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भोपाल · 6 मिनट पहले

MP Pension News: अब पेंशन फाइल महीनों नहीं रहेगी लंबित, हर स्तर पर तय हुई समय-सीमा; जानें पूरी प्रक्रिया

मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की पेंशन प्रक्रिया होगी समयबद्ध। नए पेंशन प्रकरण के लिए 15, पुनरीक्षित पेंशन के लिए 10 कार्य दिवस की समय-सीमा तय।

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समाचार डेस्क · 6 मिनट पहले
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MP Pension News: अब पेंशन फाइल महीनों नहीं रहेगी लंबित, हर स्तर पर तय हुई समय-सीमा; जानें पूरी प्रक्रिया

भोपाल। मध्यप्रदेश में सरकारी कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन शुरू होने में होने वाली देरी को कम करने के लिए वित्त विभाग ने ऑनलाइन पेंशन प्रकरणों के निपटारे की प्रक्रिया को समयबद्ध करने की तैयारी की है। नई व्यवस्था में पेंशन फाइल को क्रियेटर, वेरीफायर और एप्रूवर के स्तर पर अनिश्चित समय तक लंबित नहीं रखा जा सकेगा।

वित्त विभाग ने ऑनलाइन पेंशन प्रकरणों के प्रत्येक स्तर पर अधिकतम समय-सीमा तय की है। निर्धारित अवधि में काम पूरा नहीं होने पर संबंधित कर्मचारी या अधिकारी की जवाबदेही तय की जा सकेगी। नई व्यवस्था का उद्देश्य पेंशन प्रकरणों का समय पर निराकरण सुनिश्चित करना और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की स्थिति को कम करना है।

सामान्य पेंशन प्रकरण 15 कार्य दिवस में होगा पूरा

नई व्यवस्था के तहत सामान्य नए पेंशन प्रकरण को तीन स्तरों से गुजरना होगा। इनमें क्रियेटर, वेरीफायर और एप्रूवर शामिल हैं।

प्रत्येक स्तर पर अधिकतम पांच कार्य दिवस की समय-सीमा निर्धारित की गई है। इस तरह सामान्य नए पेंशन प्रकरण को पूरी प्रक्रिया में अधिकतम 15 कार्य दिवस में पूरा किया जाना है।

पेंशन फाइल के हर चरण के लिए समय निर्धारित होने से यह पता लगाना आसान होगा कि कोई प्रकरण किस स्तर पर लंबित है और उसे वहां कितने दिन हो चुके हैं।

पुनरीक्षित पेंशन के लिए 10 दिन की समय-सीमा

पेंशन में संशोधन या पुनरीक्षण से जुड़े मामलों के लिए समय-सीमा और कम रखी गई है। ऐसे प्रकरणों में क्रियेटर को चार कार्य दिवस, जबकि वेरीफायर और एप्रूवर को तीन-तीन कार्य दिवस दिए गए हैं।

इस तरह पुनरीक्षित पेंशन से संबंधित पूरा प्रकरण अधिकतम 10 कार्य दिवस में निपटाने का लक्ष्य रखा गया है।

वेतन निर्धारण के मामलों में 11 दिन

वेतन निर्धारण से जुड़े ऑनलाइन प्रकरणों के लिए कुल 11 कार्य दिवस की समय-सीमा तय की गई है। इसमें क्रियेटर को पांच कार्य दिवस, जबकि वेरीफायर और एप्रूवर को तीन-तीन कार्य दिवस दिए जाएंगे।

इस व्यवस्था से वेतन निर्धारण से जुड़े मामलों के लंबित रहने की स्थिति पर भी निगरानी रखी जा सकेगी।

वित्त विभाग की समीक्षा में सामने आई थी देरी

वित्त विभाग की समीक्षा में सामने आया था कि कई संभागीय और जिला कार्यालयों में ऑनलाइन पेंशन प्रकरण अलग-अलग स्तरों पर लंबे समय तक लंबित रह रहे थे। कई मामलों में फाइल क्रियेटर के स्तर पर रुकी हुई थी, जबकि कुछ प्रकरण वेरीफायर या एप्रूवर के स्तर पर लंबित थे।

इस वजह से पेंशन स्वीकृति की प्रक्रिया में अनावश्यक समय लग रहा था। अब प्रत्येक स्तर पर समय-सीमा तय किए जाने से यह पता लगाया जा सकेगा कि फाइल किस स्तर पर रुकी है और देरी के लिए संबंधित स्तर पर किसकी जवाबदेही बनती है।

रिटायरमेंट से पहले शुरू होगी पेंशन की तैयारी

नई व्यवस्था में उन कर्मचारियों के पेंशन प्रकरणों को भी समय पर तैयार करने पर जोर दिया गया है, जिनकी सेवानिवृत्ति आगामी महीनों में होने वाली है।

अग्रिम पेंशन मामलों में जरूरी कार्रवाई पहले से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कर्मचारी के रिटायर होने के बाद पेंशन शुरू होने में अनावश्यक देरी न हो।

इसका सीधा फायदा उन सरकारी कर्मचारियों को मिलने की उम्मीद है, जिनकी सेवानिवृत्ति के बाद नियमित आय का प्रमुख स्रोत पेंशन होती है।

2025 में बना था केंद्रीकृत पेंशन सेल

वित्त विभाग ने पेंशन मामलों के तेजी से निराकरण के लिए 9 जून 2025 को राज्य केन्द्रीयकृत पेंशन प्रोसेसिंग सेल (SCPPC) का गठन किया था।

इसके बाद 1 अप्रैल 2026 से ऑनलाइन पेंशन प्रकरणों के निराकरण की नई व्यवस्था लागू की गई है। एससीपीपीसी को नई पेंशन के मामलों के साथ पुनरीक्षित पेंशन की स्वीकृति और सेवानिवृत्ति से दो साल पहले तक किए गए वेतन निर्धारण के अनुमोदन की जिम्मेदारी भी दी गई है।

नई समय-सीमा व्यवस्था लागू होने के बाद पेंशन प्रकरणों की ऑनलाइन निगरानी और जवाबदेही दोनों बढ़ने की उम्मीद है। इससे सरकार का उद्देश्य पेंशन स्वीकृति की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाना है।

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