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भोपाल · 7 मिनट पहले

मंत्री से मिलने से पहले अनुमति जरूरी! जल संसाधन विभाग में अफसर-कर्मचारियों के लिए नया निर्देश, उल्लंघन पर कार्रवाई

मध्यप्रदेश के जल संसाधन विभाग में मंत्री तुलसीराम सिलावट से मिलने से पहले अधिकारियों-कर्मचारियों को अनुमति लेना होगी। बिना अनुमति पहुंचने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 7 मिनट पहले
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मंत्री से मिलने से पहले अनुमति जरूरी! जल संसाधन विभाग में अफसर-कर्मचारियों के लिए नया निर्देश, उल्लंघन पर कार्रवाई

भोपाल। मध्यप्रदेश के जल संसाधन विभाग में अब अधिकारियों और कर्मचारियों को विभागीय मंत्री तुलसीराम सिलावट से मिलने से पहले अनुमति लेना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति मंत्री से मिलने पहुंचने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को लेकर विभाग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। भविष्य में ऐसी स्थिति दोहराए जाने पर संबंधित के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

प्रमुख अभियंता कार्यालय ने जारी किए निर्देश

जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय की ओर से प्रदेश के सभी मुख्य अभियंताओं और परियोजना संचालकों को इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, यह निर्देश मंत्री तुलसीराम सिलावट की ओर से 15 सितंबर को भेजे गए पत्र के बाद जारी किए गए।

निर्देश में कहा गया है कि विभाग के कुछ अधिकारी और कर्मचारी बिना पूर्व अनुमति प्राप्त किए मंत्री से मिलने के लिए पहुंच जाते हैं। विभाग ने ऐसी स्थिति को शिष्टाचार के विरुद्ध बताया है और सभी अधीनस्थ कार्यालयों में पदस्थ अमले को इसकी जानकारी देने के निर्देश दिए हैं।

बिना अनुमति मिलने पहुंचे तो कार्रवाई की चेतावनी

प्रमुख अभियंता कार्यालय ने सभी मुख्य अभियंताओं और परियोजना संचालकों से कहा है कि वे अपने अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को इस संबंध में स्पष्ट रूप से सूचित करें। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि भविष्य में बिना अनुमति मंत्री से मिलने की स्थिति की पुनरावृत्ति न हो।

विभागीय निर्देश के मुताबिक यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी भविष्य में बिना अनुमति मंत्री से मिलने पहुंचता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

मंत्री से मुलाकात के लिए अब अनुमति प्रक्रिया

इस निर्देश के बाद जल संसाधन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए मंत्री से मुलाकात की प्रक्रिया औपचारिक हो गई है। यानी विभागीय अधिकारी या कर्मचारी सीधे मंत्री से मिलने के बजाय पहले निर्धारित अनुमति प्रक्रिया का पालन करेंगे।

मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि विभागीय मंत्री से सीधे मुलाकात अक्सर अधिकारी-कर्मचारियों की विभागीय समस्याओं, प्रशासनिक मामलों या अन्य मुद्दों से जुड़ी हो सकती है। अब ऐसी मुलाकातों के लिए पहले अनुमति लेना जरूरी होगा।

विभाग में अनुशासन पर जोर

विभाग की ओर से जारी निर्देश का मुख्य उद्देश्य मंत्री से मुलाकात की व्यवस्था को नियंत्रित करना और अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रशासनिक अनुशासन को सुनिश्चित करना बताया गया है। निर्देश सभी मुख्य अभियंताओं और परियोजना संचालकों के माध्यम से अधीनस्थ अमले तक पहुंचाने को कहा गया है।

हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्टों में कर्मचारी नेताओं की ओर से इस व्यवस्था पर आपत्ति जताए जाने का भी उल्लेख है। उनका तर्क है कि कर्मचारी कई बार विभागीय स्तर पर समस्याओं का समाधान नहीं होने पर उच्च स्तर पर अपनी बात रखने पहुंचते हैं। यह आपत्ति कर्मचारी संगठनों के पक्ष से व्यक्त की गई है।

क्या है नया निर्देश?

जल संसाधन मंत्री से मिलने से पहले अनुमति लेना होगी।

बिना अनुमति मंत्री से मिलने पहुंचने पर विभाग इसे अनुशासनात्मक विषय मान सकता है।

सभी मुख्य अभियंताओं और परियोजना संचालकों को अधीनस्थ अमले को निर्देश की जानकारी देने को कहा गया है।

भविष्य में ऐसी स्थिति दोहराए जाने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

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