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धर्म संस्कृति · 21 मिनट पहले

Hartalika Teej और Ganesh Chaturthi 14 सितंबर को एक साथ

Hartalika Teej और Ganesh Chaturthi 14 सितंबर 2026 को एक साथ पड़ रहे हैं। जानें तीज पूजा, विसर्जन और गणेश स्थापना का सही समय व क्रम।

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समाचार डेस्क · 21 मिनट पहले
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Hartalika Teej और Ganesh Chaturthi 14 सितंबर को एक साथ

नर्मदापुरम। इस बार हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी को लेकर श्रद्धालुओं के बीच असमंजस की स्थिति बन रही है। सामान्य तौर पर हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि और गणेश चतुर्थी चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। इस बार पंचांग गणना के अनुसार दोनों पर्वों का संयोग एक ही दिन बताया जा रहा है। ऐसे में सवाल है कि हरतालिका तीज की पूजा, व्रत और विसर्जन के बाद गणेश जी की स्थापना कब की जाए।

पंचांग के अनुसार तृतीया तिथि 13 सितंबर 2026 को सुबह 7:08 बजे शुरू होकर 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे समाप्त होगी। वहीं 14 सितंबर को मध्याह्न काल में चतुर्थी तिथि होने के कारण गणेश चतुर्थी का पर्व भी इसी दिन मनाया जाएगा।

14 सितंबर को हरतालिका तीज का पूजा मुहूर्त

14 सितंबर को हरतालिका तीज की प्रातःकालीन पूजा के लिए सुबह 6:26 बजे से 7:06 बजे तक का समय बताया गया है। इस दौरान महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर सकती हैं।

हरतालिका व्रत में तृतीया तिथि के सूर्योदय से संबंध को महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए 14 सितंबर की सुबह तृतीया तिथि मौजूद रहने के कारण इस दिन हरतालिका तीज का व्रत और पूजन किया जाएगा।

गणेश स्थापना के लिए दोपहर का अभिजीत मुहूर्त

गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की स्थापना के लिए 14 सितंबर को दोपहर 12:09 बजे से 12:58 बजे तक अभिजीत मुहूर्त बताया गया है।

इसलिए हरतालिका तीज की सुबह की पूजा पूरी करने के बाद गणेश जी की स्थापना दोपहर के शुभ मुहूर्त में की जा सकती है। तृतीया तिथि सुबह 7:06 बजे समाप्त होने के बाद चतुर्थी तिथि के दौरान गणेश स्थापना की जाएगी।

पहले हरतालिका पूजा, फिर गणेश स्थापना

यदि दोनों पर्व एक ही दिन पड़ते हैं तो पूजा का क्रम इस प्रकार रखा जा सकता है—

सुबह: हरतालिका तीज की पूजा, कथा और आवश्यक धार्मिक विधियां पूरी करें।

इसके बाद: यदि घर में बालू या मिट्टी से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर पूजा की गई है, तो स्थानीय परंपरा और पंचांग के अनुसार उसका विसर्जन करें तथा पूजा स्थल को स्वच्छ करें।

दोपहर: शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश की नई प्रतिमा की स्थापना और पूजा करें।

इस तरह दोनों पर्वों की पूजा अलग-अलग समय में व्यवस्थित रूप से की जा सकती है।

क्या दोनों पूजाओं के लिए अलग स्थान जरूरी है?

हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी की पूजा के लिए अलग-अलग चौकी या स्थान रखना सुविधाजनक माना जा सकता है। इससे दोनों पूजाओं की सामग्री और प्रतिमाओं को व्यवस्थित रखने में आसानी होगी।

हरतालिका तीज की पूजा समाप्त होने के बाद शिव-पार्वती की बालू या मिट्टी की प्रतिमा के विसर्जन की परंपरा का पालन किया जा सकता है। इसके बाद स्थान को साफ करके गणेश जी की स्थापना की जा सकती है।

निर्जला व्रत रखने वाली महिलाएं क्या करें?

हरतालिका तीज पर निर्जला व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह शिव-पार्वती की पूजा और कथा के बाद अपनी पारिवारिक एवं स्थानीय धार्मिक परंपरा के अनुसार व्रत संबंधी आगे की विधि करें।

हालांकि, केवल गणेश स्थापना के कारण व्रत का नियम बदलना आवश्यक नहीं माना जाना चाहिए। व्रत और पारण की विधि अलग-अलग परंपराओं और परिवारों में अलग हो सकती है। इसलिए अपने क्षेत्र के मान्य पंचांग और आचार्य की सलाह को प्राथमिकता देना उचित रहेगा।

गणेश स्थापना के समय लगाएं मोदक और लड्डू का भोग

गणेश चतुर्थी की स्थापना के दौरान भगवान गणेश को मोदक, लड्डू और अन्य पारंपरिक प्रसाद अर्पित किए जा सकते हैं। पूजा के बाद प्रसाद परिवार और श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है।

शाम का गोधूलि मुहूर्त भी रहेगा

14 सितंबर को शाम की पूजा के लिए गोधूलि मुहूर्त शाम 6:42 बजे से 7:05 बजे तक बताया गया है। इस समय भी श्रद्धालु अपनी परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना कर सकते हैं।

ध्यान रखें

तिथि और मुहूर्त की गणना स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकती है। इसलिए हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी की पूजा, व्रत-पारण तथा मूर्ति स्थापना के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग और विद्वान पंडित की सलाह को अंतिम आधार बनाना उचित रहेगा।

इस बार दोनों पर्वों के संयोग में मुख्य बात यह है कि सुबह हरतालिका तीज की पूजा पूरी करने के बाद दोपहर में चतुर्थी तिथि के दौरान भगवान गणेश की स्थापना की व्यवस्था की जा सकती है।

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