MP में मानसून के 11 दिन बाकी, 33.2 इंच बारिश फिर भी 4.1 इंच की कमी; 37 जिलों में सामान्य से कम पानी
मध्यप्रदेश में मानसून के 11 दिन बाकी हैं और अब तक 33.2 इंच बारिश हुई है। सामान्य कोटे से 4.1 इंच कमी है। 37 जिलों में बारिश सामान्य से कम है।


भोपाल। मध्यप्रदेश में मानसून अब अंतिम दौर में पहुंच गया है। सीजन खत्म होने में महज 11 दिन बाकी हैं और प्रदेश में अब तक 33.2 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है। यह सामान्य मानसूनी बारिश के आंकड़े का 89.3 प्रतिशत है। प्रदेश की सामान्य मानसूनी बारिश 37.3 इंच मानी जाती है। इस हिसाब से सामान्य कोटा पूरा करने के लिए अभी करीब 4.1 इंच बारिश की जरूरत है।
मौसम विभाग के मुताबिक अगले चार दिनों तक प्रदेश में हल्की बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके बाद सितंबर के अंतिम सप्ताह में यदि कोई मजबूत मौसम प्रणाली सक्रिय होती है, तो कुछ जिलों में तेज बारिश देखने को मिल सकती है। ऐसे में प्रदेश के कुल बारिश के आंकड़े में सुधार की संभावना है।
हालांकि, सभी जिलों में सामान्य बारिश का आंकड़ा हासिल करना आसान नहीं होगा। कई जिलों में बारिश की कमी अभी भी बनी हुई है।
37 जिलों में सामान्य से कम बारिश
प्रदेश में अब तक करीब 18 जिलों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश दर्ज हो चुकी है, जबकि 37 जिलों में बारिश सामान्य से कम है।
भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया में सामान्य या उससे अधिक बारिश दर्ज की गई है।
इसके विपरीत कई जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य के 80 प्रतिशत तक भी नहीं पहुंच पाया है।
इनमें इंदौर, धार, आलीराजपुर, रायसेन, विदिशा, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, पांढुर्णा, सागर, उज्जैन, रतलाम और शाजापुर प्रमुख रूप से शामिल हैं।
इन जिलों में सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा करने के लिए मानसून के बचे हुए दिनों में लगातार बारिश की जरूरत होगी।
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नर्मदापुरम समेत कई संभागों में कमी
बारिश की कमी का असर प्रदेश के कई बड़े संभागों में भी दिखाई दे रहा है। इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और नर्मदापुरम संभाग के कई जिलों में अभी सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है।
इन क्षेत्रों में सितंबर के आखिरी दिनों में बनने वाली किसी प्रभावी मौसम प्रणाली से बारिश की उम्मीद बनी हुई है। हालांकि, यह बारिश कितनी और किन क्षेत्रों में होगी, यह आने वाले दिनों में मौसम प्रणाली की स्थिति पर निर्भर करेगा।
मऊगंज और निवाड़ी में सामान्य से दोगुने से ज्यादा पानी
प्रदेश में जहां कई जिले बारिश की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं कुछ जिलों में मानसून ने सामान्य आंकड़े को काफी पीछे छोड़ दिया है।
मऊगंज और निवाड़ी में सामान्य से दोगुने से अधिक बारिश दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इससे प्रदेश के जिलावार बारिश के आंकड़ों में बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है।
यानी एक तरफ कुछ जिलों में सामान्य कोटा पूरा होने के बाद भी बारिश जारी रही, जबकि दूसरी ओर कई जिले सामान्य बारिश के आंकड़े से काफी पीछे रह गए।
22 सितंबर तक हल्की बारिश का दौर
मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार प्रदेश में अगले चार दिनों यानी 22 सितंबर तक हल्की बारिश का दौर बना रह सकता है।
पश्चिमी हिस्से में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय होने के कारण कुछ जिलों में बारिश हो रही है। वहीं 19 सितंबर की शाम के आसपास उत्तर अंडमान सागर में नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना जताई गई है।
इसके दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश तट की ओर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने के संकेत हैं। इस मौसम प्रणाली के प्रभाव से मध्यप्रदेश में एक बार फिर मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।
यदि यह सिस्टम पर्याप्त मजबूत रहा तो सितंबर के अंतिम सप्ताह में प्रदेश के कुछ हिस्सों में तेज बारिश हो सकती है।
जून की बारिश की कमी अब भी बनी हुई
इस मानसून सीजन में प्रदेश के लिए सबसे बड़ी चुनौती जून की बारिश रही। जून में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी।
जुलाई की शुरुआत में हुई तेज बारिश से स्थिति में सुधार हुआ। इसके बाद जुलाई और अगस्त में बारिश ने सामान्य आंकड़े को काफी हद तक संभाल लिया, लेकिन मानसून में दो बार ब्रेक आने के कारण कई दिनों तक बारिश का दौर थमा रहा।
सितंबर में बारिश होने के बावजूद जून की शुरुआती कमी की पूरी भरपाई नहीं हो सकी।
इसी वजह से मानसून के अंतिम दौर में पहुंचने के बाद भी प्रदेश में कुल बारिश सामान्य से करीब 7 प्रतिशत पीछे बनी हुई है।
अब आखिरी 11 दिन पर टिकी नजर
प्रदेश में मानसून सीजन समाप्त होने में अब सिर्फ 11 दिन बाकी हैं। ऐसे में अब मौसम विभाग और किसानों की नजर सितंबर के अंतिम सप्ताह में बनने वाली संभावित मौसम प्रणालियों पर है।
यदि अंतिम दिनों में अच्छी बारिश होती है तो प्रदेश का कुल आंकड़ा सामान्य बारिश के करीब पहुंच सकता है। लेकिन जिन जिलों में बारिश सामान्य के 80 प्रतिशत से भी कम है, वहां इतनी कम अवधि में कमी पूरी करना चुनौतीपूर्ण रहेगा।
इस बार प्रदेश का मानसून एक समान नहीं रहा। कुछ जिलों में सामान्य से काफी अधिक बारिश हुई, जबकि कई जिले अब भी बारिश की कमी से जूझ रहे हैं। अब मानसून के अंतिम 11 दिन तय करेंगे कि प्रदेश का कुल बारिश का आंकड़ा सामान्य के कितने करीब पहुंचता है।

