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भोपाल · 23 मिनट पहले

MP News : मध्यप्रदेश में 41 हजार करोड़ से ज्यादा के विकास कार्यों को मंजूरी

मध्यप्रदेश कैबिनेट ने 41 हजार करोड़ से अधिक के विकास प्रस्तावों को मंजूरी दी। 3 नए टेक्नोलॉजी विश्वविद्यालय, मूंग खरीदी 60%, डेयरी के लिए 2,973 करोड़ और बायपास परियोजनाओं को मंजूरी मिली।

दीपक शर्मा
दीपक शर्मा
Editor-in-Chief · 23 मिनट पहले
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MP News : मध्यप्रदेश में 41 हजार करोड़ से ज्यादा के विकास कार्यों को मंजूरी

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में मध्यप्रदेश के विकास, सड़क, ग्रामीण रोजगार, डेयरी, तकनीकी शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कई बड़े फैसले लिए गए। मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के सर्वांगीण विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए करीब 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय प्रस्तावों को मंजूरी दी।

बैठक में ग्रामीण रोजगार के लिए वीबी जी राम जी योजना के लिए 29,619 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रस्ताव का अनुसमर्थन किया गया। वहीं दूध उत्पादकों और सांची ब्रांड के उन्नयन के लिए 2,973 करोड़ रुपये की डेयरी विकास योजना को मंजूरी दी गई।

इसके अलावा पश्चिम भोपाल बायपास और मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग के निर्माण को मंजूरी, आरजीपीवी के पुनर्गठन के साथ भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में तीन नए प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय स्थापित करने का निर्णय और स्वास्थ्य संस्थानों के रखरखाव के लिए 1,400 करोड़ रुपये से अधिक की स्वीकृति दी गई।

ग्रामीण रोजगार के लिए 29,619 करोड़ रुपये

मंत्रि-परिषद ने विकसित भारत (ग्रामीण): वीबी जी राम जी विकसित भारत जी राम जी योजना मध्यप्रदेश के क्रियान्वयन का अनुसमर्थन किया। योजना को 1 जुलाई 2026 से प्रभावी किए जाने का निर्णय लिया गया है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना की अनुमानित लागत 3,183 करोड़ रुपये और वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक कुल अनुमानित लागत 26,436 करोड़ रुपये बताई गई है। केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी 60:40 के अनुपात में होगी। राज्यांश करीब 10,574 करोड़ रुपये रहेगा, जबकि पांच वर्षों में प्रशासनिक व्यय के लिए 946 करोड़ रुपये राज्य सरकार वहन करेगी।

योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले इच्छुक वयस्क सदस्यों को अब प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 100 दिन के स्थान पर 125 दिनों के श्रमजन्य रोजगार की वैधानिक गारंटी देने का प्रावधान किया गया है।

ग्राम पंचायतें GIS आधारित तकनीक, पीएम गति शक्ति लेयर्स और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करते हुए विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार करेंगी। योजना में बायोमेट्रिक उपस्थिति, डिजिटल मस्टर रोल और हर छह महीने में सामाजिक अंकेक्षण को भी अनिवार्य किया गया है।

दूध उत्पादकों और सांची ब्रांड के लिए 2,973 करोड़

मंत्रि-परिषद ने प्रदेश की सहकारी दुग्ध व्यवस्था और सांची ब्रांड को मजबूत करने के लिए 2,973 करोड़ रुपये की डेयरी विकास योजना को मंजूरी दी है।

योजना के तहत अगले पांच वर्षों में सहकारी दुग्ध समितियों का विस्तार 7,331 गांवों से बढ़ाकर 26,000 गांवों तक करने का लक्ष्य रखा गया है।

दूध संकलन क्षमता को 12 लाख किलोग्राम प्रतिदिन से बढ़ाकर 52 लाख किलोग्राम और दूध प्रसंस्करण क्षमता को 17.8 लाख लीटर से बढ़ाकर 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य है। वहीं दूध पैकेट बिक्री को 7 लाख लीटर से बढ़ाकर 35 लाख लीटर प्रतिदिन करने की योजना है।

कृत्रिम गर्भाधान कवरेज को भी 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।

पश्चिम भोपाल बायपास के लिए 3,774 करोड़ की मंजूरी

मंत्रि-परिषद ने 35.61 किलोमीटर लंबे पश्चिम भोपाल बायपास के चार लेन निर्माण के लिए संशोधित प्रशासकीय स्वीकृति दी है।

परियोजना की कुल वित्तीय लागत 3,225 करोड़ 51 लाख रुपये बताई गई है। इसके अतिरिक्त निर्माण पूर्व गतिविधियों के लिए 548 करोड़ 29 लाख रुपये का भुगतान राज्य बजट से किए जाने को मंजूरी दी गई है।

बायपास बनने के बाद जबलपुर और नर्मदापुरम की ओर से इंदौर जाने वाले वाहनों को भोपाल शहर से होकर गुजरने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे करीब 21 किलोमीटर की दूरी कम होने का अनुमान है।

परियोजना के रेखांकन में बदलाव के कारण इसकी लागत में पूर्व स्वीकृति की तुलना में 8.18 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन फोरलेन को मंजूरी

मंत्रि-परिषद ने 67.116 किलोमीटर लंबे मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग को चार लेन और पेव्ड शोल्डर के साथ बनाने की प्रशासकीय स्वीकृति दी है।

परियोजना की कुल वित्तीय लागत 2,776 करोड़ 83 लाख रुपये है। निर्माण पूर्व कार्यों के लिए 428 करोड़ 94 लाख रुपये और सुपरविजन चार्ज के लिए 65 करोड़ 77 लाख रुपये राज्य बजट से दिए जाएंगे।

यह मार्ग मेहलुआ चौराहे से शुरू होकर बीना होते हुए मालथौन में एनएच-44 से जुड़ेगा। बीना क्षेत्र में रिफाइनरी, थर्मल पावर प्लांट, रेलवे यार्ड और प्रमुख उद्योगों को देखते हुए इस मार्ग को क्षेत्रीय और औद्योगिक यातायात के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

RGPV के स्थान पर तीन नए प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय

तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा फैसला लेते हुए मंत्रि-परिषद ने वर्तमान राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV), भोपाल के पुनर्गठन को मंजूरी दी है। इसके स्थान पर भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में तीन अलग-अलग प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय स्थापित किए जाएंगे।

इनके नाम इस प्रकार होंगे—

मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय — भोपाल

मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय — उज्जैन

महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय — जबलपुर

भोपाल विश्वविद्यालय के क्षेत्राधिकार में भोपाल, नर्मदापुरम, चंबल और ग्वालियर संभाग रहेंगे। उज्जैन विश्वविद्यालय के अंतर्गत उज्जैन और इंदौर संभाग होंगे, जबकि जबलपुर विश्वविद्यालय के अंतर्गत जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभागों के तकनीकी संस्थान आएंगे।

वर्तमान में RGPV से 13 पाठ्यक्रम, 585 संस्थान और 3.83 लाख से अधिक विद्यार्थी जुड़े हैं।

तीनों विश्वविद्यालयों के संचालन के लिए अलग-अलग अधिनियम लागू किए जाएंगे।

स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 1,400 करोड़ से अधिक

प्रदेश की चिकित्सा संस्थाओं में मशीनों और उपकरणों के रखरखाव के लिए मंत्रि-परिषद ने 488 करोड़ 41 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। यह योजना 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रहेगी।

इसके अलावा चिकित्सा संस्थानों की विभागीय परिसंपत्तियों के रखरखाव के लिए 915 करोड़ 77 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई है। इस राशि से मॉड्यूलर किचन, मॉड्यूलर ओटी सहित अन्य विभागीय परिसंपत्तियों के मरम्मत कार्य किए जाएंगे।

नए जिलों में नए पदों को मंजूरी

मंत्रि-परिषद ने नवगठित जिलों में प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत करने के लिए नए पदों के सृजन को भी मंजूरी दी।

मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के जिला कार्यालयों के संचालन के लिए 15 नियमित पद और छह आउटसोर्स मानव संसाधन स्वीकृत किए गए हैं। कुल 21 पदों/मानव संसाधन की व्यवस्था होगी।

वहीं निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर में जिला आयुष कार्यालयों के संचालन के लिए 20 पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है।

किसानों को बड़ी राहत, मूंग खरीदी की सीमा 60 प्रतिशत

मंत्रि-परिषद ने पंजीकृत किसानों से ग्रीष्मकालीन मूंग की उपज की खरीदी सीमा को 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत तक किए जाने के मुख्यमंत्री के निर्णय का अनुसमर्थन किया।

रबी विपणन वर्ष 2026 में मूंग और उड़द के उपार्जन के लिए 1 जुलाई 2026 से लागू निर्णय को भी मंत्रि-परिषद की मंजूरी मिली है।

सरकार के इस फैसले से पंजीकृत किसानों को अपनी मूंग उपज का अधिक हिस्सा समर्थन मूल्य व्यवस्था के तहत बेचने का अवसर मिलेगा।

मंत्रि-परिषद के प्रमुख फैसले एक नजर में

ग्रामीण रोजगार वीबी जी राम जी योजना के लिए 29,619 करोड़ रुपये

डेयरी सांची और सहकारी डेयरी विकास के लिए 2,973 करोड़ रुपये

पश्चिम भोपाल बायपास 4-लेन बायपास के लिए करीब 3,774 करोड़ रुपये

मेहलुआ-बीना मार्ग 67.116 किमी फोरलेन के लिए करीब 3,272 करोड़ रुपये

तकनीकी शिक्षा भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में 3 नए विश्वविद्यालय

स्वास्थ्य उपकरण 488.41 करोड़ रुपये

चिकित्सा परिसंपत्तियां 915.77 करोड़ रुपये

सामाजिक न्याय मैहर, मऊगंज, पांढुर्णा में 21 पद

आयुष चार जिलों में 20 पद

किसान मूंग खरीदी सीमा 25% से बढ़ाकर 60%

मंत्रि-परिषद के इन फैसलों को राज्य में बुनियादी ढांचे, ग्रामीण रोजगार, तकनीकी शिक्षा, स्वास्थ्य, डेयरी और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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