नर्मदापुरम में सड़क पर उतरे न्यायाधीश, मोबाइल कोर्ट ने 164 मामलों में की कार्रवाई
नर्मदापुरम जिले में मोबाइल कोर्ट ने यातायात नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की। 164 मामलों का निराकरण कर ₹99,300 का अर्थदंड लगाया गया।


नर्मदापुरम। शहर और जिले के विभिन्न इलाकों में अव्यवस्थित यातायात के बीच मंगलवार को न्यायिक अधिकारी सड़क पर उतरे। यातायात नियमों के प्रति लोगों को जागरूक करने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर मौके पर ही कानूनी कार्रवाई के उद्देश्य से जिले के अलग-अलग स्थानों पर मोबाइल कोर्ट लगाए गए।
यह कार्रवाई प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृप्ति शर्मा के निर्देशन में नर्मदापुरम जिला मुख्यालय सहित इटारसी, सोहागपुर, सिवनीमालवा और पिपरिया समेत विभिन्न तहसील क्षेत्रों में की गई।
सड़क पर पहुंचकर न्यायिक अधिकारियों ने दी समझाइश
मोबाइल कोर्ट के दौरान न्यायिक मजिस्ट्रेट मौके पर पहुंचे और अलग-अलग स्थानों पर यातायात व्यवस्था का जायजा लेते हुए वाहन चालकों और आमजन से सीधे संवाद किया। यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों को उनकी गलती से अवगत कराया गया और आवश्यकतानुसार चेतावनी भी दी गई।
नियमों के उल्लंघन के मामलों में विधि के प्रावधानों के तहत अर्थदंड की कार्रवाई की गई। न्यायिक अधिकारियों ने लोगों को समझाया कि यातायात नियमों का पालन केवल चालान या जुर्माने से बचने के लिए नहीं, बल्कि स्वयं और सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी है।
हेलमेट और यातायात नियमों के पालन पर जोर
मोबाइल कोर्ट के दौरान नागरिकों को हेलमेट पहनने, वाहन चलाते समय जरूरी दस्तावेज साथ रखने, यातायात संकेतों का पालन करने और निर्धारित गति सीमा में वाहन चलाने के लिए जागरूक किया गया।
इसके साथ ही सड़क पर अनुशासन बनाए रखने और लापरवाही से वाहन नहीं चलाने की समझाइश भी दी गई।
164 मामलों का निराकरण, ₹99,300 का अर्थदंड
मोबाइल कोर्ट के दौरान न्यायिक अधिकारियों ने कुल 164 मामलों का निराकरण किया। इन मामलों में 99,300 रुपए का अर्थदंड अधिरोपित किया गया।
कार्रवाई में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट फिरोज अख्तर तथा न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मधुबाला सोलंकी, दिव्या मित्तल और श्रीति अतुलकर सहित विभिन्न तहसील न्यायालयों के मजिस्ट्रेट शामिल रहे।
पुलिस और प्रशासन का भी रहा सहयोग
मोबाइल कोर्ट की कार्रवाई स्थानीय पुलिस और प्रशासन के सहयोग से की गई। न्यायिक अधिकारियों, न्यायालयीन स्टाफ, पुलिस और प्रशासन के समन्वित प्रयास से नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई के साथ-साथ आमजन को यातायात नियमों के प्रति जागरूक किया गया।
इस पहल के जरिए न्यायिक व्यवस्था ने कानूनी कार्रवाई के साथ जनसंवाद और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता का संदेश दिया।
