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नई दिल्ली · 47 मिनट पहले

BRICS घोषणापत्र में आतंकवाद, टैरिफ और वैश्विक संस्थाओं पर बड़ा संदेश, भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन

BRICS नई दिल्ली घोषणापत्र में पहलगाम आतंकी हमले, टैरिफ, आर्थिक प्रतिबंध और वैश्विक संस्थाओं में सुधार पर अहम संदेश दिया गया। भारत की भूमिका पर भी जोर रहा।

दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 47 मिनट पहले
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BRICS घोषणापत्र में आतंकवाद, टैरिफ और वैश्विक संस्थाओं पर बड़ा संदेश, भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन

नई दिल्ली। नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के समापन पर जारी नई दिल्ली घोषणापत्र में आतंकवाद, वैश्विक व्यापार, आर्थिक प्रतिबंध, पश्चिम एशिया संकट और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार जैसे कई अहम मुद्दों पर सदस्य देशों ने अपना रुख स्पष्ट किया। घोषणापत्र में हिंसा, सीमा पार आतंकवाद और युद्ध को किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराने की बात कही गई है।

BRICS देशों ने वैश्विक शासन व्यवस्था में विकासशील देशों की भूमिका बढ़ाने पर भी जोर दिया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक जैसी संस्थाओं में सुधार की जरूरत बताते हुए ग्लोबल साउथ के देशों को अधिक प्रतिनिधित्व देने की मांग की गई।

पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा

BRICS घोषणापत्र में 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की गई। हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी।

घोषणापत्र में आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का आह्वान किया गया। सदस्य देशों ने कहा कि आतंकवाद को किसी धर्म, राष्ट्रीयता या समुदाय से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।

BRICS देशों ने सीमा पार आतंकवाद, आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकियों को सुरक्षित पनाहगाह उपलब्ध कराने के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही संयुक्त राष्ट्र के ढांचे के तहत अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक संधि यानी CCIT को जल्द अंतिम रूप देने और लागू करने की मांग दोहराई गई।

टैरिफ और संरक्षणवादी नीतियों पर चिंता

BRICS नेताओं ने घोषणापत्र में किसी देश का नाम लिए बिना एकतरफा टैरिफ और गैर-टैरिफ व्यापार बाधाओं पर गंभीर चिंता व्यक्त की। घोषणापत्र के अनुसार संरक्षणवादी नीतियों और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों की अनदेखी से वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

BRICS ने कहा कि पर्यावरण या राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे आधारों का इस्तेमाल संरक्षणवादी व्यापार नीतियों को बढ़ावा देने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। ऐसी नीतियों का सबसे अधिक प्रभाव विकासशील और कमजोर अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है।

एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों का विरोध

BRICS देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्पष्ट मंजूरी के बिना लगाए जाने वाले एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों पर भी आपत्ति जताई।

घोषणापत्र में कहा गया कि इस तरह के प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं हैं। BRICS नेताओं ने विशेष रूप से उन प्रतिबंधों के मानवीय प्रभाव पर चिंता जताई, जिनका असर आम नागरिकों की स्वास्थ्य सेवाओं, खाद्य सुरक्षा और विकास के अधिकार पर पड़ सकता है।

पश्चिम एशिया और परमाणु सुरक्षा पर चिंता

पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर BRICS देशों ने चिंता व्यक्त करते हुए सभी पक्षों से अधिकतम संयम बरतने की अपील की।

घोषणापत्र में अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के सुरक्षा मानकों के तहत आने वाले शांतिपूर्ण परमाणु प्रतिष्ठानों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों की निंदा की गई। नेताओं ने कहा कि सशस्त्र संघर्ष के दौरान भी परमाणु सुरक्षा और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

गाजा संकट और फलस्तीन पर BRICS का रुख

गाजा में मानवीय संकट को लेकर भी BRICS देशों ने चिंता जताई। घोषणापत्र में नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों की निंदा करते हुए मानवीय सहायता की निर्बाध पहुंच की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

BRICS ने फलस्तीनी लोगों के जबरन विस्थापन का विरोध करते हुए 1967 की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र और संप्रभु फलस्तीन राष्ट्र के गठन का समर्थन किया, जिसकी राजधानी पूर्वी यरूशलम हो।

इसके साथ ही पश्चिम एशिया में स्थायी शांति और संघर्ष विराम के लिए कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की भूमिका पर समर्थन

BRICS घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, लोकतांत्रिक और प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

घोषणापत्र में भारत और ब्राजील की सुरक्षा परिषद में बड़ी भूमिका की आकांक्षाओं का समर्थन किया गया। चीन और रूस ने भी सुरक्षा परिषद में भारत और ब्राजील की भूमिका बढ़ाने के समर्थन को दोहराया।

इसके साथ ही अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका के विकासशील देशों को संयुक्त राष्ट्र की निर्णय लेने वाली संस्थाओं और उच्च पदों पर पर्याप्त प्रतिनिधित्व देने की जरूरत बताई गई।

IMF और विश्व बैंक में सुधार की मांग

BRICS देशों ने IMF और विश्व बैंक जैसी ब्रेटन वुड्स संस्थाओं में सुधार की मांग भी उठाई। सदस्य देशों का कहना है कि इन संस्थाओं में उभरती अर्थव्यवस्थाओं की हिस्सेदारी उनकी वास्तविक आर्थिक स्थिति के अनुरूप होनी चाहिए।

IMF के कोटा सुधारों के माध्यम से विकासशील देशों की आवाज और मतदान अधिकार बढ़ाने पर जोर दिया गया। साथ ही यह भी कहा गया कि सुधारों की प्रक्रिया में सबसे गरीब देशों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।

WTO की विवाद निपटान व्यवस्था को सक्रिय करने की मांग

BRICS ने नियम आधारित वैश्विक व्यापार व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता जताते हुए विश्व व्यापार संगठन (WTO) को मजबूत करने की जरूरत बताई।

घोषणापत्र में WTO की दो-स्तरीय बाध्यकारी विवाद निपटान व्यवस्था को पूरी तरह सक्रिय करने और अपीलीय निकाय की व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया।

BRICS देशों का मानना है कि प्रभावी विवाद समाधान तंत्र के बिना विकासशील देशों के व्यापारिक अधिकारों की पर्याप्त सुरक्षा नहीं हो सकती।

भारत की BRICS अध्यक्षता में गतिविधियों का विस्तार

घोषणापत्र में भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान आयोजित विभिन्न गतिविधियों और बैठकों का उल्लेख किया गया। भारत ने BRICS के एजेंडे में विकास, वैश्विक दक्षिण, आर्थिक सहयोग, तकनीक और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी।

BRICS देशों ने समानता, संप्रभुता और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने जैसे सिद्धांतों को महत्वपूर्ण बताते हुए विकासशील देशों की आवाज को वैश्विक मंच पर मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने का संदेश

नई दिल्ली घोषणापत्र का व्यापक संदेश यही रहा कि BRICS देश वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्था में विकासशील देशों की भूमिका बढ़ाने के पक्ष में हैं। आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख, एकतरफा प्रतिबंधों और संरक्षणवादी व्यापार नीतियों का विरोध तथा वैश्विक संस्थाओं में सुधार की मांग इसके प्रमुख बिंदु रहे।

घोषणापत्र में भारत और अन्य विकासशील देशों की बढ़ती भूमिका यह संकेत देती है कि BRICS आने वाले समय में वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था में ग्लोबल साउथ की आवाज को और प्रभावी बनाने पर जोर देना चाहता है।

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