आईटीआई नर्मदापुरम में साइबर सुरक्षा और बाल सुरक्षा पर संवाद, छात्र-छात्राओं को बताए कानूनी अधिकार
आईटीआई नर्मदापुरम में साइबर सुरक्षा, लैंगिक समानता और बाल सुरक्षा पर संवाद कार्यक्रम हुआ। छात्र-छात्राओं को साइबर अपराध, कानूनी अधिकार और सरकारी योजनाओं की जानकारी दी गई।


नर्मदापुरम। मिशन शक्ति एवं बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के अंतर्गत शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) नर्मदापुरम में साइबर सुरक्षा, लैंगिक समानता, बाल सुरक्षा एवं बाल विवाह मुक्त भारत जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कलेक्टर सोमेश मिश्रा के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में आईटीआई में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को महिला एवं बालिका सशक्तिकरण, डिजिटल सुरक्षा, लैंगिक समानता और बाल अधिकारों से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में संभागीय संयुक्त संचालक महिला एवं बाल विकास नर्मदापुरम संभाग श्रीमती तृप्ति त्रिपाठी, शासकीय आईटीआई नर्मदापुरम के प्राचार्य सतीश मौर्य, परियोजना अधिकारी महिला एवं बाल विकास नर्मदापुरम शहरी श्रीमती प्रीति यादव सहित अधिकारी, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
बालिकाओं को समान अवसर देने पर जोर
कार्यक्रम में संभागीय संयुक्त संचालक तृप्ति त्रिपाठी ने जिले के लिंगानुपात की जानकारी देते हुए कहा कि बालक और बालिकाओं को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में समान अवसर मिलना जरूरी है। उन्होंने बालिकाओं को शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने और उनके लिए सकारात्मक एवं सुरक्षित वातावरण तैयार करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि बालिका सशक्तिकरण केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता आवश्यक है।
तृप्ति त्रिपाठी ने छात्र-छात्राओं को शासन की महिला एवं बालिका हितैषी योजनाओं की जानकारी भी दी। इस दौरान लाड़ली लक्ष्मी योजना, लाड़ली बहना योजना और गांव की बेटी योजना सहित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में बताया गया। उन्होंने बालिकाओं से शिक्षा, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया।
लैंगिक भेदभाव खत्म करने की जरूरत
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में उदयन केयर संस्था भोपाल के विषय विशेषज्ञ सागर तिवारी ने समाज और कार्यस्थल पर लैंगिक समानता के महत्व पर चर्चा की।
उन्होंने कहा कि महिलाओं और पुरुषों सहित सभी वर्गों को समान अवसर और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने लैंगिक भेदभाव को समाप्त करने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि समानता आधारित वातावरण से ही स्वस्थ और प्रगतिशील समाज का निर्माण संभव है।
सागर तिवारी ने पीपीटी के माध्यम से छात्र-छात्राओं को जेंडर इक्वलिटी, महिला सशक्तिकरण और सुरक्षित वातावरण से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।
साइबर ठगी और ऑनलाइन अपराधों से बचने के बताए तरीके
द्वितीय सत्र में नर्मदापुरम के उपनिरीक्षक बंशज श्रीवास्तव ने छात्र-छात्राओं को साइबर सुरक्षा और डिजिटल माध्यमों के सुरक्षित उपयोग की जानकारी दी।
उन्होंने सोशल मीडिया के इस्तेमाल के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी, साइबर बुलिंग और डिजिटल अपराधों से बचाव के तरीके बताए।
छात्र-छात्राओं को मजबूत पासवर्ड रखने, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) का इस्तेमाल करने और किसी भी संदिग्ध लिंक पर क्लिक नहीं करने की सलाह दी गई।
उन्होंने महिलाओं के विरुद्ध होने वाले साइबर अपराधों, विशेष रूप से साइबर स्टॉकिंग और ब्लैकमेलिंग से बचाव तथा उपलब्ध कानूनी प्रावधानों की जानकारी भी दी।
साइबर अपराध होने की स्थिति में शिकायत दर्ज कराने के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in के बारे में भी विस्तार से बताया गया।
बाल अधिकार और बाल विवाह रोकथाम पर भी चर्चा
कार्यक्रम में मयंक तोमर ने सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत शिक्षा के अधिकार से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी छात्र-छात्राओं के साथ साझा की।
इसके अलावा बाल सुरक्षा, बाल अधिकार और बाल विवाह की रोकथाम जैसे विषयों पर भी जागरूकता बढ़ाई गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए समाज में जागरूकता और समय पर हस्तक्षेप जरूरी है।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल योजनाओं की जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें डिजिटल दुनिया में सुरक्षित रहने, लैंगिक समानता को समझने और अपने कानूनी एवं सामाजिक अधिकारों के प्रति जागरूक बनाना भी रहा।
अधिकारियों और विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम का संचालन वन स्टॉप सेंटर नर्मदापुरम की प्रशासक श्रीमती प्रतिभा वाजपेयी ने किया। आभार प्रदर्शन परियोजना अधिकारी महिला एवं बाल विकास नर्मदापुरम ग्रामीण श्रीमती प्रीति यादव ने किया।
कार्यक्रम में अधिकारियों, कर्मचारियों और आईटीआई के छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की। संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों को साइबर अपराधों से सतर्क रहने, समानता आधारित सोच विकसित करने तथा बाल अधिकारों और महिला सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों के प्रति जागरूक किया गया।
