Duleep Trophy: वैभव सूर्यवंशी का तूफान, 92 रन की पारी से 57 साल पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त
दलीप ट्रॉफी सेमीफाइनल में वैभव सूर्यवंशी ने 81 गेंदों पर 92 रन बनाए और 57 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़कर सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज बने।


बेंगलुरु। दलीप ट्रॉफी 2026 के सेमीफाइनल में 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने एक बार फिर अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से इतिहास रच दिया। ईस्ट जोन की ओर से खेलते हुए वैभव ने सेंट्रल जोन के गेंदबाजों की जमकर खबर ली और 81 गेंदों में 92 रन की शानदार पारी खेली। उनकी पारी में सात चौके और सात छक्के शामिल रहे।
वैभव भले ही शतक से महज आठ रन दूर रह गए, लेकिन अर्धशतक पूरा करते ही उन्होंने दलीप ट्रॉफी के इतिहास का एक बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया। वह इस टूर्नामेंट में अर्धशतक लगाने वाले सबसे युवा बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने 57 साल पुराने लक्ष्मण सिंह के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा।
42 गेंदों में ठोका अर्धशतक
सेंट्रल जोन के खिलाफ वैभव ने शुरुआत से ही आक्रामक अंदाज दिखाया। उन्होंने महज 42 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। इस दौरान उन्होंने तीन छक्के और पांच चौके लगाए थे।
वैभव की उम्र उस समय 15 साल 157 दिन थी। इससे पहले दलीप ट्रॉफी में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने का रिकॉर्ड लक्ष्मण सिंह के नाम था, जिन्होंने 1969 में 16 साल 23 दिन की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की थी।
पीयूष चावला ने 2005 में 16 साल 307 दिन की उम्र में दलीप ट्रॉफी में अर्धशतक लगाया था। अब वैभव इन दोनों को पीछे छोड़कर रिकॉर्ड बुक में सबसे ऊपर पहुंच गए हैं।
शतक से सिर्फ 8 रन दूर रह गए
रिकॉर्ड बनाने के बाद वैभव ने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी जारी रखी और 81 गेंदों में 92 रन बना डाले। वह शतक की ओर तेजी से बढ़ रहे थे, लेकिन हर्ष दुबे की गेंद पर अरशद खान ने उनका कैच पकड़ लिया।
इस तरह वैभव अपने पहले दलीप ट्रॉफी शतक से सिर्फ आठ रन दूर रह गए। अगर वह शतक पूरा कर लेते तो वह दलीप ट्रॉफी इतिहास के सबसे कम उम्र के शतकवीर बनने का सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड भी तोड़ सकते थे। तेंदुलकर ने 1990-91 में 17 साल 262 दिन की उम्र में दलीप ट्रॉफी शतक लगाया था।
ईस्ट जोन के लिए 161 रन की साझेदारी
सेंट्रल जोन ने पहले बल्लेबाजी करते हुए अपनी पहली पारी में 266 रन बनाए। इसके जवाब में ईस्ट जोन को वैभव सूर्यवंशी और अनुभवी बल्लेबाज अभिमन्यु ईश्वरन ने शानदार शुरुआत दी।
दोनों ने पहले विकेट के लिए 161 रन की साझेदारी की। वैभव के आउट होने के बाद ईस्ट जोन ने एक और विकेट गंवाया, लेकिन ईश्वरन क्रीज पर टिके रहे।
वैभव ने आर्यन पांडेय, यश ठाकुर, अरशद खान और सारांश जैन सहित सेंट्रल जोन के गेंदबाजों के खिलाफ खुलकर शॉट लगाए। उनकी पारी में सात चौके और सात छक्के शामिल रहे।
ईस्ट जोन की कप्तानी भी संभाल चुके हैं वैभव
इस मुकाबले में वैभव की भूमिका सिर्फ बल्लेबाज तक सीमित नहीं रही। नियमित कप्तान ईशान किशन के मैदान से बाहर रहने के दौरान उन्होंने कुछ समय के लिए ईस्ट जोन की कप्तानी भी संभाली।
इससे पहले मैच में उन्होंने कप्तानी के दौरान एक महत्वपूर्ण DRS कॉल भी लिया था, जो सफल रहा और ईस्ट जोन को अहम विकेट मिला। 15 साल की उम्र में वैभव की बल्लेबाजी के साथ-साथ उनकी नेतृत्व क्षमता भी चर्चा में है।
प्रथम श्रेणी क्रिकेट में दूसरा अर्धशतक
92 रन की यह पारी वैभव का प्रथम श्रेणी क्रिकेट में दूसरा अर्धशतक है। इससे पहले उन्होंने रणजी ट्रॉफी में बिहार के लिए मेघालय के खिलाफ 33 गेंदों में अर्धशतक लगाया था।
दलीप ट्रॉफी में उनका यह प्रदर्शन इसलिए भी खास है क्योंकि टूर्नामेंट के पिछले मुकाबले में वह केवल आठ रन बना सके थे। सेमीफाइनल में उन्होंने जोरदार वापसी करते हुए न सिर्फ बड़ी पारी खेली, बल्कि 57 साल पुराना रिकॉर्ड भी अपने नाम कर लिया।
गेंदबाजों के बाद बल्लेबाजी में भी दिखाया दम
वैभव की यह पारी इसलिए भी खास है क्योंकि दलीप ट्रॉफी के पिछले मुकाबले में उन्होंने गेंद से भी प्रभाव छोड़ा था। क्वार्टर फाइनल में ईस्ट जोन ने नॉर्थ ईस्ट जोन को पारी और 210 रन से हराया था और वैभव ने गेंदबाजी करते हुए दो विकेट लिए थे।
अब सेमीफाइनल में 92 रन की विस्फोटक पारी खेलकर वैभव ने साफ कर दिया है कि वह लाल गेंद के क्रिकेट में भी अपनी पहचान बनाने के लिए तैयार हैं। हालांकि, शतक से चूकने का मलाल जरूर रहेगा, लेकिन 57 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़कर उन्होंने एक बार फिर भारतीय घरेलू क्रिकेट में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया है।