ब्रेकिंग
शुक्रवार, 28 अगस्त 2026
Denva Post
सभी खबरें
कोलंबो · 55 मिनट पहले

IND vs SL: कोलंबो टेस्ट ड्रॉ होने से भारत को झटका, WTC में पांचवें स्थान पर बरकरार; गंभीर की रणनीति पर उठे सवाल

भारत-श्रीलंका दूसरा टेस्ट ड्रॉ रहा। 503 रन बनाने और फॉलोऑन देने के बावजूद टीम इंडिया जीत नहीं सकी। कुलदीप यादव को बाहर रखने और गिल की कप्तानी पर सवाल उठे।

देनवा पोस्ट
देनवा पोस्ट
समाचार डेस्क · 55 मिनट पहले
शेयर
IND vs SL: कोलंबो टेस्ट ड्रॉ होने से भारत को झटका, WTC में पांचवें स्थान पर बरकरार; गंभीर की रणनीति पर उठे सवाल

कोलंबो। भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो में खेला गया दूसरा टेस्ट मैच ड्रॉ पर समाप्त हुआ। भारतीय टीम ने पहली पारी में 503/9 रन बनाकर पारी घोषित की और श्रीलंका को फॉलोऑन भी दिया, इसके बावजूद टीम इंडिया मुकाबला जीतने में सफल नहीं हो सकी।

भारतीय टीम के पास मैच पर मजबूत पकड़ बनाने के बावजूद जीत हासिल करने का मौका था। लेकिन श्रीलंकाई बल्लेबाजों के संघर्ष और भारत की गेंदबाजी रणनीति के कारण मुकाबला पांचवें दिन ड्रॉ पर खत्म हुआ। इस नतीजे का असर भारत की वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) तालिका पर भी पड़ा और टीम पांचवें स्थान पर बनी हुई है।

इस मैच के बाद कप्तान शुभमन गिल की रणनीति और टीम मैनेजमेंट के कुछ फैसलों पर भी सवाल उठ रहे हैं।

कुलदीप यादव को बाहर करना पड़ा भारी?

पहले टेस्ट के बाद दूसरे मुकाबले में कुलदीप यादव की जगह सारांश जैन को मौका दिए जाने की चर्चा थी। मैच में भी ऐसा ही हुआ। टीम प्रबंधन की ओर से कुलदीप के बाहर रहने की वजह उनकी तबीयत खराब होना बताई गई।

हालांकि, अगर कुलदीप पूरी तरह फिट नहीं थे तो उनका बाहर रहना मजबूरी थी। लेकिन मैच के प्रदर्शन को देखते हुए उनकी गैरमौजूदगी पर सवाल इसलिए उठे क्योंकि भारत को श्रीलंका के निचले क्रम के बल्लेबाजों को आउट करने में काफी परेशानी हुई।

कुलदीप की जगह टीम में शामिल किए गए सारांश जैन भी मैच में अपेक्षित प्रभाव नहीं छोड़ सके। ऐसे में एक विशेषज्ञ स्पिनर की जगह ऑलराउंडर को प्राथमिकता देने की रणनीति पर बहस शुरू हो गई है।

शुभमन गिल की कप्तानी में दिखा रक्षात्मक रवैया?

मैच के चौथे दिन श्रीलंका के पासिंदु सूर्यबांदारा और कामिंदु मेंडिस ने महत्वपूर्ण साझेदारी की। इस दौरान भारतीय टीम की फील्डिंग और गेंदबाजी में रक्षात्मक रवैया नजर आया।

श्रीलंका के बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाया और रन बनाने में सफलता हासिल की। ऐसी स्थिति में भारतीय कप्तान शुभमन गिल से अधिक आक्रामक फील्डिंग और विकेट लेने वाली रणनीति की उम्मीद की जा रही थी।

पूर्व भारतीय बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा ने भी मैच के दौरान गिल की कप्तानी पर टिप्पणी की थी। उनका मानना था कि श्रीलंका के काउंटर अटैक के बाद भारतीय टीम कुछ ज्यादा रक्षात्मक हो गई थी। उनके मुताबिक ऐसी स्थिति में गेंदबाजों को विकेट लेने के लिए प्रोत्साहित करने की जरूरत थी।

निचले क्रम ने भारतीय गेंदबाजों को खूब छकाया

पांचवें दिन जब खेल शुरू हुआ, तब श्रीलंका के पास सिर्फ 16 रन की बढ़त थी और उसके छह विकेट गिर चुके थे। भारतीय टीम को उम्मीद थी कि बाकी चार विकेट जल्दी निकालकर मैच को निर्णायक स्थिति में पहुंचाया जा सकेगा।

लेकिन श्रीलंका के निचले क्रम के बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजों को खासा परेशान किया। केशरा नुवंता और सोनल दिनुषा ने लंबे समय तक बल्लेबाजी करते हुए भारत की परेशानी बढ़ा दी।

पहले सत्र में भारतीय गेंदबाज इस साझेदारी को तोड़ने में सफल नहीं रहे। दूसरे सत्र की शुरुआत में मानव सुतार ने नुवंता को आउट कर साझेदारी तोड़ी, जिसके बाद लगा कि श्रीलंका की पारी जल्द सिमट जाएगी। लेकिन इसके बाद भी भारत मेजबान टीम को जल्दी ऑलआउट नहीं कर सका।

90 गेंद खेल गए लाहिरू कुमार

श्रीलंका के निचले क्रम के बल्लेबाजों ने जिस तरह समय बिताया, उसने भारतीय गेंदबाजी की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए।

प्रभात जयसूर्या ने 28 गेंदें, जबकि लाहिरू कुमार ने 90 गेंदें खेलीं। वहीं लाहिरू कुमार और सोनल दिनुषा ने करीब 28 ओवर तक बल्लेबाजी की।

जब भारत को विकेटों की जरूरत थी, तब श्रीलंका के निचले क्रम के बल्लेबाजों ने डटकर सामना किया। इससे भारतीय गेंदबाजों के साथ-साथ कप्तानी की रणनीति पर भी सवाल उठे।

503 रन बनाने के बाद भी जीत नहीं मिली

भारत ने पहली पारी में 503 रन बनाकर पारी घोषित की थी। इसके बाद श्रीलंका को फॉलोऑन भी दिया गया। ऐसी स्थिति में भारतीय टीम के पास जीत हासिल करने का मजबूत मौका था।

लेकिन दूसरी पारी में श्रीलंका के बल्लेबाजों ने भारत को जीत से दूर रखा। भारतीय गेंदबाज अपेक्षित तेजी से विकेट नहीं निकाल पाए और अंततः मुकाबला ड्रॉ हो गया।

यह नतीजा भारतीय टीम के लिए इसलिए भी निराशाजनक माना जा रहा है क्योंकि टीम ने मैच के कई चरणों में बढ़त बनाई थी। इसके बावजूद निर्णायक मौकों पर विकेट नहीं निकाल पाने के कारण जीत हाथ से निकल गई।

WTC में भारत पांचवें स्थान पर

कोलंबो टेस्ट ड्रॉ होने का नुकसान भारत को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप की अंक तालिका में भी हुआ। टीम फिलहाल पांचवें स्थान पर बनी हुई है।

अब भारतीय टीम के लिए आगे के टेस्ट मुकाबलों में सिर्फ बल्लेबाजी नहीं, बल्कि सही टीम संयोजन, आक्रामक कप्तानी और दबाव के समय गेंदबाजों के बेहतर इस्तेमाल पर भी ध्यान देना होगा।

कोलंबो टेस्ट ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि जब भारत के पास जीत हासिल करने का इतना मजबूत मौका था, तब टीम निर्णायक क्षणों में विपक्षी निचले क्रम को क्यों नहीं तोड़ पाई। कुलदीप यादव की अनुपस्थिति से लेकर फील्ड प्लेसमेंट और गेंदबाजी बदलाव तक, कई फैसले अब चर्चा के केंद्र में हैं।

यह खबर शेयर करें
शेयर