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नई दिल्ली · 28-07-2026

जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस पर साधा निशाना, बोले- 2026 संशोधन कानून से होगी कड़ी कार्रवाई

संसद में पेपर लीक संशोधन विधेयक 2026 पर बहस के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस पर निशाना साधा। नए बिल में सजा, जुर्माना और ब्लैकलिस्टिंग के प्रावधान और सख्त किए गए।

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समाचार डेस्क · 28-07-2026
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जितेंद्र सिंह ने कांग्रेस पर साधा निशाना, बोले- 2026 संशोधन कानून से होगी कड़ी कार्रवाई

नई दिल्ली। लोकसभा में 'पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पेपर लीक के मुद्दे पर विपक्ष, खासकर कांग्रेस, पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि पेपर लीक की घटनाएं किसी एक राज्य तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि कांग्रेस और यूपीए सरकारों के दौरान भी कई बड़े मामले सामने आए। अंतर केवल इतना है कि वर्तमान सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिए सख्त कानून और मजबूत व्यवस्था लागू की है।

भौगोलिक संदर्भ

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वर्ष 2009 के रेलवे भर्ती बोर्ड परीक्षा पेपर लीक से लेकर 2012 की एम्स प्रवेश परीक्षा और 2013 की महाराष्ट्र सेकेंडरी सर्टिफिकेट परीक्षा तक कई चर्चित मामले सामने आए। उन्होंने 2011 की एआईईईई परीक्षा, 2010 की उत्तर प्रदेश बी.एड. प्रवेश परीक्षा, 2012 की तमिलनाडु लोक सेवा आयोग परीक्षा और 2009 की पश्चिम बंगाल जॉइंट एंट्रेंस परीक्षा का भी उल्लेख किया। उनका कहना था कि यदि सभी घटनाओं का विवरण गिनाया जाए तो पूरे विधेयक पर चर्चा का समय कम पड़ जाएगा।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि 1992 और 2010 में गठित समितियों ने केंद्रीय परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए केंद्रीय परीक्षा समिति बनाने की सिफारिश की थी, लेकिन तत्कालीन सरकारों ने इन सुझावों को लागू नहीं किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से 2017 में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) का गठन किया।

उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के अधीन वर्तमान में चार प्रमुख भर्ती एजेंसियां—संघ लोक सेवा आयोग, कर्मचारी चयन आयोग, रेलवे भर्ती बोर्ड और इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनेल सिलेक्शन—पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया का संचालन कर रही हैं। उनका दावा था कि सरकार परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए लगातार सुधार कर रही है।

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2026 संशोधन विधेयक में क्या बदला?

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि 2024 के कानून को और प्रभावी बनाने के लिए 2026 संशोधन विधेयक लाया गया है। इसके तहत पेपर लीक और परीक्षा में धांधली से जुड़े मामलों में सजा और जुर्माने के प्रावधानों को पहले की तुलना में काफी कड़ा किया गया है।

व्यक्तिगत दोषियों के लिए अब 5 से 10 वर्ष तक की जेल और 50 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया है। वहीं, परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसियों या सर्विस प्रोवाइडरों पर 5 करोड़ रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा और उन्हें 8 वर्ष तक ब्लैकलिस्ट किया जा सकेगा।

इसके अलावा, संगठित पेपर लीक माफिया के खिलाफ 7 से 10 वर्ष तक की जेल और 10 करोड़ रुपये तक जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है। मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष फास्ट-ट्रैक अदालतों की व्यवस्था भी की जाएगी, जबकि जांच एजेंसियों को दो महीने के भीतर जांच पूरी करने का लक्ष्य दिया गया है।

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विपक्ष को चर्चा के लिए अधिक समय देने को तैयार सरकार

इस बीच संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार इस महत्वपूर्ण विधेयक पर व्यापक चर्चा चाहती है। उन्होंने बताया कि पहले इस पर छह घंटे की चर्चा तय थी, जिसे बढ़ाकर आठ घंटे कर दिया गया है। यदि विपक्ष और अधिक समय चाहता है तो सरकार 10 घंटे तक चर्चा कराने के लिए भी तैयार है।

सरकार का कहना है कि संशोधित कानून का उद्देश्य केवल दोषियों को कड़ी सजा देना नहीं, बल्कि देशभर की प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता और पारदर्शिता को मजबूत करना भी है। वहीं विपक्ष इस विधेयक के विभिन्न प्रावधानों पर अपनी आपत्तियां और सुझाव संसद में रख रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस विधेयक पर व्यापक बहस देखने को मिल सकती है।

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