाल · 28 मिनट पहले

मानसून की विदाई से पहले MP में बारिश का एक और दौर, 18 से 21 सितंबर तक गरज-चमक के आसार

मध्य प्रदेश में 18 से 21 सितंबर तक बारिश, गरज-चमक और आंधी के आसार हैं। प्रदेश में अब तक सामान्य से 7% कम बारिश हुई है। 22 सितंबर से बारिश घटने की संभावना।

दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 28 मिनट पहले
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मानसून की विदाई से पहले MP में बारिश का एक और दौर, 18 से 21 सितंबर तक गरज-चमक के आसार

भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून अब विदाई की ओर बढ़ रहा है, लेकिन इसके पूरी तरह खत्म होने से पहले प्रदेश में बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है। मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार, 18 से 21 सितंबर तक प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और आंधी की गतिविधियां जारी रहने की संभावना है। इसके बाद 22 सितंबर से बारिश की गतिविधियों में कमी आने के संकेत हैं।

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मौसम की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए मानसून की सक्रियता अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। अगले चार-पांच दिन प्रदेश के उन जिलों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, जहां इस सीजन में अब तक सामान्य से कम बारिश हुई है।

842.1 मिमी बारिश, सामान्य से करीब 2.5 इंच कम

प्रदेश में अब तक 842.1 मिमी यानी करीब 33.1 इंच बारिश दर्ज की गई है। सामान्य तौर पर इस अवधि तक प्रदेश में 905.3 मिमी यानी 35.6 इंच बारिश होनी चाहिए थी। इस लिहाज से प्रदेश में अब तक बारिश सामान्य से करीब 7 प्रतिशत कम है।

बारिश की कमी पूरे प्रदेश में एक जैसी नहीं है। पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की कमी अपेक्षाकृत अधिक है, जबकि पूर्वी हिस्से में पिछले दिनों हुई बारिश के बाद स्थिति सामान्य के करीब पहुंची है।

मानसून की विदाई से पहले होने वाली बारिश से बारिश के आंकड़ों में और सुधार की उम्मीद है। खासकर वे जिले, जहां अभी बारिश सामान्य से नीचे है, वहां अगले कुछ दिनों की गतिविधियां महत्वपूर्ण रहेंगी।

18 जिलों में सामान्य या ज्यादा बारिश

प्रदेश के 18 जिलों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया शामिल हैं।

वहीं इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत कई जिलों में बारिश सामान्य से कम रही है। आलीराजपुर में सामान्य की तुलना में करीब आधी बारिश ही दर्ज हुई है। इसके विपरीत निवाड़ी में सामान्य से करीब 54 प्रतिशत अधिक बारिश हो चुकी है।

अरब सागर से बंगाल की खाड़ी तक सक्रिय मौसम प्रणालियां

मौसम विभाग के अनुसार, सौराष्ट्र और उससे लगे उत्तर-पूर्वी अरब सागर के ऊपर कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण समुद्र तल से करीब 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला है।

इसके अलावा मानसून ट्रफ राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से होते हुए बंगाल की खाड़ी तक बनी हुई है। इन मौसम प्रणालियों के कारण मध्य भारत में पर्याप्त नमी पहुंच रही है।

इसी वजह से 18 और 19 सितंबर को प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश के दौर जारी रहने की संभावना जताई गई है।

19 सितंबर के बाद बन सकता है नया सिस्टम

मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, 19 सितंबर के बाद एक और मौसम प्रणाली बनने के संकेत हैं। उत्तर थाईलैंड के ऊपर बना ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण 18 सितंबर की शाम तक उत्तर अंडमान सागर के आसपास पहुंच सकता है।

इसके प्रभाव से 19 सितंबर की शाम उत्तर अंडमान सागर में नया कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके बाद इसके दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ने के संकेत हैं। इस सिस्टम का प्रभाव मध्य प्रदेश के मौसम पर भी पड़ सकता है।

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भोपाल समेत कई शहरों में हुई तेज बारिश

गुरुवार को प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम ने करवट ली। भोपाल, सीहोर और देवास में तेज बारिश हुई। भोपाल में दोपहर के समय करीब आधे घंटे तक तेज बारिश हुई।

आष्टा में भी मूसलधार बारिश दर्ज की गई। वहीं भोपाल-इंदौर रोड पर सोनकच्छ में बारिश के दौरान कुछ समय के लिए दिन में ही अंधेरा छा गया। वाहन चालकों को सुरक्षा के लिए हेडलाइट जलाकर आगे बढ़ना पड़ा।

ग्वालियर में दिनभर की उमस के बाद शाम को हुई बारिश से लोगों को राहत मिली।

32 जिलों में अब भी बारिश की कमी

प्रदेश के 32 जिलों में सामान्य से 4 से 50 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है। हालांकि पिछले सप्ताह हुई बारिश के बाद कई जिलों में स्थिति में सुधार हुआ है।

पूर्वी मध्य प्रदेश में जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग की स्थिति अब करीब सामान्य बताई जा रही है। इसके बावजूद बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडोरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में 4 से 25 प्रतिशत तक बारिश की कमी दर्ज है।

सितंबर के आखिरी सप्ताह में शुरू हो सकती है मानसून की विदाई

मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार, मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई की प्रक्रिया सितंबर के आखिरी सप्ताह में शुरू होने का अनुमान है। इसकी शुरुआत पश्चिमी राजस्थान से हो सकती है और इसके बाद मध्य प्रदेश में भी मानसून की सक्रियता धीरे-धीरे कम होने लगेगी।

ऐसे में 18 से 21 सितंबर के बीच होने वाली बारिश प्रदेश के मौजूदा वर्षा घाटे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हालांकि बारिश का वास्तविक वितरण अलग-अलग जिलों में मौसम प्रणालियों की स्थिति पर निर्भर करेगा।

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