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सीहोर · 1 घंटे पहले

सीहोर की श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी पर मंडराया बंद होने का खतरा, फर्जी डिग्री मामले में SOG की जांच तेज

सीहोर की श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी के कथित फर्जी डिग्री मामले में राजस्थान SOG की जांच जारी है। VC समेत तीन गिरफ्तार, 66 अभ्यर्थियों की डिग्रियां जांच के घेरे में।

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समाचार डेस्क · 1 घंटे पहले
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सीहोर की श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी पर मंडराया बंद होने का खतरा, फर्जी डिग्री मामले में SOG की जांच तेज

सीहोर। मध्य प्रदेश के सीहोर स्थित श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मेडिकल साइंसेज से जुड़े कथित फर्जी डिग्री मामले में राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। राजस्थान की PTI भर्ती-2022 में कथित फर्जी और बैकडेटेड B.P.Ed. डिग्रियों के इस्तेमाल की जांच अब यूनिवर्सिटी की कार्यप्रणाली तक पहुंच गई है।

जांच के दौरान यूनिवर्सिटी के रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं और कई डिग्रियों से जुड़े सवाल सामने आने के बाद SOG मध्य प्रदेश सरकार को अपनी जांच रिपोर्ट भेजने की तैयारी में है। रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी की मान्यता को लेकर कार्रवाई की सिफारिश किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, मान्यता रद्द करने या यूनिवर्सिटी बंद करने का अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है।

VC, परीक्षा नियंत्रक और कंप्यूटर ऑपरेटर गिरफ्तार

इस मामले में राजस्थान SOG ने 24 अगस्त को यूनिवर्सिटी के कुलपति मुकेश तिवाड़ी, परीक्षा नियंत्रक संजय राठौड़ और कंप्यूटर ऑपरेटर आनंद शर्मा को गिरफ्तार किया था। तीनों को अदालत में पेश करने के बाद पुलिस रिमांड पर लिया गया है।

SOG की जांच PTI भर्ती परीक्षा-2022 में फर्जी दस्तावेज और कथित बैकडेटेड B.P.Ed. डिग्री से जुड़े मामले से शुरू हुई थी। जांच आगे बढ़ने पर यूनिवर्सिटी के रिकॉर्ड और अन्य पाठ्यक्रमों से संबंधित दस्तावेज भी जांच के दायरे में आ गए हैं।

66 अभ्यर्थियों की डिग्रियां जांच के घेरे में

राजस्थान की PTI भर्ती-2022 में चयनित 66 अभ्यर्थियों की B.P.Ed. डिग्रियां जांच के दायरे में हैं। SOG यह पता लगाने में जुटी है कि इन अभ्यर्थियों की डिग्रियां नियमानुसार जारी हुई थीं या कथित तौर पर बैकडेट में तैयार की गई थीं।

जांच का दायरा सिर्फ चयनित अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है। SOG यूनिवर्सिटी के रिकॉर्ड, फीस लेजर और अन्य पाठ्यक्रमों से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।

एक मामले से खुला कथित फर्जी डिग्री नेटवर्क

मामले की शुरुआत राजस्थान PTI भर्ती में चयनित एक अभ्यर्थी से जुड़ी जांच से हुई। जांच में आरोप सामने आया कि अभ्यर्थी ने परीक्षा में अपनी जगह डमी कैंडिडेट बैठाया था और बाद में दस्तावेज सत्यापन के दौरान सीहोर की श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी की B.P.Ed. डिग्री प्रस्तुत की।

राजस्थान हाईकोर्ट के एक आदेश में भी SOG की जांच के संदर्भ में दर्ज है कि संबंधित अभ्यर्थी ने चयन के बाद श्री सत्य साईं यूनिवर्सिटी से B.P.Ed. की डिग्री हासिल की थी और जांच में उस डिग्री को बैकडेट में प्राप्त किए जाने की बात सामने आई थी।

इसके बाद जांच का दायरा बढ़ता गया और यूनिवर्सिटी से जुड़ी अन्य डिग्रियां भी संदेह के घेरे में आ गईं।

सिर्फ B.P.Ed. तक सीमित नहीं जांच

SOG की जांच में कथित तौर पर यूनिवर्सिटी के अन्य पाठ्यक्रमों के रिकॉर्ड और फीस लेजर में भी गड़बड़ियां सामने आई हैं। ऐसे में अब जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित अनियमितताएं केवल B.P.Ed. डिग्रियों तक सीमित थीं या अन्य पाठ्यक्रम भी इसकी जद में आए हैं।

जांच एजेंसी की कार्रवाई के बाद आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है।

यूनिवर्सिटी की मान्यता पर भी उठे सवाल

फर्जी डिग्री मामले में सामने आ रही जानकारियों के बाद अब यूनिवर्सिटी की मान्यता और संचालन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। SOG की ओर से जांच रिपोर्ट के आधार पर मध्य प्रदेश सरकार से आवश्यक कार्रवाई की सिफारिश किए जाने की बात सामने आई है।

हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यूनिवर्सिटी की मान्यता निश्चित रूप से रद्द होगी या संस्थान बंद किया जाएगा। यह फैसला जांच रिपोर्ट, संबंधित नियामकीय प्रक्रिया और मध्य प्रदेश सरकार के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।

PTI भर्ती-2022 पर भी पड़ सकता है असर

इस मामले का असर राजस्थान की PTI भर्ती-2022 पर भी पड़ सकता है। 66 चयनित अभ्यर्थियों की डिग्रियां जांच के दायरे में होने के कारण भर्ती में दस्तावेज सत्यापन और चयन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए हैं।

हालांकि, पूरी भर्ती रद्द होगी या नहीं, इस पर फिलहाल कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। SOG की जांच पूरी होने और संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट के बाद ही इस संबंध में स्थिति स्पष्ट होगी।

सात गिरफ्तारियां, जांच जारी

SOG इस मामले में अब तक कुल सात लोगों की गिरफ्तारी कर चुकी है। यूनिवर्सिटी के तीन अधिकारियों की गिरफ्तारी के बाद जांच और तेज हो गई है। पुलिस अब कथित फर्जी डिग्री नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों, लाभार्थियों और दस्तावेजों के लेन-देन से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है।

मामले की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित फर्जी डिग्री नेटवर्क कितना व्यापक था और इसमें यूनिवर्सिटी के किन-किन स्तरों के लोगों की भूमिका थी।

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