नामांतरण के नाम पर ₹8 हजार की डील! नायब तहसीलदार और प्राइवेट बाबू लोकायुक्त के जाल में
मंडला के बम्हनी बंजर में नामांतरण के लिए ₹8 हजार रिश्वत लेने के मामले में लोकायुक्त ने नायब तहसीलदार अजय श्रीवास्तव और प्राइवेट बाबू हरीश सिंगौर पर कार्रवाई की।


मंडला। मध्य प्रदेश के मंडला जिले के बम्हनी बंजर उप तहसील कार्यालय में लोकायुक्त की टीम ने रिश्वतखोरी के मामले में कार्रवाई करते हुए नायब तहसीलदार और एक प्राइवेट व्यक्ति को कथित रूप से रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा है। लोकायुक्त के अनुसार, नामांतरण आदेश जारी करने के एवज में शिकायतकर्ता से रिश्वत की मांग की गई थी।
लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक अंजूलता पटले से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, मामले में शिकायतकर्ता रोहणी प्रसाद चंद्रौल (55), निवासी ग्राम सिल्गी, जिला मंडला ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि उनके पिता झनक लाल के नाम कृषि भूमि थी। पिता द्वारा वसीयतनामा किए जाने के बाद उक्त भूमि उनके बेटे आलोक चंद्रौल के नाम किए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
नामांतरण के लिए मांगी गई थी रिश्वत
शिकायतकर्ता के अनुसार, भूमि के नामांतरण के लिए ऑनलाइन आवेदन करने के बाद वह उप तहसील कार्यालय बम्हनी बंजर पहुंचा था। लोकायुक्त के मुताबिक, शिकायत में आरोप लगाया गया कि कार्यालय में पदस्थ नायब तहसीलदार अजय श्रीवास्तव और उनके कार्यालय में बाबू के रूप में काम कर रहे निजी व्यक्ति हरीश सिंगौर ने नामांतरण आदेश जारी करने के बदले रिश्वत की मांग की।
शिकायत के अनुसार, आरोपितों ने कथित तौर पर 10 हजार रुपये की मांग की थी। बाद में दोनों पक्षों के बीच 8 हजार रुपये में सौदा तय होने की बात सामने आई।
शिकायत का सत्यापन कराया गया
लोकायुक्त पुलिस के मुताबिक, शिकायत मिलने के बाद रिश्वत की मांग संबंधी आरोपों का सत्यापन कराया गया। सत्यापन में शिकायत सही पाए जाने के बाद लोकायुक्त टीम ने कार्रवाई की योजना बनाई।
शिकायतकर्ता को तय रकम लेकर उप तहसील कार्यालय बम्हनी बंजर पहुंचने के लिए कहा गया।
नायब तहसीलदार के निर्देश पर प्राइवेट बाबू को दी रकम
लोकायुक्त के अनुसार, शिकायतकर्ता जब कार्यालय पहुंचा तो नायब तहसीलदार के निर्देश पर प्राइवेट व्यक्ति हरीश सिंगौर ने रिश्वत की रकम प्राप्त की। इसी दौरान पहले से तैयार लोकायुक्त की टीम ने दबिश देकर उसे रिश्वत की रकम के साथ पकड़ लिया।
कार्रवाई के दौरान लोकायुक्त टीम ने रिश्वत की रकम जब्त की और मामले में नायब तहसीलदार अजय श्रीवास्तव तथा हरीश सिंगौर के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
लोकायुक्त पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधन 2018) की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
लोकायुक्त ने मामले में धारा 7, 13(1)ठ, 13(2) तथा धारा 61(2) बीएनएस के तहत कार्रवाई की जानकारी दी है।
प्राइवेट व्यक्ति की भूमिका भी जांच के घेरे में
इस कार्रवाई में नायब तहसीलदार के साथ एक निजी व्यक्ति के पकड़े जाने से सरकारी कार्यालयों में निजी व्यक्तियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठते हैं। हालांकि इस मामले में प्राइवेट व्यक्ति को रिश्वत की रकम लेते पकड़े जाने और उसकी भूमिका के संबंध में अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद अब मामले में आगे की जांच की जा रही है। आरोपितों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय सक्षम न्यायालय की प्रक्रिया के बाद होगा।
